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उत्तराखंडः जल्द ही वर्ल्ड हेरिजेट बन सकता है कैलाश-मानसरोवर लैंडस्केप, यूनेस्को ने शुरू की मुहिम

 उत्तराखंड के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा पैदल सम्पन्न होती है. धारचूला से आगे व्यास घाटी-गुंजी और फिर लिपूलेख दर्रे से तकलाकोट होते हुए कैलाश मानसरोवर श्रद्वालु पहुचते है.

उत्तराखंडः जल्द ही वर्ल्ड हेरिजेट बन सकता है कैलाश-मानसरोवर लैंडस्केप, यूनेस्को ने शुरू की मुहिम
फाइल फोटो

संदीप गुसाईं/नई दिल्लीः करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र पवित्र कैलाश मानसरोवर क्षेत्र को यूनेस्को में विश्व धरोहर घोषित करने की मुहिम और तेज हो गई है. भारत में पवित्र कैलाश क्षेत्र में उत्तराखंड के चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ जिले के क्षेत्र शामिल हैं. जिसकी उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र ने जियो मैपिंग पूरी कर ली है. इस विस्तृत जानकारी के बाद कैलाश लैंडस्केप को यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल करने में मदद मिलेगी. भारत, नेपाल और चीन(तिब्बत) तीन देशों में फैला विशालकाय कैलाश लैंडस्पेक विश्व विरासत घोषित होता है तो भविष्य में पूरे विश्व में ये पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊचाईयों को छूएगा.

देवभूमी उत्तराखंड चारधाम जहां गंगा, जमुना के साथ ही पवित्र कैलाश मानसरोवर क्षेत्र भी स्थित है. कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ जिले से होकर जाती है. कैलाश मानसरोवर लैंडस्केप में ही छोटा कैलाश और पार्वती कुंड स्थित है. उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र ने भारत में स्थित कैलाश लैंडस्केप की जियो मैपिंग पूरी कर ली है. 3 करोड़ की धनराशि से तैयार किए गए जियो मैपिंग में कैलाश मानसरोवर की प्राकृतिक, सांस्कृति, भौगोलिक की विस्तृत जानकारी है.

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पवित्र कैलाश पर्वत और उससे जुड़े लैंडस्केप को विश्व धरोहर घोषित करने की मुहिम परवान चढने लगी है. अगर वैज्ञानिकों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और इतिहासकारों की मेहनत रंग लाई तो कैलाश लैंडस्केप का क्षेत्र दुनिया का अनोखा प्राकृतिक-सांस्कृतिक धरोहर बन सकेगा. आईए जानते है कि किन विशेषताओं के लिए कैलाशलैंडस्केप को विश्व धरोहर घोषित करने की मांग उठ रही है और इसे विश्व धरोहर बनने में किन अडचनों का सामना करना पड सकता है.

- कैलाश लैंडस्केप तीन देशों भारत, नेपाल और तिब्बत (चीन) में फैला है
- जियो मैपिंग में पवित्र प्राकृतिक स्थल, जैव विविधता, बुग्याल, चारागाह, नदियां, झील और हिम क्षेत्र 
- जियो मैपिंग से यूनेस्को धरोहर मिलने की राह और भी हुई आसान
- नेपाल में ईसीमोड और तिब्बत में चीन सरकार कर रही है जियो मैपिंग
- करीब 12 भाषाएं कैलाश लैंडस्केप में बोली जाती है
- तिब्बत में स्थित है माउन्ट कैलाश (22,000 फीट)
- हिन्दू, बौध, जैन, तिब्बत और सिक्ख धर्म के आस्था का केन्द्र है कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील 
- इस लैंडस्केप में विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजित और प्राकृतिक विविधता मौजूद
- उतत्तराखंड में लिपूलेख दर्रे (पिथौरागढ़) से होती है कैलाश-मानसरोवर यात्रा
- धारचूला की व्यास घाटी का क्षेत्र कैलाश लैंडस्केप में स्थित है
- उत्तराखंड में निलांग, माणा, नीति, मिलम, दारमा और व्यास घाटी के दर्रों से जा सकते हैं पवित्र कैलाश-मानसरोवर
- कैलाश लैंडस्केप में कई धरोहर की है श्रृंखला
- सतलुज, सिन्धू, ब्रम्हपुत्र और करनाली नदियों का कैलाश मानसरोवर क्षेत्र से है उद्गम

मानसरोवर झील और पवित्र कैलाश पर्वत करोडों भक्तों के लिए आस्था का केन्द्र है. मानसरोवर झील 320 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई है. इसके उत्तर में कैलाश पर्वत और पश्चिम में राक्षसताल है. समुद्रतल से इस झील की ऊंचाई 4556 मीटर है और झील की गहराई करीब 90 मीटर है. हिन्दू धर्म में इस सरोवर को काफी पवित्र माना गया है. पुराणों में वर्णन मिलता है कि इस झील का विचार सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में आया था. इस सरोवर में देवी सती के शरीर का दायां हाथ गिरा था इसलिए यहां एक पाषाण शिला के रुप में मां भगवती की पूजा अर्चना होती है. बौद्व धर्म भी इसे पवित्र मानते है. Uttarakhand: Kailash-Mansarovar Landscape could soon become the World Heritage

मान्यता है कि रानी माया को भगवान बुद्ध की पहचान यहीं हुई थी. जैन धर्म और तिब्बत समुदाय के बोनपा के लिए यह झील पवित्र है. कैलाश पर्वत समुद्रतल से 22 हजार फीट की ऊचाईं पर स्थित है. पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार शिव और ब्रह्मा सहित कई देवताओं ने यहां कठोर तप किया था. देवताओं ने ही नही बल्कि मारिच, ऋषि, रावण और भस्मासुर ने भी यहां तप किया था. पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो जियो मैपिंग के अध्ययन के बाद अब भारत की ओर से कैलाश लैंडस्केप को यूनेस्को हैरिटेज में शामिल करने की मुहिम और तेज होगी. पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो कैलाश लैंडस्पेक अनोखा क्षेत्र है जहां कई भाषाएं, धर्म और जातियां निवास करती है.

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कैलाश लैंडस्केप विश्व विरासत स्थल बनता है तो सबसे ज्यादा फायदा उत्तराखंड को होगा. उत्तराखंड के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा पैदल सम्पन्न होती है. धारचूला से आगे व्यास घाटी-गुंजी और फिर लिपूलेख दर्रे से तकलाकोट होते हुए कैलाश मानसरोवर श्रद्वालु पहुचते है. यूनेस्को द्वारा विश्वधरोहर में शामिल होने के बाद अति दुर्गम क्षेत्र में सुविधाओं के विकास में मदद मिलेगी. भारत,नेपाल और तिब्बत(चीन) में स्थित कैलाश लैंडस्केप में अनेक धर्म, संस्कृतियां, परम्पराएं समाहित हैं और सभी को संरक्षित करते हुए विस्तृत प्लान तैयार करना है.