उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019 को मिली राजभवन की मंजूरी

राज्य सरकार का उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के जरिए चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री समेत करीब 52 मंदिरों के प्रबंधन पर नियंत्रण रहेगा.

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019 को मिली राजभवन की मंजूरी
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019

देहरादून: प्रदेश में स्थित चारधाम की व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के उद्देश्य से लाये गए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक 2019 को राजभवन की मंजूरी मिल गई है. अब राज्य सरकार का उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के जरिए चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री समेत करीब 52 मंदिरों के प्रबंधन पर नियंत्रण रहेगा. सरकार का मानना है कि इसके जरिए चार धाम के साथ ही इसके अंतर्गत आने वाले मंदिरों की व्यवस्था और बेहतर होंगी और आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं भी मिल सकेंगी. इसके साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान यहां की व्यवस्थाएं और दुरुस्त होंगी.

प्रदेश में स्थित चारों धाम के साथ ही इनसे जुड़े आसपास स्थित मंदिरों की व्यवस्था को और बेहतर करने के उद्देश्य से उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार द्वारा लाए गए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम विधेयक 2019 को राजभवन की मंजूरी मिल गई है. अब इसके अंतर्गत इन मंदिरों की व्यवस्थाओं को और बेहतर करने व प्रबंधन पर नियंत्रण के लिए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाएगा. इसी बोर्ड के जरिए इन सभी मंदिरों की व्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण रहेगा. 

राज्य के हिन्दू मुख्यमंत्री ही इसके अध्यक्ष होंगे. ऐसा न होने की दशा में यह जिम्मेदारी सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री को दी जाएगी जो हिंदू धर्म से हो और सदस्य होने की पूरी अहर्ता रखता हो. संस्कृति मामलों के मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे लेकिन वह भी हिंदू होने चाहिए. मुख्य सचिव इसके पदेन सदस्य होंगे, साथ ही पर्यटन सचिव, संस्कृति और धार्मिक मामलों के सचिव होंगे. वित्त सचिव भी इसके पदेन सदस्य होंगे. संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार से विशेष आमंत्रित व्यक्ति जो कि संयुक्त सचिव श्रेणी के होंगे, उन्हें भी सदस्य बनाया जाएगा.  इसके अलावा 3 सांसद, 6 विधायक, 4 दानदाता व  पुजारियों या वंशानुगत पुजारियों या अधिकार धारण करने वाले तीन व्यक्ति को राज्य सरकार नामित करेगी.

अधिनियम के अधीन नीतियों को बनाने के लिए, अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए निर्णय करने व आय व्ययक सृजन और आय व्ययक का अनुमोदन सहित योजनाएं बनाने व प्रबंधन करने के लिए बोर्ड ही संचालक संस्था मानी जाएगी. इस अधिनियम में उल्लिखित सभी धार्मिक मंदिरों की संपत्ति, निधि, मूल्यवान प्रतिभूतियां, आभूषण के सुरक्षित रखरखाव उनके संरक्षण और प्रबंधन के निर्देश भी बोर्ड देगा. तीर्थ यात्रियों की सुविधा के कुशल प्रबंधन के लिए आवश्यक सभी गतिविधियों का निर्देशन व नियंत्रण भी बोर्ड के अधीन रहेगा। सीधे तौर पर देखा जाए तो बोर्ड सर्वशक्तिमान होगा.

देवस्थानम विधेयक को राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और इनके आसपास के मंदिरों का प्रबंधन चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के नियंत्रण में रहेगा, लेकिन इनसे जुड़े पुजारी, न्यासी, तीर्थ, पुरोहितों, पंडों और हकहकूकधारियों को वर्तमान में प्रचलित देव दस्तूरात और अधिकार यथावत रहेंगे.

मुख्यमंत्री के मुताबिक जब हम कोई भी सुधार करते हैं तो उसकी प्रतिक्रिया होती ही है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में तीर्थ पुरोहितों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जायेगा। सीएम की माने तो प्रदेश के चारधाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से हिन्दु श्रद्धालु आना चाहते हैं, हमें अच्छे आतिथ्य के रूप में जाना जाता है. देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर आने का मौका मिले तथा उन्हें अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हों इसके लिए यह विधेयक लाया गया है.

हालांकि तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी महापंचायत शुरुआती दौर से ही उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं. सरकार के इस फैसले के खिलाफ तीर्थ पुरोहित व हक हकूकधारी महापंचायत ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध भी जताया. अब राजभवन से इस विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद तीर्थ पुरोहित व हक हकूकधारी एक तरफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे आगामी फरवरी महीने में हरिद्वार में इसके खिलाफ एक संत समागम भी बुलाने की योजना पर काम कर रहे हैं. हालांकि सरकार तीर्थ पुरोहित व हक हकूकधारियों को विश्वास दिला रही है कि इस विधेयक के जरिए उनके हक हकूक किसी भी तरीके से प्रभावित नहीं होंगे और उनके हकों का पूरे तरीके से संरक्षण हो इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है.