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सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कुपोषण की शिकार बच्ची को लिया गोद, सरकार चला रही है विशेष अभियान

पूरे प्रदेश में 27000 से अधिक कुपोषण के शिकार बच्चे हैं. जिनकी देखभाल की सख्त जरूरत है. 1700 ऐसे बच्चे हैं, जो अति कुपोषित हैं. 

सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कुपोषण की शिकार बच्ची को लिया गोद, सरकार चला रही है विशेष अभियान
प्रदेश सरकार कुपोषण के शिकार बच्चों के बेहतर सेहत के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएंगी.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार कुपोषण के खिलाफ एक विशेष अभियान चला रही है. इसके तहत कुपोषित बच्चों को पोषण के आहार उपलब्ध कराए जाएंगे. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को पोषण अभियान की शुरुआत की है. जिसके तहत प्रदेश के 27000 कुपोषित बच्चों को आहार उपलब्ध कराया जाएगा. इस अभियान में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक अहम पहल भी की है. उन्होंने मंत्रियों, विधायकों, और अधिकारियों को कुपोषित बच्चों को गोद लेने की निर्देश दिए हैं.

इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कुपोषण की समस्या को समाप्त किया जा सकता है, यह कोई असंभव कार्य नहीं है. इसके लिए जन सहभागिता बहुत जरूरी है. समाज के सभी वर्गों के लोगों को सामने आना होगा और पोषण अभियान का हिस्सा भी बनना होगा. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयंसेवी संस्थानों के साथ उद्योगपतियों से भी अपील की है कि कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आगे आए और कुपोषण को समाप्त करने के लिए सहयोग करें.

 

मसूरी विधानसभा क्षेत्र के सभी कुपोषित बच्चों की देखभाल करेंगे विधायक गणेश जोशी
पूरे प्रदेश में 27000 से अधिक कुपोषण के शिकार बच्चे हैं. जिनकी देखभाल की सख्त जरूरत है. 1700 ऐसे बच्चे हैं, जो अति कुपोषित हैं. प्रदेश सरकार कुपोषण के शिकार बच्चों के बेहतर सेहत के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएंगी. आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषण के शिकार बच्चों को दूध उपलब्ध कराया जा रहा है. कुछ केंद्रों पर दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. वहां पर अंडे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि जब एक बच्चा स्वस्थ होता है, तो उसे कई तरह के फायदे होते हैं. एक तो उसका सर्वांगीण विकास होता है. दूसरा परिवार पर किसी तरह का आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता है. क्योंकि बच्चों के बीमार होने से परिवार पर इसका बुरा असर पड़ता है. बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है, ऐसे में कुपोषित बच्चों को भी तरह-तरह की बीमारियों से जूझना पड़ता है और आए दिन वे बीमार हो जाते हैं. ऐसी परिस्थिति को दूर करने के लिए सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी मुहिम से जुड़ना होगा. उनका कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ता, कारोबारी के साथ में पत्रकारों को भी उसे कुछ बच्चों को गोद लेना चाहिए. 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुपोषण की शिकार बच्ची को जाना हाल
राजधानी देहरादून के माता मंदिर पर रहने वाली 2 साल की मासूम योगिता को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गोद लिया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने योगिता के घर पहुंच कर उसका हाल जाना. मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है. महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव महिला बाल विकास सौजन्या के साथ कई अधिकारियों ने भी मासूम बच्चों को गोद लिया है. इस तरह से अब तक करीब 60 अति कुपोषित बच्चों को जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया है.

दरअसल, सरकार की कोशिश है कि इस मुहिम को पब्लिक का अभियान बनाया जाए. जिससे इसमें अधिक से अधिक लोग सहयोग कर सकें और कुपोषित कुपोषित बच्चों को उनका सहयोग मिल सकें. लगातार सरकार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है. मगर जिस तरह से कुपोषण के बच्चों की संख्या बढ़ी है, ऐसे में यह चिंताजनक भी है. देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिले  भी कुपोषण के अधिक मामले सामने आ रहे हैं. मगर हैरत की बात है कि राजधानी देहरादून, धर्मनगरी हरिद्वार, सरोवर नगरी नैनीताल और औद्योगिक क्षेत्र उधम सिंह नगर जिले में कुपोषण के काफी बच्चे सामने आ रहे हैं.