मो. शफी ने लोगों को भेजा न्योताः फरिश्ते से बात हो गई है, 1ः10 पर निकलेगी मेरी रूह, देखने आओ
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मो. शफी ने लोगों को भेजा न्योताः फरिश्ते से बात हो गई है, 1ः10 पर निकलेगी मेरी रूह, देखने आओ

मोहम्मद शफी ने खुद अपने रिश्तेदारों और इलाके में रहने वालों को पैगाम भेजकर बताया था कि उनकी फरिश्ते से बात हो गई है और 23 अक्टूबर की दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर उनकी रूह निकलेगी. 

मो. शफी ने लोगों को भेजा न्योताः फरिश्ते से बात हो गई है, 1ः10 पर निकलेगी मेरी रूह, देखने आओ

नितिन श्रीवास्तव/बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बुज़ुर्ग ने अपनी ही मौत का तमाशा लगा दिया. बुजुर्ग की मौत का तमाशा देखने वालों की भारी भीड़ भी इकट्ठी हो गई. मौत के फरिश्ते के आने की संभावनाओं के बीच बाकायदा कब्र खुदवाई गई और बुजुर्ग खुद गुस्ल और कफन पहनकर बैठ गया. लोग घंटों निगाहें लगाए देखते रहे कि रूह कैसे न‍िकलती है. 

मामला बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम नूरगंज का है
वहीं लोगों की आस्था और भावनाओं को देखते हुए बाराबंकी पुलिस और प्रशासन भी इंतजार करता रहा. लेकिन तय समय निकल जाने के बाद न मौत का फरिश्ता आया और न बुजुर्ग की मौत हुई. तब पुलिस और प्रशासन के अधिकारी किसी तरह बुज़ुर्ग को समझा कर वापस घर भेजा. पूरा मामला बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम नूरगंज का है.

मेरी फरिश्ते से बात हो गई है, 1 बजकर 10 मिनट पर निकलेगी रूह
गांव में रहने वाले 109 साल के बुजुर्ग मोहम्मद शफी दिन रात इबादत में डूबे रहते हैं. मोहम्मद शफी ने खुद अपने रिश्तेदारों और इलाके में रहने वालों को पैगाम भेजकर बताया था कि उनकी फरिश्ते से बात हो गई है और 23 अक्टूबर की दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर उनकी रूह निकलेगी. बस फिर क्या था, यह खबर जंगल में आग की तरह फैली और लोग मौके पर इकट्ठे हो गए. 

नहा-धोकर, कफन पहनकर घंटों मौत का इंतजार करता रहा बुजुर्ग
बुजुर्ग मोहम्मद शफी ने अपनी देखरेख में ही गांव के कब्रिस्तान में कब्र खुदवाई और बाकायदा नहा-धोकर कफन पहनकर घंटों तक अपनी मौत का इंतजार करता रहे. लेकिन फरिश्ता उनकी रूह को ले जाने आया ही नहीं. पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मोहम्मद शफी को समझाया और घर ले जाकर छोड़ा. 

रूह निकलते देखने की चाह में जुटी भीड़ भी निराश होकर घर लौटी
वहीं रूह निकलते देखने की चाह में जुटी भीड़ भी निराश होकर घर लौटी. खुद की संभावित मौत का तमाशा बनाने वाले मोहम्मद शफी ने बताया कि वह 5 वक्त की नमाज पढ़ते हैं और उनकी फरिश्तों से रोज मुलाकात होती है. उन्होंने बताया है कि 5 साल पहले भी उनकी मौत होने वाली थी लेकिन नहीं हुई. अब दोबारा मौत को लेकर फरिश्तों से बात हुई, लेकिन इस बार भी रूह नहीं जुदा हुई. बुजुर्ग के लड़कों ने बताया कि उनके पिता का मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहता है. 

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