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उत्तराखंड: बारिश का कहर, भूस्खलन और मलबा आने से कई सड़कें बंद, चार धामों की यात्रा बाधित

उत्तराखंड में बारिश के कारण कई जगह लैंडस्लाइड होने से सैकड़ों सड़कों से आवाजाही बंद हो गई है.

उत्तराखंड: बारिश का कहर, भूस्खलन और मलबा आने से कई सड़कें बंद, चार धामों की यात्रा बाधित

देहरादून: उत्तराखंड में बारिश के कारण कई जगह लैंडस्लाइड होने से सैकड़ों सड़कों से आवाजाही बंद हो गई है. पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और चमोली में बारिश से कई सड़कों के बन्द होने से सामान्य जनजीवन पर असर पड़ रहा है. उत्तराखंड की चार धाम यात्रा बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री मार्ग में भी जगह जगह मलबा आने के कारण यात्रा बाधित हो रही है. पहाड़ों में कई नदियां उफान पर हैं. चमोली और पिथौरागढ़ में ग्रामीण नदियों को पार करने के लिए जान हथेली पर रखते हैं. टिहरी के घनसाली में भारी बारिश ने घरों में मलबा भी घुसा है.उत्तराखंड में मानसून हमेशा ही परेशानी लेकर आता है. इस बार भी पहाड़ों में हो रही बरसात से पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चंपावत, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी और टेहरी में कई जगह बारिश से जगह जगह मलबा आ रहा है.

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सैकड़ों ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां मलबा आने से लंबे वक्त से मार्ग बाधित होते हैं. बारिश का सबसे ज्यादा असर रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ में हुआ है. केदारनाथ पैदल मार्ग में पत्थरों के गिरने से समस्या बढ़ रही है और यात्री मंदिर नही पंहुच पा रहे हैं.चमोली की उर्गम घाटी की कल्प गंगा में पानी काफी बढ़ गया है. इसने इस नदी को पार कर जाने वाले दर्जनों गांवों के निवासियों की समस्या बढ़ा दी है.

स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि " 2013 की आपदा में नदी पर बना पुल बह गया था. अब तक दोबारा इस पुल का काम शुरू नही हो पाया. जबकि 1 व्यक्ति की इस नदी में बहकर मौत हो चुकी है. गांवों में खाने पीने का संकट पैदा हो गया है. " जोशीमठ के उप जिलाधिकारी अनिल कुमार चिनियाल कहते हैं कि " गांवों में खाद्यान्न संकट नही है. हमने अगस्त तक के लिए राशन उर्गम घाटी के गांवों तक पंहुचा रखा है."पिथौरागढ़ की दारमा घाटी का भी यही हाल है. यहां स्थानीय नाला उफान पर है. दर्जनों गांवों का सम्पर्क यहां भी जिला मुख्यालय से कटा हुआ है. हर साल इस घाटी में बरसात में तबाही होती है. यहां भी लोग खुद ही लकड़ियों को इकट्ठा कर पुल बनाते हुए नज़र आते हैं. 

सरकार हर बार बारिश से पहले आपदा प्रबंधन के बड़े बड़े दावे करती है. लेकिन अब भी नदियों में पुल न बनने से सरकार के दावे हवा हो जाते हैं. अभी लगभग ढाई महीने बरसात चलेगी और पहाड़ों में समस्या बनी ही रहेगी.