UP Vidhansabha Chunav 2022: 24 साल बाद खतौली सीट पर खिला था कमल; यहां शाहजहां ने बनवाया था फेमस सराय

UP Assembly Election 2022 Khatauli Seat:  खतौली विधानसभा सीट पर कभी चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजीत सिंह की पार्टियों का दबदबा रहा करता था. 

UP Vidhansabha Chunav 2022: 24 साल बाद खतौली सीट पर खिला था कमल; यहां शाहजहां ने बनवाया था फेमस सराय
खतौली सीट

मुजफ्फरनगरः UP Vidhan Sabha Election 2022: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. 2017 में मोदी लहर ने इस हिंदी भाषी राज्य पर अच्छा-खासा प्रभाव छोड़ा, नतीजा यह रहा कि बीजेपी ने यूपी की सत्ता पर कब्जा जमाया. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार विपक्ष को मोदी के साथ योगी लहर का भी सामना करना पड़ेगा. इलेक्शन को देखते हुए हम लेकर आए हैं यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों का एनालिसिस. यहां जानें मुजफ्फरनगर जिले की खतौली सीट के बारे में.

 

सीट का नाम खतौली विधानसभा
सीट नंबर 15
मतदाता 2,87,933
पुरुष 1,56,802
महिला 1,31,115

जनपद का 70 फीसदी क्षेत्र है ग्रामीण
मुजफ्फरनगर जिले में उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 6 सीट आती हैं, खतौली सीट भी उन्हीं में से एक है. जनपद मुजफ्फरनगर राज्य का वह जनपद है दो भारत की दो प्रमुख नदियों गंगा और यमुना के बीच बसा हुआ है. यहां की उपजाऊ भूमि के कारण किसान व मजदूर काफी सम्पन्न हैं. गन्ना और गेहूं यहां प्रमुख रूप से उगाया जाता है, इस जनपद में 8 शुगर मिल हैं, वहीं सैकड़ों की संख्या में पेपर मिल व स्टील प्लांट भी चलाए जा रहे हैं. इस जनपद की 70 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है.

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खतौली सीट का इतिहास
मुजफ्फरनगर से 21 किलोमीटर दूर खतौली विधानसभा सीट एक तहसील है, यहां नेशनल हाईवे 58 से पहुंचा जा सकता है. यहां का जैन मंदिर काफी खूबसूरत है, साथ ही यहां एक विशाल सराय भी है, जिसका निर्माण शाहजहां ने करवाया था. शहर का नाम पहले खित्ता वली था, जिसे बाद में खतौली रखा गया. यहां त्रिवेणी शुगर मिल भी है, जो एशिया की सबसे बड़ी शुगर मिल में से एक है. 

तहसील का सबसे मुख्य गांव खेड़ी कुरेश है. मुजफ्फरनगर रेलमार्ग द्वारा भारत के प्रमुख शहरों में भी जा सकते हैं. यहां देश के प्रमुख नगरों नई दिल्ली, देहरादून, सहारनपुर और मसूरी से भी पहुंचा जा सकता है. 

चौधरी चरण सिंह और अजीत सिंह का रहा दबदबा
खतौली विधानसभा सीट पर पहली बार 1967 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब से यहां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और उनके बाद चौधरी अजीत सिंह की पार्टी का दबदबा रहा. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसानों के मसीहा स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का गांव सिसौली भी यहीं था. लेकिन 2011 में हुए परिसीमन के बाद सिसौली बुढाना विधानसभा का हिस्सा बन गया.  

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कौन सी पार्टी करती है डॉमिनेट
1967 में खतौली सीट पर पहली बार चुनाव हुए, तब सीपीआई के सरदार सिंह ने चुनाव जीता. तब से जनता पार्टी, कांग्रेस, लोकदल, भारतीय किसान कामगार पार्टी, बसपा और जनता दल ने एक-एक बार चुनाव जीता. वहीं भारतीय क्रांति दल, बीजेपी और राष्ट्रीय लोकदल ने दो-दो बार चुनाव में जीत हासिल की. यहां ज्यादातर चौधरी चरण सिंह और उनके बाद अजीत सिंह की पार्टी ने ही डॉमिनेट किया. 

साल विधायक पार्टी
1967 सरदार सिंह CPI
1969 वीरेंदर शर्मा भारतीय क्रांति दल
1974 लक्ष्मण सिंह  भारतीय क्रांति दल
1977 लक्ष्मण सिंह  जनता पार्टी
1980 धर्मवीर बलियान कांग्रेस
1985 हरेंद्र मलिक लोकदल
1989 धर्मवीर बलियान जनता दल
1991 सुधीर बलियान बीजेपी
1993 सुधीर बलियान बीजेपी
1996 राजपाल बलियान भारतीय किसान कामगार पार्टी
2002 राजपाल बलियान राष्ट्रीय लोकदल
2007 योगराज सिंह  बसपा
2012 करतार सिंह भड़ाना राष्ट्रीय लोकदल
2017 विक्रम सिंह सैनी बीजेपी

 

जातिगत समीकरण
खतौली विधानसभा सीट के करीब 3 लाख वोटर्स में 77 हजार मुस्लिम, 57 हजार चमार, 27 हजार सैनी, 19 हजार पाल और करीब 17 हजार कश्यप वोटर हैं. इनके अलावा यहां गुर्जर, प्रजापति, जाट, ठाकुर और वैश्य वोटर भी अधिक मात्रा में हैं. 

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कौन हैं विक्रम सिंह सैनी?
खतौली विधानसभा सीट पर 2017 में हुए चुनाव में करीब 24 साल बाद किसी बीजेपी उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी. बीजेपी के विक्रम सिंह सैनी ने सपा उम्मीदवार को हराया था. वह 'कवल गांव' के सरपंच भी रह चुके हैं. वहीं 2020 में उन्हें विधायक रहते हुए कोर्ट में भी पेश होना पड़ा था. उन पर 2013 के दौरान मुजफ्फरनगर दंगों में रासुका के तहत अटेम्प्ट टू मर्डर का चार्ज लगा था. 

2017 में बीजेपी ने मारी थी बाजी
खतौली सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों की बात करें तो यहां 2017 में बीजेपी के विक्रम सिंह सैनी और 2012 में रालोद के करतार सिंह भड़ाना ने जीत हासिल की थी. 2017 में बीजेपी उम्मीदवार ने 94,771 और सपा के चंदन सिंह चौहान ने 63,397 वोट जीते थे. दोनों के बीच जीत का अंतर 15 फीसदी वोटों का था. 2012 चुनावों में रालोद के करतार सिंह भड़ाना ने 46,722 वोट हासिल कर बसपा के तारा चंद शास्त्री को 5,875 वोटों के अंतर से हराया था. 

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क्या थी जीत की वजह?
2017 में बीजेपी ने जिन भी सीटों पर जीत हासिल की, ज्यादातर सीटों पर मोदी लहर का प्रभाव रहा. मुजफ्फरनगर की इस सीट पर भी बीजेपी उम्मीदवार विक्रम सिंह सैनी के जीत की असली वजह मोदी लहर को ही माना गया.

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