Building New Uttarakhand: पांच महीने के कार्यकाल में मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की, उत्तराखंड के हित में जो करना होगा करेंगे: सीएम धामी
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Building New Uttarakhand: पांच महीने के कार्यकाल में मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की, उत्तराखंड के हित में जो करना होगा करेंगे: सीएम धामी

ज़ी उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड के कॉन्क्लेव  'बिल्डिंग न्यू उत्तराखंड' (Building New Uttarakhand) में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने शामिल होकर कहीं क्या विशेष बातें, पढ़िए यहां... 

Building New Uttarakhand: पांच महीने के कार्यकाल में मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की, उत्तराखंड के हित में जो करना होगा करेंगे: सीएम धामी

देहरादून. ज़ी उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड का बुधवार को देवभूमि उत्तराखंड के विकास पर चर्चा के लिए बड़ा कॉन्क्लेव आयोजित हुआ. इस कॉन्क्लेव की थीम 'बिल्डिंग न्यू उत्तराखंड' (Building New Uttarakhand) है. इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अपनी भाजपा सरकार के 5 साल के कामकाज, आगामी विजन, पीएम मोदी के राज्य को लेकर दृष्टिकोण, चुनावी रणनीति सहित कई मुद्दों पर पक्ष रखा. सीएम धामी से जी यूपी यूके चैनल के एडीटर रमेश चंद्रा और एंकर राममोहन शर्मा ने सवाल किए, पढ़िए इन सवालों के धामी ने क्या जबाव दिए.

 सवाल- आप अभी-अभी वहींं से होकर आए हैं, जहां आगाामी चार तारीख को पीएम आने वाले हैं. वे चार तारीख को आने वाले हैंं और इसी चार तारीख को आप अपने कार्यकाल का पांचवां महीना पूरा करने वाले हैं. अब आप पीएम के दौरे वाली जगह से लौटकर आए हैं तो प्रदेश के लोगों को क्या बताने वाले हैं?    

उत्तर- प्रधानमंत्री जी का उत्तराखंड से एक अलग तरह का लगाव है. प्रधानमंत्री बनने के बाद उत्तराखंड के लिए बहुत सारी योजनाएं उन्होंने हमको दी हैं. उनकी यात्रा को लेकर हमारे राज्य के लोगों में हमेशा ही एक उत्साह का वातावरण रहता है. हमेशा हम उनकी प्रतीक्षा करते हैं. उनके आने वाले दिन हजारों करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण होगा. पहले से भी बहुत सारी योजनाएं चल रही हैं. उसके बाद बहुत सारी योजनाएं अभी वेटिंग में हैं. कुछ की शुरुआत अभी चार दिसंबर को करेंगे, उसके बाद दिसंबर माह में ही उनका एक और कार्यक्रम प्रतीक्षा में है. उस कार्यक्रम में हमारे राज्य से जुड़ी जो और भी योजनाएं हैं, उनका शिलान्यास मोदीजी करने वाले हैं. निश्चित तौर पर उनकी यात्रा को लेकर पूरे प्रदेश में उत्साह का वातावरण तैयार हो रहा है और लाखों लोग प्रधानमंत्री को सुनने और देखने आएंगे. 

सवाल- प्रधानमंत्री उत्तराखंड आते हैं तो वह आपको अपना मित्र बताते हैं. अमित शाह जी आते हैं तो वह आपको एक ऊर्जावान नेता बताते हैं. राजनाथ सिंह जी आते हैं तो वे आपको 20-20 का धाकड़ बल्लेबाज बताते हैं. अब चुनाव के इस मैच में समय कम है. ज्यादातर गेंदें फेंकी जा चुकी हैं. अधिसूचना जारी होने से पहले एक ओवर ही आपके पास बचा हुआ है. ऐसे में चुनावी पिच कैसी लग रही है और मैच जीतने की आपकी कैसी प्लानिंग है?

जवाब- देखिए मैच और राजनीति में थोड़ा अंतर है. चुनाव के इस रण में हमें सभी राष्ट्रीय नेताओं का आशीर्वाद मिल रहा है. सभी का मार्गदर्शन मिल रहा है. हमने पहले दिन से तय किया था कि जितना भी समय हमारे पास है, उसका एक-एक पल और एक-एक क्षण उत्तराखंड के लिए लगाएंगे. अपने इस लक्ष्य पर हमने लगातार काम किया. जितना समय मेरे पास है उसको मैं बढ़ा तो नहीं सकता हूं, हां इसमें मैंने अपना सबसे बेस्ट देने की कोशिश की है. हमने पिछले चार साढ़े चार महीने में 500 से भी अधिक फैसले लिए हैं. ये फैसले हर सेक्टर में लिए हैं और बिना किसी दबाव के लिए हैं. उत्तराखंड राज्य के हित के लिए जो जरूरी थे वह सारे फैसले हमने लिए हैं. 

