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UP Gopathy Scheme: उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण अब सिर्फ गायों की देखभाल तक सीमित नहीं रहेगा. योगी सरकार इसे गांवों की कमाई के साथ-साथ लोगों की सेहत और रोजगार से जोड़ने की तैयारी में जुट गई है. सरकार की तैयारी है कि आने वाले समय में गांव-गांव 'गोपैथी केंद्र' खोले जाएं. यहां लोगों को पंचगव्य से जुड़े इलाज और सलाह मिल सकेंगे. सरकार का मानना है कि अगर गोशालाओं को सही तरीके से चलाया जाए तो वे गांवों के लिए कमाई का बड़ा रास्ता बन सकता है. इसके लिए अब गोसेवा को रोजगार और गांवों की तरक्की से जोड़कर देखा जा रहा है.
क्या होता है पंचगव्य?
पंचगव्य में गाय से मिलने वाली पांच चीजों का इस्तेमाल होता है. इसमें दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर शामिल हैं. पुराने समय से गांवों में लोग इन चीजों का इस्तेमाल अलग-अलग घरेलू उपायों में करते आए हैं. अब सरकार इन चीजों से बनने वाले उत्पादों और इलाज की पद्धति को बढ़ावा देना चाहती है. इसे “गोपैथी” भी कहा जाता है. सरकार की कोशिश है कि इस पद्धति को और व्यवस्थित तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाए.
कई बीमारियों में मददगार मानी जा रही पद्धति
पंचगव्य से जुड़े उत्पादों को लेकर दावा किया जाता है कि वे कई तरह की परेशानियों में मदद कर सकते हैं. मधुमेह, सिरदर्द, लकवा, दिल की बीमारी, पेट की दिक्कत, त्वचा रोग और सांस की परेशानी जैसी समस्याओं में इनका इस्तेमाल सहायक रूप में किया जा सकता है. सरकार अब इस दिशा में और अध्ययन करवाने की तैयारी कर रही है ताकि इसके फायदों को बेहतर तरीके से समझा जा सके. हालांकि इसे सामान्य इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक पद्धति के रूप में देखा जा रहा है.
गोशालाएं बनेंगी कमाई का जरिया
योगी सरकार चाहती है कि गोशालाएं सिर्फ गाय रखने की जगह बनकर न रह जाएं. वहां पंचगव्य से जुड़े सामान तैयार किए जाएं ताकि गांवों में रोजगार बढ़ सके. गांवों में मंजन, मरहम, धूपबत्ती, जैविक खाद और दूसरे सामान तैयार किए जाएंगे. इससे स्थानीय लोगों को काम मिलेगा और छोटे कारोबार शुरू हो सकेंगे. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में कमाई बढ़ेगी और लोगों को रोजगार के लिए शहरों की तरफ कम जाना पड़ेगा.
महिलाओं और युवाओं को मिलेगा फायदा
इस योजना में महिलाओं और युवाओं को खास तौर पर जोड़ने की तैयारी है. गांवों की महिलाओं को पंचगव्य से सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे घर के पास ही कमाई कर सकें. युवाओं को सामान बनाने, पैकिंग करने और बाजार तक पहुंचाने के काम से जोड़ा जाएगा. इससे गांवों में छोटे-छोटे कारोबार बढ़ने की उम्मीद है.
खेती को भी मिलेगा सहारा
गोबर और गोमूत्र से बनने वाली जैविक खाद खेती में काफी काम आ सकती है. इससे खेतों में रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम हो सकता है. सरकार का कहना है कि इससे मिट्टी की ताकत बढ़ेगी और किसानों का खर्च भी कम होगा. साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
यूपी बनेगा सबसे बड़ा गोपैथी केंद्र
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर गोपैथी केंद्र खोले जाएंगे. उनका दावा है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गोपैथी केंद्र बन सकता है. मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में सरकार गो संरक्षण को गांवों की तरक्की और रोजगार से जोड़ने पर जोर दे रही है. सरकार की इस योजना को गांवों में रोजगार बढ़ाने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.