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उत्तराखंड: लापरवाह शिक्षकों पर सख़्त सरकार, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए बन रही है लिस्ट

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस साल सरकारी कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का फैसला किया है. कई विभागों की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिसमें शिक्षा विभाग सबसे ऊपर है.

उत्तराखंड: लापरवाह शिक्षकों पर सख़्त सरकार, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए बन रही है लिस्ट
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की फाइल फोटो.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) लापरवाह शिक्षकों को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने की तैयारी कर रही है. शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) ने गढ़वाल (Garhwal) और कुमाऊं (Kumaon) मंडल के ऐसे शिक्षकों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक,  ऐसे शिक्षक जिनकी वजह से स्कूल का रिजल्ट खराब हो रहा है और जो बिना बताए छुट्टी पर चले जाते हैं उनकी लिस्ट तैयार की जा रही है.

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस साल सरकारी कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का फैसला किया है. कई विभागों की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिसमें शिक्षा विभाग सबसे ऊपर है. सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में इस सूची में 50 साल की आयु पार कर चुके कर्मचारियों को शामिल किया जा रहा है. सरकार की कार्यशैली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की केंद्र सरकार की पहल का अब राज्य भी अनुसरण करने लगे हैं. 

उत्तराखंड में भी केंद्र सरकार की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए भ्रष्ट और नाकारा अधिकारियों व कर्मचारियों पर नकेल डाली जाएगी. विभिन्न महकमों के ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को सूचीबद्ध किया जाएगा, जिन्हें कार्य के प्रति लापरवाह, नाकारा माना जाता है.

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वहीं, उत्तराखंड में 50 साल से ज्यादा के निगम में शिक्षकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर शिक्षक संघ भड़क गया है. संघ के पदाधिकारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है. संघ का कहना है कि चुनाव और दूसरी ड्यूटी में शिक्षकों को लगाया जाता है. इससे कई स्कूलों का रिजल्ट प्रभावित होता है. साथ ही स्कूलों में छात्र संख्या घट रही है. खराब रिजल्ट के लिए शिक्षकों को दोष देना ठीक नहीं है.