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चिल्ड्रेन होम एकेडमी में मानव अंगों की तस्करी की आशंका के बाद प्रशासन में मचा हड़कंप

Children Home Academy: ऋषिकेश शहर के पास रानीपोखरी थाने में भोगपुर गांव के पास चिल्ड्रेन होम सोसाईटी की स्थापना 1945 में हुई. गरीब और जरुरतमंद बच्चों की पढाई के लिए शुरु हुई सोसाईटी में तब से हास्टल में बच्चे विभिन्न स्कूलों में पढ़ते थे

चिल्ड्रेन होम एकेडमी में मानव अंगों की तस्करी की आशंका के बाद प्रशासन में मचा हड़कंप
स्कूल प्रांगण के पास ही सोसाईटी का कब्रिस्तान है, जहां कई बच्चों को दफनाया गया है.

देहरादून: चिल्ड्रेन होम एकेडमी (Children Home Academy) में मानव अंगों की तस्करी (Trafficking of Human Organs) की आशंका के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया. उत्तराखंड बाल आयोग (Uttarakhand Children Commission) की टीम ने चिल्ड्रेन होम एकेडमी में 8वीं कक्षा के छात्र अभिषेक की मौत के बाद ये आशंका व्यक्त की. इससे पहले भी 10 मार्च को वासु यादव की हास्टल के छात्रों ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी, जिसे स्कूल प्रबंधन ने कब्रिस्तान में दफना दिया. अब 6 महीने बाद एक बार फिर ये जिन्न निकलकर बाहर आ गया है. उस समय आयोग ने सीबीआई से जांच कराने की सस्तुति की थी लेकिन राज्य सरकार ने इसपर कोई निर्णय लिया.

1945 से चल रही है चिल्ड्रेन होम सोसाईटी
ऋषिकेश शहर के पास रानीपोखरी थाने में भोगपुर गांव के पास चिल्ड्रेन होम सोसाईटी की स्थापना 1945 में हुई. गरीब और जरुरतमंद बच्चों की पढाई के लिए शुरु हुई सोसाईटी में तब से हास्टल में बच्चे विभिन्न स्कूलों में पढ़ते थे, लेकिन 1970 के दशक में सोसाईटी ने अपना स्कूल खोल दिया और तब उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उडीसा से गरीब बच्चों को यहां निशुल्क पढ़ाई दी जाती है. स्कूल तब सुर्खियों में आया जब 14 साल वासु यादव की हत्या हुई. उसके बाद बाल आयोग ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए.

चिल्ड्रेन होम एकेडमी के पास कब्रिस्तान की जांच शुरू, शिक्षा विभाग भी जल्द करेगा कार्रवाई

बाल आयोग ने लगाए गंभीर आरोप
चिल्ड्रेन होम एकेडमी पर बाल आयोग ने कई गंभीर आरोप लगाए है. स्कूल प्रांगण के पास ही सोसाईटी का कब्रिस्तान है, जहां कई बच्चों को दफनाया गया है. आयोग ने स्कूल प्रांगण में खोले गये कब्रिस्तान पर ही सवाल खड़े कर दिए है. स्कूल ने दफनाए गये बच्चों की कब्र पर कोई भी पक्का निर्माण नहीं किया है, बल्कि कच्चा निर्माण दफनाए गये बच्चों की कब्र पर किया गया है. स्कूल परिसर में अभी करीब 400 छात्र छात्राएं पढ़ रहे है और दो अलग-अलग हास्टल में 183 छात्र छात्राएं पढ़ रही हैं. स्कूल के प्राधानाचार्य  मनमोहन चांदीवाल ने कहा कि हास्टल में क्या हो रहा है इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं है. वहीं सोसाईटी के प्रबंधन केलब ने कहा कि कब्रिस्तान काफी पहले से बना हुआ है और वासु यादव को भी उसके परिजनों की सहमति से दफनाया गया है. 

हास्टल में स्वास्थ्य और खाना की व्यवस्था बदहाल
चिल्ड्रेन होम एकेडमी में पढ रहे छात्र छात्राओं के लिए अलग-अलग दो हास्टल है. बाल आयोग की टीम में हास्टल में रह रहे छात्र छात्राओं की स्थिति दयनीय पाई गई. आयोग ने कड़ी फटकार लगाई. आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी और सदस्य सीमा डोरा ने जब खुद हास्टल का निरीक्षण किया तो पाया कि बच्चों को जली रोटी, पीली दाल दी जा रही है. जब आयोग की अध्यक्ष ने खुद खाना खाया तो उन्हें भी उल्टी आ गई. अभिषेक की मौत के बाद भी दोनों हास्टलों में 3 छात्र और 2 छात्राओं की तबीयत खराब होने के बाद उनका सही ईलाज नहीं कराया गया. 8वीं के 12 वर्षीय छात्र अभिषक की मौत कैसे हुई इस मामले पर भी प्रबंधन गोल-मोल जबाव देता रहा.

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आयोग की फटकार के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
चिल्ड्रेन होम एकेडमी में अभिषेक की मौत की जानकारी आयोग को तो मिल गई, लेकिन तीन किमी की दूरी पर स्थित रानीपोखरी थाने को नहीं मिल पाई. आयोग ने एसएसपी को इस सम्बन्ध में 7 दिन के भीतर जांच के आदेश दिए है. वासु हत्याकांड में भी स्कूल प्रबंधन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगे थे. आयोग के दखल के बाद दोबारा पोस्टमार्टम हुआ जबकि पहले पुलिस और स्कूल प्रबंधन फूड प्वाईजनिंग से वासु की  मौत हुई है.