close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस की मांग, निर्मला सीतारमण ने कहा- हरसंभव मदद को केंद्र तैयार

सभी हिमालयी राज्य इस बात पर एकजुट थे कि उन्हें केंद्र के सामने ग्रीन बोनस की मांग को प्रमुखता से रखना है. 

हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस की मांग, निर्मला सीतारमण ने कहा- हरसंभव मदद को केंद्र तैयार

देहरादून: मसूरी में संपन्न हुए हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में ग्रीन बोनस की मांग प्रमुखता से उठाई गई.  पहाड़ी राज्यों के विकास के लिए अलग से मंत्रालय बनाकर केंद्र से मदद की उम्मीद भी सभी हिमालयी राज्यों ने केंद्र से की है. इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हिमालय राज्यों की बात को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इन पहाड़ी राज्यों के विकास के लिए केंद्र से भरपूर मदद मिलेगी. पहाड़ों की रानी मसूरी में हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधि पहली बार हो रहे मुख्यमंत्री सम्मेलन के लिए पहुंचे थे. 

सभी हिमालयी राज्य इस बात पर एकजुट थे कि उन्हें केंद्र के सामने ग्रीन बोनस की मांग को प्रमुखता से रखना है.  इसके लिए सभी राज्यों ने अपने अपने अधिकारियों के साथ मिलकर बेहतर तैयारी भी की हुई थी.  यह हिमालयी राज्य अपने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने जल शक्ति मंत्रालय के लिए विभिन्न योजनाएं बनाने और पर्यावरण को संरक्षण देने के लिए विशेष पैकेज की मांग केंद्र से की है.

ग्रीन बोनस की बात पिछले 10 साल में कई बार हुई पहले केंद्र ने राज्यों के बजट का 2% ही ग्रीन बोनस राज्यों को दिया.  लेकिन धीरे-धीरे यह आंकड़ा बढ़कर 7.5% तक हो गया. अब हिमालयी राज्यों ने इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की मांग की है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि " हमने आपदा प्रबंधन, जल प्रबंधन सहित पहाड़ के कई मुद्दे केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने रखे हैं. 

हमने ग्रीन बोनस की मांग केंद्र से इस कॉन्क्लेव के जरिये की है. " त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि " केंद्र से हिमालयी राज्यों के लिए अलग से मंत्रालय बनाने, नए पर्यटन स्थल विकसित करने और पहाड़ी राज्यों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए भी केंद्र से मांग की गई है. "

इधर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा " केंद्र हिमालयी राज्यों की समस्या से परिचित है.  पलायन रोकने के लिए कई योजनाओं पर काम हो रहा है.  जल शक्ति मंत्रालय के लिए भी कई योजनाओं पर काम हो रहा है. " केंद्रीय वित्त मंत्री ने भी हिमालयी राज्यों के लिए मदद का भरोसा दिया है.

सभी हिमालयी इस बात पर सहमत हुए कि इस तरीके का सम्मेलन हर साल आयोजित किया जाना चाहिए ताकि केंद्र को मिलकर अपनी समस्याओं और मांग से अवगत कराया जा सके.  अब देखना यह है कि इस सम्मेलन में की गई मांग को केंद्र कितनी तवज्जो देता है और पर्यावरण संरक्षण के लिए हिमालय राज्यों को क्या मिल पाता है.