पहले विश्व युद्ध में इस्तेमाल की गई राइफल को UP पुलिस कहेगी बाय-बाय, मिलेगी इंसास और SLR

वर्ष 1962 में भारतीय सैनिकों ने इसी राइफल के बूते चीन की सेना का मुकाबला किया था. 

पहले विश्व युद्ध में इस्तेमाल की गई राइफल को UP पुलिस कहेगी बाय-बाय, मिलेगी इंसास और SLR
यह राइफल वर्ष 1945 में यूपी पुलिस को दी गई थी. इससे पूर्व मस्कट 410 राइफलों का प्रयोग किया जाता था.

फर्रुखाबाद: कभी क्रांतिकारियों के दमन के लिए अंग्रेज अफसरों के हाथों में गरजने वाली थ्री-नॉट-थ्री राइफल (303 Rifle) को अब यूपी पुलिस टाटा कहने की तैयारी में है. लगभग सौ सालों का सफर तय कर चुकी यह भारी-भरकम राइफल इतिहास बन जाएगी. प्रदेश सरकार अब पुलिस को इंसास और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार से लैस करने जा रही है. आजादी के बाद से ही यूपी पुलिस का मुख्य हथियार रही 303 बोर की राइफल के उपयोग पर शासन की ओर से रोक लगा दी गई है. एसपी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि आधुनिक एसएलआर व इंसास रायफल आ गई हैं. नई भर्ती के सिपाहियों को पहले से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पुराने सिपाहियों को प्रशिक्षित किया जाएगा.

अंग्रेजों ने सबसे पहले 303 बोर की राइफल का प्रयोग वर्ष 1914 में प्रथम विश्व युद्ध में किया था. भारत में इसका प्रयोग वर्ष 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शुरू हुआ था. वर्ष 1962 में भारतीय सैनिकों ने इसी राइफल के बूते चीन की सेना का मुकाबला किया था. बाद में इसमें मैगजीन लगाकर एक साथ छह फायर करने की क्षमता विकसित की गई. यह राइफल वर्ष 1945 में यूपी पुलिस को दी गई थी. इससे पूर्व मस्कट 410 राइफलों का प्रयोग किया जाता था. वहीं, इंसास राइफल का उपयोग 1999 में कारगिल के युद्ध में भी किया गया था. थ्री-नॉट-थ्री की अपेक्षा काफी कम वजन की होने के साथ यह चलाने में भी आसान है. 400 मीटर तक अचूक निशाना लगाने में सक्षम इंसास में दूरबीन व नाइट-विजन डिवाइस लगाने की भी व्यवस्था है.

वहीं, पुलिस अधीक्षक अनिल मिश्रा का कहना है कि पुलिस हाईटेक हो रही है, जिसके चलते हैं पुराने हथियारों को बदलकर नए हथियार लाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुराने सिपाहियों को अब नए हथियारों को चलाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी. उन्होंने कहा कि नये जवान आधुनिक हथियारों से ही ट्रेनिंग ले रहे हैं.