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संस्कृत पढ़कर आईएएस बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य वाचस्पति मिश्र ने बताया कि इस छात्रवृति में उन्हीं बच्चो को फायदा मिलेगा, जिनके 60 प्रतिशत से ज्यादा अंक होंगे.

संस्कृत पढ़कर आईएएस बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति
ऐसा पहली बार हुआ है जहां इतने बड़े स्तर पर ये योजना चलाने का प्लान बनाया गया है. (फाइल फोटो)

लखनऊ: देववाणी  संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा कहलाती है. बदलते दौर में संस्कृत के प्रति लोगों का रुझान खत्म हो रहा है और संस्कृत भाषा विलुप्त सी प्रतीत होती है. लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान एक ऐसी योजना ला रहा है, जिससे इस भाषा को फिर से प्रचलन में लाया जा सकेगा. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान अब संस्कृत से आईएएस बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति देने जा रहा है. साथ ही उनके रहने पढ़ने और खाने का इंतज़ाम भी संस्थान करेगा. इसके साथ ही संस्कृत संस्थान के 1175 संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 1 लाख के करीब छात्र-छात्राओं को भी संस्कृत भाषा पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति दी जायेगी.

हालांकि पहले फेज में प्रयोग के तौर पर एक हज़ार बच्चों का चयन किया जाएगा और इसमें क्लास 6 से 8 तक के बच्चों को दो हज़ार, 9वीं और 10वीं के बच्चों को 5 हज़ार और 11वीं और अन्तर के बच्चों को 6 हज़ार रूपए दिए जाएंगे. उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य वाचस्पति मिश्र ने बताया कि इस छात्रवृति में उन्हीं बच्चो को फायदा मिलेगा, जिनके 60 प्रतिशत से ज्यादा अंक होंगे. हालांकि, इससे पहले 500 रूपए बच्चों को छात्रवृत्ति के मिलते थे. लेकिन, आईएएस की पढ़ाई के लिए कोई पैसा नहीं मिलता था. ऐसा पहली बार हुआ है जहां इतने बड़े स्तर पर ये योजना चलाने का प्लान बनाया गया है.

संस्कृत से आईएएस बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सपनों को उड़ान देने के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान अब उन अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति देने जा रहा है. जिसके बाद अब उम्मीद ये की जा रही है कि संस्कृत पढ़कर  सिविल सेवा की परीक्षा पास करने वालों की संख्या में भी इजाफा होगा. साथ ही छोटे बच्चों का भी रुझान संस्कृत की तरफ होगा. फिलहाल इस योजना के तहत आवेदन करने वाले बच्चे और इस योजना के संयोजक आचार्य कुशल दोनों इस प्रक्रिया से बहुत खुश है और इससे संस्कृत को बढ़ावा मिलने की बात कह रहे है.