सवाल- आपकी पार्टी ने कुछ फैसले रोलबैक भी किए हैं. अभी पिछले 10-15 दिनों के दरमियान कृषि कानून वापसी, देवस्थानम बोर्ड भंग करने जैसे फैसले इसका उदाहरण हैं. इन फैसलों के बारे में क्या राय है, आप इसका बचाव कैसे करेंगे?

जवाब- देखिए जहां तक कृषि कानूनों की बात है तो प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश के सामने कहा है कि वह किसानों के हित में इसको लाए थे और देश हित में उसको वापस लिया है. हम उनके इस फैसले का स्वागत करते हैं कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाया. संवेदनशीलता दिखाई और कृषि कानूनों को वापस लिया. जब 4 जुलाई 2021 को मेरा मुख्य सेवक के रूप में पहला दिन था तो उस दिन ही हमारा देवस्थानम अधिनियम मेरे समक्ष लाया गया. तबसे ही लगातार हम हमारे हकहकूक धारियों, महापंचायत के लोगों, चारों धामों के तीर्थ पुरोहित, हमारे पंडा समाज के लोगों, हमारे जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के लोग, साधु-संतों, समाज के लोगों आदि से लगातार बातें करके उनको बता रहे थे कि हम इसका कोई सर्वमान्य रास्ता निकालेंगे. हमारी सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की. इस दौरान हमने सभी से बात की. लगातार बात करने के बाद कुछ मत पक्ष में आए कुछ विपक्ष में आए और कुछ न्यूट्रल आए. हमने सोचा कि इस समय उत्तराखंड के राज्य के हित में कोई निर्णय लेना है. चार धामों के हित में निर्णय लेना है तो सभी लोगों की सहमति बनना चाहिए. हम उत्तराखंड को आगे ले जाना चाहते हैं तो ऐसे में असंतोष जैसी कोई स्थिति नहीं होना चाहिए. इसे देखते हुए हमारी सरकार ने तय किया कि हम यह अधिनियम वापस ले रहे हैं और हमने उसे वापस ले लिया

सवाल- क्या इसके पीछे मंशा यह थी कि लोग नाराज रहेंगे तो इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा?

जवाब- नहीं-नहीं, देखिए मैं आपको एक बात बिल्कुल स्पष्ट बता देना चाहता हूं कि यह निर्णय वोटों के लिए नहीं है और इसके पीछे कोई राजनीति नहीं है. वोटों के लिए जो काम करते हैं, उन्होंने कहा कि सरकार डर गई. सरकार पीछे हट गई. सरकार ने फैसला पलट दिया. देश की आजादी के बाद से अब तक वोटों के लिए समय से कौन सी पार्टी समझौते करती रही, कौन सी पार्टी परिवार को आगे बढ़ाती रही, कौन सी पार्टी तुष्टीकरण करती रही, यह सब जानते हैं. हमने उत्तराखंड राज्य के हित में इस एक्ट को वापस लिया है. इससे वोटों का कोई लेना देना नहीं है.

सवाल- चुनाव नजदीक हैंं, ऐसे में वोट तो चाहिए ही, जनता का आशीर्वाद चाहिए ही, तो कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिनके आधार पर आप इस बार जनता का आशीर्वाद अपने साथ चाहते हैं?

