वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हार्वर्ड केनेडी स्कूल में पूछा गया लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़ा सवाल, मिला ये जवाब

 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका की यात्रा पर हैं. वह बुधवार को मैसाचुसेट्स में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल में छात्रों के बीच थीं. इस दौरान उनसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई हिंसा में मारे गए चार किसानों और केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी पर सवाल पूछा गया.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हार्वर्ड केनेडी स्कूल में पूछा गया लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़ा सवाल, मिला ये जवाब
हार्वर्ड केनेडी स्कूल में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण.

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका की यात्रा पर हैं. वह बुधवार को मैसाचुसेट्स में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल में छात्रों के बीच थीं. इस दौरान उनसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई हिंसा में मारे गए चार किसानों और केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी पर सवाल पूछा गया. जिसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा पूरी तरह निंदनीय है. 

उन्होंने कहा, भारत के अन्य हिस्सों में भी इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, लेकिन उन्हें उसी समय उठाया जाना चाहिए, जब वे घटित हुई हों. न कि उन्हें तब उठाया जाए, तब किसी राज्य में भारतीय जनता पार्टी  की सरकार होने के कारण कुछ लोगों को उन्हें उठाना अनुकूल लगता हो. उनसे पूछा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार में शामिल वरिष्ठ मंत्रियों ने इस घटना पर कुछ क्यों नहीं कहा? इस बारे में सवाल करने पर सरकार में शामिल लोगों की ओर से ''बचाव वाली प्रतिक्रियाएं'' क्यों दी जाती हैं?

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इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ''नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. अच्छा है कि आपने ऐसी घटना उठाई, जो पूरी तरह से निंदनीय है और हम में से हर कोई यह कह रहा है. इसी तरह दूसरी जगहों पर हो रही घटनाएं मेरी चिंता का कारण हैं. भारत में इस तरह के मामले देश के बहुत से अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से हो रहे हैं. मैं चाहती हूं कि आप और डॉ. अमर्त्य सेन सहित कई अन्य लोग, जो भारत को जानते हैं, वे जब कभी ऐसी घटना होती है, उसे हर बार उठाएं.''

वित्त मंत्री ने अपने जवाब में आगे कहा, ''इस प्रकार की घटना को मात्र उस समय नहीं उठाया जाए, जब इन्हें उठाना हमारे लिए इसलिए अनुकूल है, क्योंकि यह एक ऐसे राज्य में हुई, जहां भाजपा सत्ता में है. जिसमें मेरे एक कैबिनेट सहयोगी का बेटा शायद मुश्किल में है. इस घटना के पीछे किसका हाथ है, यह पता लगाने के लिए पूर्ण जांच हो रही है. यह मेरी पार्टी या मेरे प्रधानमंत्री के बचाव के बारे में नहीं है. यह भारत के बचाव के बारे में है. मैं भारत के लिए बात करूंगी, मैं गरीबों के लिए न्याय की बात करूंगी. क्षमा करें, चलिए तथ्यों पर बात करते हैं.आपके लिए यही मेरा जवाब है.''

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किसान आंदोलन से संबंधित एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ''केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि अधिनियमों पर एक दशक में विभिन्न संसदीय समितियों द्वारा चर्चा की गई थी. भाजपा के  2014 में सत्ता में आने के बाद केंद्र सरकार द्वारा इन तीनों कानूनों पर राज्य सरकारों से अलग-अलग चर्चा की गई है. हर हितधारक से राय-मशविरा किया गया था. संसद में तीनों विधेयकों पर विस्तृत चर्चा हुई, तब ये कानून की शक्ल में आए.'' आपको बता दें कि केंद्र सरकार यह तर्क देती रही है कि तीनों कृषि काननू किसानों के हित में हैं. कांग्रेस भी इन कानूनों को लाना चाहती थी, लेकिन नहीं ला पाई. कई राज्यों के मुख्यमंत्री तत्कालीन प्रधानमंत्री को इन कानूनों की मांग को लेकर पत्र लिख चुके हैं.

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