)
Lucknow: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए जुलाई का महीना राहत लेकर आया है. अब अगले महीने आने वाले बिजली बिल में कमी दिखाई देगी. उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की नई दरें जारी करते हुए बिजली को 4.43 प्रतिशत सस्ता करने का फैसला किया है. इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 16 पैसे की कमी के रूप में मिलेगा.
यह राहत पिछले 15 महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है. अनुमान है कि इस फैसले से प्रदेशभर के उपभोक्ताओं को करीब 358 करोड़ रुपये की बचत होगी.
बिजली खरीद सस्ती पड़ी, उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय वार्षिक टैरिफ के अनुसार बिजली खरीद की औसत लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई थी. हालांकि अप्रैल 2026 के दौरान बिजली वितरण कंपनियों ने वास्तविक तौर पर बिजली 4.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी.
यानी बिजली खरीद की लागत में 16 पैसे प्रति यूनिट की कमी आई, जिसका लाभ अब जुलाई के बिल में उपभोक्ताओं को दिया जाएगा. नियामक आयोग के निर्देश के बाद UPPCL ने नई दरें लागू करने का निर्णय लिया.
फ्यूल सरचार्ज विवाद पर आयोग की सख्ती
बीते जून महीने में बिजली कंपनियों द्वारा 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. उपभोक्ता संगठनों ने आरोप लगाया कि इसकी गणना निर्धारित नियमों के विपरीत की गई थी. मामला राज्य विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा, जिसके बाद आयोग ने 23 जून 2026 को सख्त आदेश जारी किए.
आयोग ने स्पष्ट किया कि फ्यूल सरचार्ज की गणना केवल संबंधित माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही की जाएगी. किसी भी पुराने घाटे या देनदारी को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता.
अतिरिक्त वसूली पर उठे सवाल
उपभोक्ता संगठनों का दावा है कि पिछले 14 महीनों के दौरान गलत गणना के जरिए उपभोक्ताओं से करीब 2 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले गए हैं. इस मामले में आयोग के समक्ष अलग से याचिका दायर की गई है.
बताया जा रहा है कि बिजली कंपनियां जुलाई में भी 10 प्रतिशत FPPCA वसूलने की तैयारी में थीं, लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब केवल वास्तविक लागत अंतर के आधार पर ही शुल्क लिया जा सकेगा.
क्या होता है FPPCA?
फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) वह अतिरिक्त शुल्क है, जिसे बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन या बिजली खरीद की लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं के बिल में जोड़ा जाता है. वहीं, लागत घटने की स्थिति में इसका लाभ उपभोक्ताओं को कम बिल के रूप में दिया जाता है. जुलाई में लागू होने वाली नई दरें इसी राहत का उदाहरण हैं.