जवाब- हमने अपने 5 साल के कार्यकाल में बहुत अच्छे काम किए हैं. आप लोग यह भी कह सकते हैं कि तीन मुख्यमंत्री आए, लेकिन सरकार वही है. काम वही आगे चल रहे हैं. जिन कार्यों के शिलान्यास हुए, योजनाएं शुरू हुई थीं, वे सब धरातल पर उतर रहे हैं. सरकार वही है मैं हमेशा कहता हूं. चेहरा बदल गया है लेकिन नीतियां वही हैं. उनको हम आगे बढ़ा रहे हैं पिछले 4 महीने में हमने 500 से अधिक फैसले लिए और प्रधानमंत्री जी ने यहां के लिए बहुत सारे काम किए हैं.  मोदी जी की केंद्र में जब से सरकार आई है, चाहे हम चार धाम, ऑल वेदर रोड, रेल की बात करें या फिर हवाई यात्राओं, हवाई अड्डों, हवाई कनेक्टिविटी की बाद करें, हर क्षेत्र में हमें विकास देखने को मिला है. हमारा एक एम्स ऋषिकेश में चल रहा है, एक एम्स कुमाऊं क्षेत्र के लिए भी स्वीकृत हुआ है. रेल की परियोजनाओं में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन स्वीकृत हुई है. जमरानी बांध परियोजना जो तराई भाबर की लाइफ लाइन है, वह स्वीकृत हो गई है. दिल्ली से देहरादून जाने वाली हमारी एक सड़क जो आने वाले समय में दिल्ली से 2 घंटे के अंदर देहरादून यात्रा पूरी करा देगी, ऐसे बहुत सारे काम लगभग 32000 करोड़ रुपए के सारे स्वीकृत हो गए, जिनमें से अधिकांश का प्रधानमंत्री जी आगामी 4 तारीख को शिलान्यास करेंगे. इन सब कामों को लेकर हम जनता के बीच में जाएंगे. जनता हमारा भाव समझती है. जितना समय मिला है उसमें हमने अपना सर्वोत्तम देने का प्रयास किया, बाकि जनता हमारे भाव को जानती है.

सवाल- पहले के मुख्यमंत्री देवस्थानम बोर्ड को लेकर डटे हुए थे कि हम इस एक्ट को वापस नहीं लेंगे. आप आए और फैसले वापस लिए. आपकी पार्टी की इस पर नीति क्या है और विजन क्या है?

जवाब- मैंने कहा कि हम जो भी रास्ता निकाल रहे हैं. सर्व मान्य तरीके से निकाल रहे हैं. इस समय देश काल परिस्थिति के हिसाब से हमने उसको वापस ले लिया. मैंंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अब मैं मुख्य सेवक हूं और मेरे पास जितने मंतव्य आए हैं, जो रिपोर्ट आई हैं, उसके आधार पर मैंने यह एक्ट वापस किया है, सरकार ने वापस किया है.

सवाल- उप्र और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्ति विवाद को लेकर विपक्ष कह रहा है कि धामी जी ने विवाद सुलझाया जरूर लेकिन इसके बदले कई चीजें गिरवी रख के आ गए, उत्तराखंड को नुकसान कराकर आ गए?

