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स्किल डेवलपमेंट के तहत यूपी संस्कृत संस्थान हर जिले में देगा कर्मकांड की ट्रेनिंग

घर में पूजा हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान हर किसी के लिए एक ऐसे पुजारी की जरुरत पड़ती है, जो इस पूजा को विधि विधान से करा सके. 

स्किल डेवलपमेंट के तहत यूपी संस्कृत संस्थान हर जिले में देगा कर्मकांड की ट्रेनिंग
कर्मकांड कराने वाले आचार्य सुख नंदन का कहना है कि इस पहल के बाद अब विशेष तिथियों और पूजा के दिनों में पंडितों की कमी नही होगी.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब पुजारियों का न तो संकट होगा और ना पाखंडी पुजारी की वजह से आपकी पूजा अधूरी रहेगी. यूपी के संस्कृत संस्थान ने यूपी में पंडितो को कर्मकांड के लिए ट्रेनिंग देने की योजना बनायी है. यूपी के जिलों में स्किल डेवलपमेंट के तहत अब जल्द ही तीन तरह की विधा प्रदान की जायेगी. जिसमें संस्कृत के वेदों के सही उच्चारण के महत्त्व से लेकर उनके अर्थ तक की सारी दी जायेगी. इन तीन कोर्स में योग ,ज्योतिष भी शामिल होंगे.

घर में पूजा हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान हर किसी के लिए एक ऐसे पुजारी की जरुरत पड़ती है, जो इस पूजा को विधि विधान से करा सके. लेकिन, अक्सर पंडित की कमी के चलते पूजा कराने का संकल्प कईयों का पूरा नहीं हो पाता है.ऐसे में अब यूपी के लोगों के घरों में पूजा वेदों से होगी. यूपी संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य वाचस्पति ने बताया कि कर्मकांडियों की बड़ी कतार खड़ी करने के लिए यूपी के जिलों में स्किल डेवलपमेंट के तहत अब जल्द ही तीन तरह के कोर्स  ले कर आ रहा हैं. जिसमें कर्मकांड के साथ योग और ज्योतिष भी शामिल होगा.

उन्होंने बताया कि इसके लिए हर केंद्र पर निशुल्क संस्कृत की किट भी दी जायेगी और इसके लिए आवेदन आने भी शुरू हो गये है. इस बदलते दौर में ब्राह्मणों की नई पीढ़ी पूजा पाठ में रुचि नहीं ले रही है. साथ ही गलत पूजा की वजह से धार्मिक आयोजन सम्पूर्ण नहीं माना जाता है. इसीलिए यूपी हिंदी संस्थान इस तरह की पहल करने जा रहा है. इस ट्रेनिंग के बाद बाकायदा कर्मकांड के लिए जो लोग ट्रेनिंग लेंगे, उनकी डिटेल जिलेवार वेबसाइट पर भी डाली जायेगी. ताकि जजमान को सही पंडित मिल सके जो उनकी पूजा करा सके.

कर्मकांड कराने वाले आचार्य सुख नंदन का कहना है कि इस पहल  के बाद अब विशेष तिथियों और पूजा के दिनों में पंडितों की कमी नही होगी. इसके साथ ही संस्कृत में वेदों के सही उच्चारण करने वालों की वजह से उनकी पूजा बेहतर हो सकेगी. कर्मकांड सीखने के लिए आवेदन कर चुके छात्रों का कहना है कि इस कोर्स से पूजा-पाठ और कर्मकांड के लिए प्रशिक्षित पंडितों की किल्लत से लोगों को नही जूझना पड़ेगा.