उत्तराखंड में 300 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद कर चुकी है सरकार, विधानसभा में दिया जवाब

उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में एक सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विधान सभा में स्कूलों के बन्द होने की जानकारी दी.

उत्तराखंड में 300 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद कर चुकी है सरकार, विधानसभा में दिया जवाब
उत्तराखंड में शिक्षा विभाग हमेशा ही चर्चाओं में रहता है. शिक्षकों की नियुक्ति और ट्रांसफर को लेकर अक्सर राजनीति भी होती है.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने पिछले एक साल में राज्य के 300 से ज्यादा स्कूलों को बन्द कर दिया है. पलायन के कारण खाली होते गावों में छात्र छात्राओं की संख्या भी कम होती गई. यही कारण है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम हुई. लगातार घट रही छात्र संख्या के कारण सरकार भविष्य में भी सैकड़ों स्कूलों को बन्द कर सकती है. जिन स्कूलों में छात्र संख्या 10 से कम है उन स्कूलों को सबसे पहले बन्द किया गया है.

उत्तराखंड विधान सभा के शीतकालीन सत्र में एक सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विधान सभा में स्कूलों के बन्द होने की जानकारी दी. उत्तराखंड विधान सभा में सत्र के दूसरे दिन शिक्षा विभाग से सम्बन्धित सवाल लगे हुए थे. बीजेपी के सल्ट क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के सवाल पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बताया कि " सरकार ने ऐसे 301 विद्यालयों को बन्द कर दिया है जिनकी छात्र संख्या 10 से कम है. सरकारी स्कूल की भूमि और अन्य संपत्तियां ग्राम पंचायतों को सशर्त सौंपी गई है. जब कभी यहां फिर स्कूल खोले जाने की बात होगी तो ग्राम पंचायत को ये भूमि वापस करनी होगी".

उत्तराखंड सरकार ने सैकड़ों ऐसे स्कूलों को बन्द करने की तैयारी की है जहां छात्र छात्राओं की संख्या लगातार घट रही है. उत्तराखंड में वोट बैंक के लिए पिछली सरकारें लगातार स्कूल खोलती गई. लेकिन लगातार गावों से हो रहे पलायन के कारण स्कूलों से छात्र छात्राओं की संख्या लगातार कम होती गई. अब सरकारों ने ऐसे स्कूलों की लिस्ट बनाई जहां छात्र छात्राओं की संख्या कम है. पहले चरण में सरकार ने 300 से ज्यादा स्कूलों को बन्द कर दिया और आने वाले समय में भी कई दूसरे स्कूलों को बन्द कर सकती है.

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग हमेशा ही चर्चाओं में रहता है. शिक्षकों की नियुक्ति और ट्रांसफर को लेकर अक्सर राजनीति भी होती है. राज्य के कई स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण पढ़ाई पर भी असर पड़ता है. ऐसे में सरकार ने कम छात्र संख्या वाले स्कूलों से शिक्षकों और छात्र छात्राओं को दूसरे स्कूलों में समाहित करके समाधान निकालने का दावा किया है.