जवाब- देखिए जिसकी जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि. इनके जैसे भाव होंगे वैसे उनको दर्शन होंगे.  पिछले 21 सालों से परिसंपत्ति विवाद की यह प्रक्रिया चल रही थी, उसमें बातें बहुत हुईंं, पर निर्णय नहीं हो पाए. इस बार जो हमने किया उसको मैं आपको एकदम विस्तार से बता देता हूं. जितने लोग मेरी बात को पढ़ रहे होंगे उनके आगे स्थिति भी स्पष्ट कर देता हूं. परिसंपत्ति विवाद में सबसे पहले आता है सिंचाई विभाग का मामला. सिंचाई विभाग की बहुत सारी नहर हैं, जो उत्तर प्रदेश के खेतों में सिंचाई के काम आती हैं और निकलती हमारे यहां से हैं. उसके सारे कंट्रोल उत्तर प्रदेश के पास हैं, और होने भी उनके ही पास चाहिए, क्योंकि सिंचाई का पानी वहीं चाहिए होता है. इसमें 5700 हेक्टेयर जमीन है जिसका उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच में बंटवारा होना है. तो उस पर यह फैसला हुआ कि 57 हेक्टेयर जो जमीन है, उसमें से उत्तर प्रदेश को जितनी जरूरत होगी, उसका जॉइंट सर्वे होगा. जॉइंट सर्वे के आधार पर तय करेंगे कि उनको जितनी जरूरत है वह ले लेंगे. बाकी सारी की सारी उत्तराखंड की हो जाएगी.
 इसके बाद मामला था सिंचाई विभाग के 1700 मकान का, उस पर भी यही फैसला लागू होगा कि जितने मकान की उनको जरूरत होगी, उतने ले लेंगे और बाकी सारे के सारे उत्तराखंड के हो जाएंगे. आपको इसमें कोई गलत लगता है. यह चर्चा पहले से चली आ रही थी. यह कोई मेरा बनाया हुआ नहीं है. जो नोटशीट चली आ रही है, उस पर फैसला हुआ है. 
बंटवारा जब भी घर में होता है तो वह आधा-आधा होता है. इस बंटवारे की जो कंडीशन थी वह पहले अलग थी. उत्तर प्रदेश की सरकारें चाहती थीं कि जनसंख्या के अनुपात के आधार पर दोनों परिसंपत्तियों का बंटवारा हो. उसके बाद आवास विकास परिषद का मामला है. इस परिषद की जितनी भी संपत्ति हैं उनका भी बंटवारा आधे-आधे का हुआ है. अब आते हैं परिवहन निगम पर, जिसमें 310 करोड रुपए हमको वहां से लेना था. तो 310 का 310 करोड़ रुपए उत्तराखंड को मिल रहा है. चूंकि 105 करोड़ हमको भी वहां खाद्य विभाग का देना था, तो वह उसमें से कट गया. यह बैठक में तय हो गया था कि 105 करोड़ रुपए हम उनको दे देंगे. 205 करोड़ हमें मिल जाएगा.  एक बस अड्डा था किच्छा का, वह बस अड्डा भी हमको मिल गया. इसी प्रकार से वन निगम का बंटवारा हुआ. 90 करोड़ हमको उनसे लेना था. इस 90 करोड़ की राशि का उसी दिन फैसला हुआ कि यह आज ही हमको मिल जाएगा. जब मैं लखनऊ में था 77 करोड़ का चेक उसी दिन शाम को हमको मिल गया. इसके अलावा दो बैराज हैं एक बनबसा का बैराज, जो भारत नेपाल सीमा पर है. दूसरा बैराज किच्छा का है. दोनों काफी पुराने हो गए हैं. पिछली बार की आपदा में इनका काफी नुकसान हो गया था. उनमें से एक महाकाली नदी पर है और एक किच्छा में है. दोनों के दोनों बैराज का उत्तर प्रदेश की सरकार पुनर्निर्माण करवाएगी. यह समझौते में तय हो गया है.
अलकनंदा होटल हरिद्वार में है वह भी उत्तराखंड को मिल जाएगा. इस महीने या अगले महीने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का कार्यक्रम होगा, तब वह होटल हमको सौंप दिया जाएगा. इसके अलावा वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियां होनी थी धोराव डेम, बेगुल डेम और गंग नहर में. उनकी एनओसी नहीं होने के कारण यह नहीं हो पा रहा था, क्योंकि कंट्रोल वहीं से था. बैठक में तय हुआ कि हम एडवेंचर स्पोर्ट्स और वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियां वहां कर पाएंगे. एनओसी लेने की आवश्यकता ही नहीं है. आप बताइए अब इसमें हम कौन सा गिरवी रख के आ गए. यह तो वही बोल रहे हैं जो कुछ कर नहीं पाए. अपने समय में अगर उन्होंने कुछ किया होता तो उनको आज यह बोलने की आवश्यकता ही नहीं होती.

सवाल- ये फैसला करने वाले वही अधिकारी हैं कि जो आपके पिछले दो मुख्यमंत्रियों को मिले. पुरानी सरकार पर हम नहीं जाते, पर क्या आपको नहीं लगता कि धामी जी विनम्र ज्यादा है तो यह मामला उनकी विनम्रता से सुलझा है?

जवाब- मैं उप्र के सीएम योगी जी का बहुत आभारी हूं. उनका धन्यवाद अदा करना चाहता हूं. उत्तर प्रदेश के सभी अधिकारी गणों का भी धन्यवाद. क्यों सभी लोगों ने एक टीम भावना के तहत छोटे भाई, बड़े भाई के रिश्ते के तहत ही इस बंटवारे को करवाया. उन्होंने अंकगणित में जरूर उलझाने की कोशिश की पर हमने भी अंक गणित में कम नंबर नहीं लाए हैं. हम पूरे नंबर लेकर आए हैं.

सवाल- तो आपने वहां यह कह दिया कि महाराज जी आपके पास इतना बड़ा प्रदेश है. छोटे भाई के लिए भी कुछ छोड़ दीजिए?

जवाब- मैंने मीटिंग में कहा कि अगर हम गणित के आधार पर फैसला लेंगे तो ऐसा नहीं हो पाएगा. मैं उनका शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने बड़ा हृदय दिखाते हुए सारे फैसले क्लियर कर दिए. सारे के सारे फैसले उसी दिन हो गए. बहुत लंबी मीटिंग भी नहीं चली. बमुश्किल एक घंटा मीटिंग में ही सारे फैसले हो गए.

