America की तर्ज पर UV Rays से सैनिटाइज हो रही लखनऊ मेट्रो, Safe Travel की मिलेगी गारंटी

यूवी सैनिटाइजेशन उपकरण के प्रयोग पर खुशी जताते हुए यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा, "यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है. जब हमने यूवी रेडिएशन के जरिए टोकन सैनिटाइज करने की शुरूआत की थी, तब भी हमें यात्रियों की तरफ से पॉजिटिव फीडबैक मिला था."

America की तर्ज पर UV Rays से सैनिटाइज हो रही लखनऊ मेट्रो, Safe Travel की मिलेगी गारंटी
लखनऊ मेट्रो के कोच का अल्ट्रावायलेट किरणों से सैनिटाइजेशन

विशाल सिंह/लखनऊ: उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है. UPMRC अब Ultraviolet Rays (पराबैंगनी किरणों) से मेट्रो कोच को सैनिटाइज करने वाली भारत की पहली मेट्रो सेवा बन गई है. यात्रियों को मेट्रो से सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कराने की दिशा में यह प्रशासन का अभूतपूर्व कदम है. बता दें, अमेरिका के न्यूयॉर्क मेट्रो (New York Metro) द्वारा इस प्रणाली के सफल परीक्षण के बाद इससे प्रेरणा लेते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो ने भी इसे अपनाया है.

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UPMRC ने बनाया यूवी लैंप
गौरतलब है कि इससे पहले यूपी मेट्रो ने यात्रा टोकन को भी अल्ट्रावायलट रेज़ से सैनिटाइज करने का सफल प्रयोग किया है. यह अभी भी सफलतापूर्वक जारी है. यह तकनीक यूपी मेट्रो ने खुद विकसित की थी, जो कि कोविड के बाद काफी अहम साबित हुई. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब यूपीएमआरसी ने पूरी ट्रेन को ही अल्ट्रा वायलेट किरणों से सैनिटाइज करने का प्रोसेस शुरू किया है. लखनऊ मेट्रो ने सैनिटाइजेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यूवी लैंप विकसित किया है, जो कि कीटाणुनाशक विकिरण प्रणाली (Disinfectant radiation system) पर काम करता है.

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DRDO से मिली थी मंजूरी, यह है लैंप की खासियत
इस उपकरण में 254 नैनो-मीटर तक की शॉर्ट वेवलेंथ वाली अल्ट्रवायलेट-सी किरणों के जरिए सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है. ये किरणें इन सूक्ष्म जीवों के डीएनए और न्यूक्लीक ऐसिड (Nucleic Acid) को नष्ट कर इनका नाश कर देती हैं. अक्टूबर, 2020 में इस उपकरण को डीआरडीओ से मंजूरी मिली थी. वहीं, इस उपकरण को इस्तेमाल करने में कीमत भी काफी कम आती है. यूवी लैंप से सैनिटाइजेशन सोडियम हाइपोक्लोराइट (Sodium Hypochlorite) की तुलना में बेहद सस्ता भी है. जानकारी के मुताबिक, यूवी लैंप के जरिए सैनिटाइजेशन किया जाए तो लागत 40 गुना तक कम भी हो जाएगी.

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30 मिनट में हो जाता है एक ट्रेन का सैनिटाइजेशन
यूपीएमआरसी में प्रयोग किए जा रहे इस उपकरण के जरिए 30 मिनट में ही एक मेट्रो ट्रेन के सभी कोच सैनिटाइज हो जाते हैं. रिमोट के जरिए संचालित इस उपकरण को ऑन करने के 1 मिनट बाद मशीन से रेडिएशन निकलना शुरू होता है. गौरतलब है कि चिकित्सा क्षेत्र में ऑपरेशन थियेटर को सैनिटाइज करने के लिए इसी किस्म के उपकरण इस्तेमाल किया जाता है.

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UPMRC के  मैनेजिंग डायरेक्टर ने जताई खुशी
यूवी सैनिटाइजेशन उपकरण के प्रयोग पर खुशी जताते हुए यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा, "यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है. जब हमने यूवी रेडिएशन के जरिए टोकन सैनिटाइज करने की शुरूआत की थी, तब भी हमें यात्रियों की तरफ से पॉजिटिव फीडबैक मिला था. अब हमने पूरी ट्रेन को यूवी रेज़ के जरिए सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस नई पहल के जरिए हम जनता को एक सुरक्षित सफर का आश्वासन देते हैं."

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