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उत्तर प्रदेश-हरियाणा से जुड़े उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाले के तार, याचिकाकर्ता ने SIT पर उठाए सवाल

नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश के बाद जब एसआईटी गठित कर हरिद्वार और देहरादून से बाहर जाकर जांच की गई तो कई तरह की गड़बड़ियां पकड़ी गई और मुकदमे दर्ज हुए. एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल कहते हैं नैनीताल, उधमसिंह नगर और टिहरी में कई तरह की धांधली पकड़ी गई है. इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है.

उत्तर प्रदेश-हरियाणा से जुड़े उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाले के तार, याचिकाकर्ता ने SIT पर उठाए सवाल
प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) के छात्रवृत्ति घोटाले (Scholarship Scam) के तार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और हरियाणा (Haryana) से भी जुड़ रहे हैं. उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई कॉलेजों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया है. लेकिन अपने ही प्रदेश में ठंडी पड़ रही छात्रवृत्ति घोटाले की जांच दूसरे प्रदेश में पुलिस कैसे कर पाएगी. इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं. छात्रवृति घोटाले की जांच नैनीताल हाईकोर्ट (Nanital Highcourt) के आदेश पर कोर्ट की देखरेख में हो रही है.

उत्तराखंड में सैकड़ों करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. देहरादून और हरिद्वार के बाद पहले तो नैनीताल, उधमसिंह नगर और टिहरी जिले में गड़बड़ पकड़ी गई. लेकिन अब इस घोटाले में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शिक्षा माफिया भी शामिल पाये जा रहे हैं. नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश के बाद जब एसआईटी गठित कर हरिद्वार और देहरादून से बाहर जाकर जांच की गई तो कई तरह की गड़बड़ियां पकड़ी गई और मुकदमे दर्ज हुए. एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल कहते हैं नैनीताल, उधमसिंह नगर और टिहरी में कई तरह की धांधली पकड़ी गई है. इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है.

अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के छात्र छात्राओं को समाज कल्याण विभाग पढ़ाई करने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करता है. लेकिन शिक्षा माफियाओं ने छात्रवृत्ति का पैसा भी हजम कर लिया. एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि जो उत्तराखंड के कई छात्र छात्राएं पढ़ने के लिए दूसरे प्रदेशों में भी जाते हैं. कई कॉलेजों ने बच्चों के फर्जी एकांउट बनाकर उनको मिलने वाली छात्रवृत्ति निकाल ली. लाभ बच्चों को नहीं मिला. कई कॉलेजों ने बच्चों के नाम पर फर्जी अकांउट खोले और जो छात्रवृत्ति बच्चों के खाते में आनी चाहिए थी वो इनके फर्जी खातों में आ गई. 

ऐसे खातों की पहचान कर अब एसआईटी मुकदमें दर्ज करती जा रही है. पहले तो एसआईटी सिर्फ हरिद्वार और देहरादून के फर्जीवाड़े को खोज रही थी. लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर एक नई एसआईटी भी गठित की गई, जिसने राज्य के बाकी 11 जिलों में ऐसे फर्जीवाड़े को खंगालना शुरू कर दिया है.

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इस मामले को नैनीताल कोर्ट तक ले जाकर इस घोटाले का खुलासा करने वाले याचिकाकर्ता एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं. याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान का कहना है कि जब एसआईटी और उत्तराखंड पुलिस राज्य के भीतर ही बड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रही है तो दूसरे राज्यों में जाकर कैसे इस घोटाले की तहकीकात करेगी. जुगरान लंबे समय से मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं.

उत्तराखंड में लंबे समय से चल रहे इस फर्जी वाड़े की जांच नैनीताल हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश और देख-रेख में चल रही है. इस मामले की प्रगति रिपोर्ट भी समय समय पर एसआईटी को कोर्ट को बतानी पड़ती है. फिर भी जिस रफ्तार से जांच का काम चल रहा है, उससे इस घोटाले के परतें खुलने में अभी समय लगता दिख रहा है.