सवाल- प्रदेश में भू-कानून को लेकर आप क्या फैसला करने वाले हैं?

जवाब- हमें उत्तराखंड राज्य के हित में जो भी फैसले लेने होंगे, उन्हें बिना किसी लाग लपेट के लेंगे. बिना किसी दबाव के लेते जाएंगे. भू कानून के लिए हमने उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाई है. उसके साथ साथ हमको यह भी देखना होगा कि हमारे जो मैदानी क्षेत्र हैं, वहां पर उद्योग धंधे हैं.  जिसके कारण हमको रोजगार मिलता है. रेवेन्यू मिलता है. लोगों को काम मिलता है. व्यापार बढ़ता है. इसके अलावा दूसरा पक्ष यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन हो रहा है. ऐसे में दोनों को ध्यान में रखते हुए, यहां की आर्थिकी को भी ध्यान में रखते हुए, यहां के कारोबार को ध्यान में रखते हुए और कमेटी के आने वाले सजेशंस को देखकर सबकी सहमति से भू कानून पर निर्णय लिया जाएगा. जो भी अच्छा रास्ता होगा वह निकाला जाएगा.

सवाल- उत्तराखंड 21 साल का हो गया है. वह एक युवा राज्य है. आप भी इस युवा राज्य के युवा मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में यहां के यंगस्टर्स के लिए, उनके रोजगार के लिए, स्वास्थ्य के लिए, पलायन के मुद्दे के लिए आप क्या रोडमैप देते हैं?

जवाब- जिस पहले दिन 4 जुलाई से मैंंने काम करना शुरू किया था. तब उस पहले दिन मैंने अपने मंत्रिमंडल में फैसला किया था कि जो 24000 सरकारी पद उस समय खाली थे, उन सभी पदों की भर्ती प्रक्रिया बहुत तेजी से प्रारंभ करेंगे. हमने यह प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. लेकिन मैं मानता हूं कि केवल 24000 सरकारी नौकरियों से काम चलने वाला नहीं है. इसके लिए हमको निश्चित तौर से स्वरोजगार की ओर बढ़ना होगा़. यह केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं होगा. सरकारी तंत्र उसमें सहयोग कर सकता है. जो सरकारी योजनाएं चल रही हैं. उनको मजबूत करने के लिए अभी हम रोजगार के मेले लगा रहे हैं. जिसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री नैनो योजना, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना, उद्योग विभाग की, पर्यटन विभाग की, अलग-अलग विभागों की कितनी ही योजनाएं हैं जिनका एक ही स्थान पर सिंगल विंडो के आधार पर लोगों को लाभ दिलाने की कोशिश करते हैं.
पहले इन मेलों में लाेग रजिस्ट्रेशन करवाने आते थे तो वहां बहुत सारे प्रमाण पत्रों की आवश्यकता होती थी. कहीं जाति प्रमाण पत्र, कहीं चरित्र प्रमाण पत्र, कहीं निवास प्रमाण पत्र की जरूरत होती थी. हम चाहते हैं कि इन प्रमाण पत्रों को एक ही स्थान पर बनाया जाए.  हमारा फोकस है जितने भी लोग स्वरोजगार करना चाहते हैं, अपना रोजगार करना चाहते हैं स्वयं सहायता समूह,ग्राम संगठन, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह और बाकी के जितने भी लोग फॉर्म भरें, उन पर कार्यवाही सुनिश्चित हो.  हमने 15 दिसंबर की डेडलाइन तय की है कि जितने भी आवेदन आएंगे, हम लगातार उनकी जांच करेंगे, जिससे कि लोगों को परेशानी ना हो. हमने बैंक के लोगों से कहा है कि जहां पर भी रोजगार के मेले लगते हैं, आप भी वहां पर अपनी टेबल लगाएं. वहीं स्क्रूटनी कीजिए. वहीं देख लीजिए कि किसी फार्म में कोई कमी तो नहीं है. बैंक में जितने भी फार्म आएं आप कोशिश करिए कि आप सभी को स्वीकृति प्रदान करें सभी को ऋण दें.

सवाल- चार-पांच महीने के कार्यकाल के दौरान आपकी दो तरह की छवि लोगों के बीच में गई. पहली 'सीएम इन एक्शन', एक ऐसे मुख्यमंत्री जो हमेशा एक्शन में रहते हैं. दूसरी छवि 'कूल यंग मैन' की; अपनी इन एक्टिव छवियों के साथ आपने राज्य की ब्यूरोक्रेसी को बहुत तेजी से एक्टिव किया है. यह कैसे मुमकिन कर पाए?

