अफगानिस्तान की जज और पूर्व गवर्नर को दोस्त बताकर दाखिल की याचिका, कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना

अधिवक्ता सुरेश गुप्ता की याचिका को आज जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस अब्दुल मोइन की खंडपीठ ने खारिज कर दिया.

अफगानिस्तान की जज और पूर्व गवर्नर को दोस्त बताकर दाखिल की याचिका, कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना
सांकेतिक फोटो.

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अफगान नागरिकों को शरण देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. साथ ही जनहित याचिका लगाने वाले अधिवक्ता पर दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है.  

दरअसल, 13 सितंबर को अधिवक्ता सुरेश गुप्ता की याचिका को आज जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस अब्दुल मोइन की खंडपीठ ने खारिज कर दिया. जिसमें वकील ने अफगानिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस काजी मरजिया, कंधार प्रांत की पूर्व गवर्नर सलीमा मजारी और अफगान राष्ट्रवादी सेना के फाइटर पायलट नीलोफर रहमानी को अपना दोस्त बताते हुए उन्हें राजनीतिक शरण देने के लिए जनहित याचिका दायर की थी.

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अधिवक्ता ने बताया कि वह उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जानता है. कोर्ट ने पूछा कि क्या इन तीनों की ओर से उसे अधिकृत किया गया है तो सुरेश गुप्ता अदालत को कोई जवाब नहीं दे सके. कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता की अफगान नागरिक के दोस्त होने की हैसियत से दायर की गई याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. न्यायालय ने कहा कि इस याचिका के जरिए कोर्ट का कीमती समय बर्बाद किया गया है. जिसके लिए उन पर दस हजार रुपये का हर्जाना लगाया. जिसको उन्हें लीगल सर्विस कमेटी में जमा कराने का आदेश दिया है. 

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