Lalitpur Rape Case: ज्ञापन में उजागर किया रेप पीड़िता का नाम, सपा के 250 कार्यकर्ताओं पर लगा पॉक्सो

नाबालिग छात्रा के साथ दरिंदगी के मामले में छात्रा के पिता और सपा, बसपा के जिलाध्यक्षों सहित 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें अब सपा और बसपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओ की भी मुश्किलें बढ़ गयी हैं. 

Lalitpur Rape Case: ज्ञापन में उजागर किया रेप पीड़िता का नाम, सपा के 250 कार्यकर्ताओं पर लगा पॉक्सो
सांकेतिक फोटो.

ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में नाबालिग छात्रा के साथ दरिंदगी के मामले में छात्रा के पिता और सपा, बसपा के जिलाध्यक्षों सहित 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें अब सपा और बसपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओ की भी मुश्किलें बढ़ गयी हैं. 

दरअसल, बुधवार को सपा और बसपा के कार्यकर्ताओं द्वारा आरोपी जिलाध्यक्षों के पक्ष में रैली निकालकर पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर  ज्ञापन दिया था. जिस पर पुलिस ने सदर कोतवाली में सपा के 250 कार्यकर्ताओं पर 188/269 महामारी अधिनियम और 23(4) लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत मुकदमा दर्ज किया और बसपा के 200 कार्यकर्ताओं के खिलाफ 188, 269 महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. 

ASP ललितपुर गिरिजेश कुमार ने बताया कि आरोपी पक्ष के सैकड़ों कार्यकर्ता एसपी ऑफिस पहुंचे, जिन्होंने पीड़िता का नाम सार्वजनिक कर दिया, जो नियमता विधि विरुद्ध है. जिस पर सदर कोतवाली पुलिस द्वारा सपा के 250 और बसपा के 200 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है. 

सपा जिलाध्यक्ष के छोटे भाई अरविंद यादव सहित 4 लोग गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपी पिता, सपा जिलाध्यक्ष के छोटे भाई अरविंद यादव सहित 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है तो वहीं अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमार की कार्यवाही करने में जुटी हुई हैं. फिलहाल आरोपी सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव और बसपा जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार सहित अन्य आरोपी अंडर ग्राउंड हो चुके हैं.

क्या है पूरा मामला?
पीड़िता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, जब वह 6वीं क्लास (तब उम्र 11 साल) में पढ़ती थी, तभी से उसके पिता उसका शारीरिक शोषण करते आ रहे हैं. इसके बाद धीरे-धीरे उसके पिता अपने अन्य दोस्तों से भी बलात्कार जैसी घटना को अंजाम दिलाने लगे. जिसमें सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव, उनके भाई और बसपा जिलाध्यक्ष दीपक अहिरवार भी शामिल थे. वहीं, पीड़िता और उसकी मां के इस बात का विरोध करने पर दोनों के साथ मारपीट करते थे. उन्हें जान से मारने की धमकी भी दिया करते थे. इस खौफ चलते ही दोनों इतने लंबे समय तक चुप रहीं. 

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