जवाब- देखिए इसका कारण मुझे समझ में आता है कि मैं अपना काम ईमानदारी से करता हूं. मुझे लगता है कि हमारे अधिकारीगण भी कोई हमसे बाहर के नहीं है. इसी समाज के हैं. हमारे परिवार के हैं. वह सारी चीजों को देखते हैं. जब वे देखते हैं कि मुख्य सेवक भी उनके साथ-साथ लगा हुआ है, मेहनत कर रहा है. तो उनके कार्य पर भी इसका असर दिखता है. मेरा भाव है प्रदेश को आगे बढ़ाने का. यहां के लोगों की सेवा करनी है और बेशक इसमें सब मिलकर सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं. इसमें सबका सहयोग मिल रहा है, चाहे अधिकारी हों, आम जनता हो, बड़े बुजुर्ग, माताएं-बहनें सभी का सहयोग मिल रहा है. हम जहां भी जा रहे हैं, सबका एक मोमेंटम बन रहा है कि उत्तराखंड आगे बढ़ रहा है.

सवाल- कुछ मंत्रियों की शिकायतें थीं, कुछ विधायकों की शिकायतें थींं कि अफसर उनकी बातें सुन नहीं रहे हैं. क्या ये शिकायतें दूर हुई हैं?

जवाब- अब सबकी सुनवाई हो रही है. हम सरलीकरण-समाधान-निस्तारीकरण का एक मंत्र लेकर आए हैं कि जनता का कोई भी आदमी किसी अधिकारी के पास जाएगा तो वे अधिकारी उसे इस भाव से सुनेंगे कि वह कोई बड़ी समस्या आपके सामने नहीं लाया है. यह कतई नहीं सोचना है कि उसकी लाई समस्या कोई बड़ी है और वह हल नहीं होगी. पहले से मानसिकता नहीं बनाना है कि काम नहीं करना है, बल्कि उस काम का रास्ता निकालना है. उसको सरल करना है. यह हमारा सरलीकरण का मंत्र है. दूसरे नंबर पर समाधान का मंत्र यानी कि जो काम आ गया है, उसे पहले सरल तरीके से देखना है. फिर समाधान करना है.
समाधान करने के बाद तीसरे नंबर पर आता है निस्तारीकरण. यानी कि उस फाइल को निस्तारित करके देना ही है. मतलब रिजल्ट निकालकर देना है. ऐसे नहीं करना कि काम हुआ ही नहीं और निस्तारित कर दिया, काम पूरा करके ही निस्तारण होगा. तो यह है हमारा सरलीकरण-समाधान-निस्तारण का फार्मूला...
इसके बाद भी चौथे नंबर पर संतुष्टि और संतुष्टि का भाव होना चाहिए. मुझे मेरे कार्यकाल में इतना ही समय मिला. मैं उसे संतुष्ट हूं. मैं इसी समय में कोशिश कर रहा हूं कि एक प्रक्रिया हमारी आगे बढ़े. हमारा उत्तराखंड आगे बढ़े. इसी को चला रहे हैं. सब के सहयोग से आगे बढ़ा रहे हैं.

सवाल- जल्द ही चुनाव की अधिसूचना आ जाएगी. जब आप जनता के मध्य वोट मांगने जाएंगे तो आप 2017 से अब तक की बीजेपी सरकार के काम गिनाएंगे या अपने चार-पांच महीने के कार्यकाल को प्रस्तुत करेंगे?

जवाब- अब तक की हमारी सरकार ने, सारे मुख्यमंत्रियों ने जो काम किए हैं. हम उन सभी को सामने रखेंगे. मेरे द्वारा किए गए काम भी और पहले के मुख्यसेवकों के काम भी. हमारे केंद्र के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार के काम भी सामने हैं. सारे काम हम जनता के बीच रखेंगे. अभी तो हमारा फोकस यह है कि जो भी समय बचा है उसमें हमारी शुरू हुई योजनाओं को हम पूरा करें. जिनके शिलान्यास हो गए हैं, उनके लोकार्पण करें. जो योजनाएं बीच में हैं, उनको पूरा करें. जो योजनाएं चल रही हैं, उनकाे अंजाम तक पहुंचाएं. गरीब कल्याण योजना को प्रधानमंत्री जी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए लागू कर दिया है. उस योजना का लोगों को ठीक से लाभ मिले. अभी इस समय पूरे विश्व में हेल्थ के क्षेत्र में सबसे बड़ी योजनाओं में शुमार आयुष्मान भारत योजना चल रही है. हम चाहते हैं कि उत्तराखंड में ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें. इस योजना से उनको सहायता मिली है. मैं जहां भी जाता हूं वहां के अधिकारियों कर्मचारियों को कहता हूं कि यह योजना गरीबों के लिए लाई गई है. ऐसे लोगों के लिए पांच लाख रुपए की सुरक्षा गारंटी का कवच पूरे साल के लिए दिया गया है. तो ऐसी योजना की लोगों को ठीक से सहायता मिलना चाहिए, इसमें कहीं पर भी कोताही बरती जाएगी, कहीं कोई शिकायत आएगी तो उस पर निश्चित रूप से कार्यवाही की जाएगी.

