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माओवादी खीम सिंह गिरफ्तारी के बाद सचेत हुई उत्तराखंड पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला

खीम सिंह पर उत्तराखंड पुलिस ने 2017 में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. उसके खिलाफ नैनीताल, अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर में चार से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. 

माओवादी खीम सिंह गिरफ्तारी के बाद सचेत हुई उत्तराखंड पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला
खीम सिंह बोरा 2004 से वांछित है और उत्तरखंड में कई घटनाओं में इसका हाथ है.

देहरादून: उत्तर प्रदेश एटीएस के हत्थे चढ़े 50 हजार के इनामी माओवादी खीम सिंह बोरा से पूछताछ के लिए डीआईजी ने पुलिस टीम को बरेली और लखनऊ भेजा है. यह टीम पूछताछ करने के बाद उसे उत्तराखंड लाने के लिए वारंट दाखिल करेगी. खीम सिंह पर उत्तराखंड पुलिस ने 2017 में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. उसके खिलाफ नैनीताल, अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर में चार से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. 

ये है उत्तराखंड की पुलिस चिंता
खुफिया तंत्र और उत्तराखंड पुलिस के लिए अब चिंता की बात ये है, क्या खीमा यहां अकेला सक्रिय था या संगठन यहां भूमिगत होकर अपने काम को अंजाम देने की योजना बना रहा है. वास्तव में खीमा की एक पूरी टीम है, जिसके साथ वो उत्तराखंड के पहाड़ों और तराई में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं. पहले भी उत्तराखंड में इस टीम के सदस्यों ने अपने संगठन के पर्चे बांटकर प्रचार किया है.

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अल्मोड़ा में तहसीलदार की गाड़ी के लगाई थी आग
2017 विधानसभा चुनाव में अल्मोड़ा में तहसीलदार की गाड़ी में आग लगाने की घटना में खीम सिंह बोरा और उसके लोगों का ही हाथ था. उधमसिंह नगर में उत्तराखंड पुलिस ने 2006-07 में स्पेशल ऑपरेशन चलाकर माओवादियों के नेटवर्क को तोड़ दिया था. इसमें इनका थिंक टैंक पत्रकार प्रशांत राही सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. 

2017 के बाद यूपी में हुए थे सक्रिय
2017 में जब इनकी टीम के एक अन्य सदस्य हेमंत मिश्रा को 7 साल की सजा हुई, तो इन लोगों ने अपना ठिकाना बदल लिया और उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता को बढ़ा दिया. यहीं से इनकी टीम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तर बिहार को रेड कॉरिडोर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही थी. इन प्रदेशों की सीमा सीधा नेपाल से लगती है. इसलिए इनके लिए अपने नेटवर्क का काम करना आसान होता रहा है.   

पुलिस और खुफिया तंत्र की सक्रियता बढ़ी
अब इस नेटवर्क के टूटने के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र की सक्रियता बढ़ गई है. उत्तराखंड के महानिदेशक (कानून व्यवस्था ) अशोक कुमार कहते हैं, उत्तराखंड पुलिस की एक टीम लखनऊ गई है. ये टीम बोरा से होने वाली पूछताछ में शामिल रहेगी. बोरा को उत्तराखंड में पूछताछ करने की भी योजना है. उन्होंने बताया कि खीम सिंह बोरा 2004 से वांछित है. उत्तरखंड में कई घटनाओं में इसका हाथ है. पुलिस इससे पूछताछ कर इस प्रतिबंधित संगठन की भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी इकट्ठा करेगी, ताकि इनके साथियों तक पहुंचा जाए. 

खीम सिंह बोरा पर पुलिस को है शक 
खीम सिंह बोरा पर शक है कि इसने बिहार और झारखण्ड के नक्सलियों को हथियार चलाने की भी ट्रेनिंग दी थी. इनके बरेली से नेपाल की सीमा से लगते हुए उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में नेटवर्क स्थापित करने और सीमा पर सक्रिय होकर प्रतिबंधित संघटन सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय कार्यकारिणी में जाने की योजना तो फिलहाल खत्म हो गई है. लेकिन उत्तराखंड पुलिस और खुफिया तंत्र को आने वाले समय के लिए ये संगठन एक बार फिर सचेत कर गया है.