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Meerut: क्या आप जानते हैं कि हजारों वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य के दौरान भी यह एक महत्वपूर्ण ट्रे़ड रूट था? ऐसा शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का मानना है. इस रूट ने मौर्य काल में सभ्यता, संस्कृति और व्यापार को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया. आज उसी रूट को बढ़ावा मिला है. जानिए मौर्य शासन के दौरान और अब इस रूट के कायम रहने और विकसित होने के पीछे क्या हैं दावे
प्रदेश के सबसे लंबे और महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे ने केवल यातायात और विकास की नई संभावनाओं को ही नहीं खोला है, बल्कि इसने इतिहास के उन पन्नों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है, जिनमें प्राचीन भारत के विशाल व्यापारिक मार्गों का उल्लेख मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह आधुनिक एक्सप्रेसवे कई मायनों में उन ऐतिहासिक मार्गों की याद दिलाता है, जिन्होंने कभी भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था.
594 किलोमीटर लंबा विकास का गलियारा
करीब 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ छह लेन वाला गंगा एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा. यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों को जोड़ता है. इस मार्ग पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जिससे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा.
मौर्यकालीन व्यापारिक मार्गों से मिलती है समानता
इतिहास और पुरातत्व से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि गंगा के किनारे-किनारे विकसित यह आधुनिक मार्ग प्राचीन भारत के उन व्यापारिक रास्तों की झलक देता है, जो कभी तक्षशिला से पाटलिपुत्र तक फैले हुए थे. माना जाता है कि मौर्यकाल में उत्तर भारत के प्रमुख नगरों को जोड़ने वाले ‘उत्तरपथ’ जैसे मार्ग व्यापार, प्रशासन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र थे.
शोधकर्ताओं के अनुसार हस्तिनापुर, काशी और प्रयागराज जैसे ऐतिहासिक नगर आज भी इस भूगोल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हाल के वर्षों में हस्तिनापुर क्षेत्र में हुए पुरातात्विक अनुसंधानों में मिले अवशेष भी इस क्षेत्र की प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों की ओर संकेत करते हैं.
मेगस्थनीज और प्राचीन ग्रंथों में भी उल्लेख
इतिहासकार बताते हैं कि यूनानी राजदूत और इतिहासकार मेगस्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘इंडिका’ में भारत के प्रमुख मार्गों और व्यापारिक गतिविधियों का उल्लेख किया है. वहीं विभिन्न पुरातात्विक अध्ययनों में हस्तिनापुर, कौशांबी और काशी जैसे नगरों के बीच मजबूत संपर्क के प्रमाण मिलते हैं. माना जाता है कि इन मार्गों ने न केवल व्यापार को बढ़ावा दिया बल्कि सभ्यता और संस्कृति के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाई.
सड़कें हमेशा से रही हैं समृद्धि की आधारशिला
इतिहासकारों का मानना है कि किसी भी युग में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक प्रगति की धुरी बनती हैं. जिस प्रकार प्राचीन व्यापारिक मार्गों ने भारत को समृद्ध बनाया था, उसी तरह आधुनिक गंगा एक्सप्रेसवे भी उत्तर प्रदेश में उद्योग, निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है.
गंगा एक्सप्रेसवे को इसलिए केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि इतिहास और आधुनिक विकास के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है.