उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुदूर गांवों के लिए राशन आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सुदूर गांवों में जरूरी सामानों की आपूर्ति हेलीकॉप्टर के जरिये 24 घंटों के अंदर सुनिश्चित करें.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुदूर गांवों के लिए राशन आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा
कोर्ट ने कहा कि राज्य प्रशासन भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल से संपर्क कर सकता है.

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पिथौरागढ़ के दूरस्थ गांवों में जरूरी सामानों की आपूर्ति हेलीकॉप्टर के जरिये 24 घंटों के अंदर सुनिश्चित करने तथा सर्दी के पूरे मौसम में आपूर्ति जारी रखने के आदेश दिये हैं. उच्च न्यायालय का यह आदेश गुरुवार को जिले के करीब एक दर्जन दूरस्थ गांवों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने विषम भौगोलिक परिस्थितियों और खराब सड़क संपर्क के चलते अपने यहां जरूरी खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कमी की शिकायत की थी.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने निर्देश दिये कि एक अस्थायी उपाय के तौर पर राज्य सरकार इन क्षेत्रों में 24 घंटे के अंदर हैलीकॉप्टर से आटा, घी, चावल, दालें, अनाज तथा ताजा सब्जियां, मसाले,मिट्टी का तेल, दियासलाई, चाय, कंबल और रोजाना की जरूरतों की अन्य चीजें उपलब्ध करायें. अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि वह सर्दियों के समाप्त होने तक संबंधित गांवों में इन चीजों की नियमित आपूर्ति की व्यवस्था जारी रखे.

अदालत ने कहा कि इस आदेश को सही से लागू करने के लिये राज्य प्रशासन भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल से संपर्क कर सकता है और हम उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन के लिये भारतीय वायु सेना से सहयोग लेने के लिये भी अनुमति देते हैं. लामरी, बूंदी, चैया लेख, गर्बियांग, नपालचु आदि 11 गांवों के निवासियों द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि करीब नौ हजार लोगों की जनसंख्या होने के बावजूद इन गांवों को जोड़ने के लिये कोई सड़क नहीं है.

याचिका में कहा गया था कि संचार व्यवस्था की कमी और कैलाश-मानसरोवर यात्रा समाप्त होने के बाद हैलीकॉप्टर सेवा स्थगित हो जाने के बाद उनके पास खाद्य पदार्थ तथा अन्य जरूरी सामान नहीं है. हाल में समाचार माध्यमों में भी ऐसी खबरें आयी थीं कि पिथौरागढ जिले के कुछ हिस्सों में ग्रामीणों को खाद्य पदार्थो की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण नेपाली बाजार में उपलब्ध चीन का सामान खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है.

(इनपुट-भाषा)