सवाल- एक बड़ा सवाल यह है कि धामी जी सामने किसको देख रहे हैं. साथ दिखाने के लिए आपके पास प्रधानमंत्री हैं, आपके पास संगठन है. पर आप सामने किसको देख रहे हैं. आपके सामने कौन खड़ा है? 

जवाब- हमारे सामने ये मुद्दे खड़े हैं, जो हमें पूरे करने हैं.

सवाल- आपने अभी कहा कि आपने 5 महीने में 500 फैसले लिए. इसका मतलब है कि आपके पीछे वाले लोगों ने आपके आगे बैकलॉग बहुत छोड़ा है. इतनी योजनाएं बनाना और उनको एग्जीक्यूट करना बहुत मुश्किल है. यह तो आप मानते हैं कि पीछे वालों ने आपके लिए काम बहुत छोड़ा था?

जवाब- मेरे सामने देशकाल परिस्थिति के आधार पर जो भी आया मैंने किया. मुझसे पहले वालों ने भी बहुत अच्छा काम किया था. 

सवाल- क्या कांग्रेस पार्टी को विपक्ष के रूप में देख रहे हैं, या आम आदमी पार्टी जैसे कोई तीसरे दल को विपक्ष के रूप में देख रहे हैं. 

जवाब- नहीं, मैं किसी को पक्ष-विपक्ष के रूप में नहीं देख रहा. दोनों पार्टियों के अपने-अपने एजेंडा हैं. साढ़े चार साल तक कोई पार्टी यहां नहीं दिखी थी. उनके कोई कार्यक्रम भी नहीं थे. जो भी पार्टियां अभी दिख रही हैं, वह सिर्फ चुनाव को ध्यान में रखते बड़ी-बड़ी घोषणा कर रही हैं.  उत्तराखंड की जनता सब जानती है, इसलिए हम किसी को भी सामने नहीं समझ रहे हैं.

सवाल- तो आगामी चुनाव को देखते हुए क्या समझा जाए कि 70 में से कितनी सीट जीत जाएंगे आप?

जवाब- हमारी पार्टी ने नारा दिया है कि अबकी बार 60 पार. 

सवाल- महंगाई और रोजगार जैसे कौन से वे बहुत बड़े मुद्दे हैं जिनसे आपको लड़ना है?

जवाब- हमने पेट्रोल डीजल के दामों में 12 रुपए की कमी की है. देश जिस तरह की परिस्थिति से जूझ रहा है वह किसी से छुपी नहीं है. इस महंगाई के दौर में भी देश के 80 करोड़ लोगों को राशन देने का काम हो रहा है. खाद्यान्न पहुंचाने का काम हो रहा है. इतनी सारी सुविधाएं पूरे देश के अंदर दी जा रही हैं. जब कोरोना महामारी आई थी तो उसके विश्वव्यापी प्रभाव से कई सैकड़ा गुना महंगाई बढ़ गई थी. हमारे आईसीयू बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर आदि के रेट सैकड़ों गुना बढ़े. उत्तराखंड में हम देखें तो सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट, वेंटीलेटर, आईसीयू बेड बन गए हैं. एक तरफ हम कोरोना के मोर्चे पर लड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी और चीन की सीमा, पाकिस्तान सीमा के मोर्चे पर भी लड़ रहे हैं. इतना सब होने के बाद भी देश के अंदर इतनी बड़ी महामारी आई पर कहीं देश रुका नहीं है. देश के कोई कार्यक्रम नहीं रुके. सारे विकास के कार्य चल रहे हैं. यह सब 'मोदी है तो मुमकिन है' की वजह से हुआ है.

सवाल- मोदी है तो जीत भी मुमकिन है क्या?

जवाब- मोदीजी का तो निश्चित तौर पर हमारे ऊपर पूरा आशीर्वाद है. उनके निर्देशन में हम सब काम कर रहे हैं. उन्होंने देश के अंदर इतनी सारी योजनाएं चलाई हैं. उनके नेतृत्व में भारत एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरा है. भारत का मान-सम्मान पूरी दुनिया के अंदर बढ़ा है. आज पूरे विश्व के अंदर जिस प्रकार की स्वीकार्यता मोदी जी की है, संभवत देश के इतिहास में यह पहला उदाहरण है. आज मोदीजी विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं. उत्तराखंड तो उनका अपना प्रदेश है. उन्होंने स्वयं भी कहा है कि मेरा यहां से मर्म और कर्म दोनों का रिश्ता है. उनका भावनात्मक लगाव इस राज्य से है. उनका जुड़ाव इस राज्य से है. कोई भी चुनाव होगा, मोदीजी तो यहां आते रहेंगे ही.

सवाल- आप शिक्षा क्षेत्र में सुधार का भी जिक्र करते हैं. क्या यह बात सही है कि आपके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़े हैं?

जवाब- हां यह बात सही है, मेरे दोनों बच्चों ने आंगनवाड़ी में पढ़ाई की है.

सवाल- आपकी तरह ही आम लोग भी सरकारी संस्थानों में अपना भरोसा जता सकें, इसके लिए आप क्या कर रहे हैं?

जवाब- हम लोग इमानदारी से चाहते हैं कि जो हमारे सरकारी शिक्षण संस्थान हैं वे भी उसी प्रकार की शिक्षा दें जैसे कि हमारे प्राइवेट संस्थान देते हैं. हमारे शिक्षा विभाग की जितनी भी बैठकें हुई हैं, उनमें हमने यह प्रश्न खड़ा किया कि आज ऐसा क्यों हो रहा है कि सरकारी स्कूलों में छात्र कम होते जा रहे हैं. उन्हें बंद करने की स्थिति आ रही है. वही हमारे प्राइवेट स्कूलों में लंबी लाइनें लगी हैं.  वहां जो शिक्षक पढ़ाते हैं उनकी तनख्वाह 15-20 हजार रुपए महीने होती है, जबकि सरकारी स्कूलों की तनख्वाह आप जानते ही हैं कि काफी ज्यादा होती है. उसके बाद भी यह स्थिति पैदा हो रही है तो क्यों हो रही है. इसे हम सही करने का प्रयास कर रहे हैं. मेरे पास जितना भी समय था, उसमें मैंने यह समीक्षा की है. उस समीक्षा को आगे बढ़ाएंगे.

सवाल- प्रधानमंत्री जी आपके लिए एक लक्ष्य देकर गए हैं. उन्होंने कहा कि अब अगले 10 साल में उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या उतनी होगी, जितनी बीते 100 साल में नहीं रही. उनकी बात को सही साबित करना आपकी जिम्मेदारी है. इतने ज्यादा पर्यटकों को संभालने के लिए अगले 5 साल का जो आपका विजन है उसमें इतनी पर्याप्त क्षमता है होंगी आपके पास?

जवाब- हमने सभी विभागों को अगले 10 सालों का रोड मैप बनाने और विजन प्रस्तुत करने का पत्र लिखा है. सभी लोग अपना विजन डॉक्यूमेंट बना रहे हैं. हमने यहां पर एक विचार श्रंखला भी आयोजित की है. अभी तक हम तीन श्रृंखलाएं आयोजित कर चुके हैं. उसके माध्यम से हम देश के जितने भी वैज्ञानिक हैं, विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लाेग, विधि विशेषज्ञ, अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ, आम जनता के बीच व्यावहारिक रूप से धरातल पर काम करने वाले, इन सबके विचार ले रहे हैं. उनके विचारों के आधार पर हम अगले 10 सालों का रोडमैप तैयार कर रहे हैं. इसके साथ-साथ हम  इकोलॉजी और इकोनॉमी दोनों को साथ में मिलाकर उत्तराखंड को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. प्रधानमंत्री जी ने हमारे आगे विजन रखा है कि 21 वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा. जब हम इस राज्य की रजत जयंती मना रहे होंगे तो हमारे यहां डबल इंजन की भाजपा सरकार केंद्र की और राज्य की मिलकर, इसको हिंदुस्तान का अग्रणीय राज्य बना रहे होंगे.

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