उत्तराखंड में 'कर्ज का पहाड़': 3 साल 2100 करोड़, 3 महीने में 3000 करोड़ का कर्ज लेगी त्रिवेंद्र सरकार
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उत्तराखंड में 'कर्ज का पहाड़': 3 साल 2100 करोड़, 3 महीने में 3000 करोड़ का कर्ज लेगी त्रिवेंद्र सरकार

प्रदेश सरकार आने वाले प्रत्येक माह में दो बार रिजर्व बैंक की ओर से आयोजित नीलामी में भी भाग लेगी. वित्त विभाग के मुताबिक रिजर्व बैंक को इसकी जानकारी दी जा चुकी है.

उत्तराखंड में 'कर्ज का पहाड़': 3 साल 2100 करोड़, 3 महीने में 3000 करोड़ का कर्ज लेगी त्रिवेंद्र सरकार

देहरादून: उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं. इन तीन सालों में सरकार ने प्रदेश में कर्ज का पहाड़ खड़ा कर दिया है. त्रिवेंद्र सरकार ने जहां बीते साढ़े तीन साल में 2100 का कर्ज लिया है. वहीं बुधवार को आने वाले तीन महीनों में  RBI से 3000 और लोन लेने के लिए आग्रह किया है. 

गौरतलब है कि उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति पहले ही चरमराई हुई थी, अब कोरोना काल में राज्य पर आर्थिक संकट और बढ़ गया है. कोरोना के चलते उपजे आर्थिक संकट से निपटने के लिए प्रदेश सरकार दिसंबर तक हर महीने एक-एक हजार करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से उठाएगी. त्रिवेंद्र सरकार ने इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आग्रह भी किया है. 

प्रदेश सरकार आने वाले प्रत्येक माह में दो बार रिजर्व बैंक की ओर से आयोजित नीलामी में भी भाग लेगी. वित्त विभाग के मुताबिक रिजर्व बैंक को इसकी जानकारी दी जा चुकी है. बता दें कि आगामी तीन महीनों में सरकार बाजार से करीब 3000 हजार करोड़ रुपए का कर्ज उठाएगी. 

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क्यों लेना पड़ रहा है कर्ज?
दरअसल, कोरोना काल में सरकार के राजस्व के साधनों पर विपरीत असर पड़ा है. ऐसे में सरकार फिर से बाजार से कर्ज उठाने को मजबूर है. इस पर जहां एक ओर भाजपा का कहना है कि कोरोना महामारी से उपजे हालात के कारण सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार राज्य के राजस्व के साधनों को बढ़ाने की बजाए लगातार कर्ज लेकर राज्य को बोझ तले दबाती जा रही है. 

पहले भी ले चुकी है कर्ज 
प्रदेश सरकार अभी तक बाजार से करीब 2100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है. कोरोना काल में कर्मचारियों के वेतन में कमी करने के बावजूद सरकार को अभी भी हर महीने बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है.

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कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना का कहना है कि यह राज्य का दुर्भाग्य है कि ऐसी अकर्मण्य सरकार प्रदेश चला रही है. उन्होंने  कहा कि त्रिवेंद्र सरकार को वित्तीय प्रबंधन नहीं आता है, इसीलिए अभी तक राजस्व का कोई नया स्रोत नहीं ढूंढ़ सकी. सूर्यकान्त ने राज्य सरकार से यह सवाल किया है कि 1000 करोड़ लोन लेने के बाद इस कर्ज को आखिर कौन चुकाएगा? 

केंद्र पर भी उठाए सवाल 
सूर्यकान्त ने आरोप लगाया है कि यह सरकार केवल शराब और खनन के ही भरोसे चल रही है, इसलिए हालात ऐसे हो गए हैं कि कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं. उन्होंने इस दौरान केंद्र सरकार पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस डबल इंजन सरकार ने प्रदेश की बेहतरी के जो वादे किए थे, वो सब धरे रह गए. केंद्र सरकार द्वारा GST का हिस्सा न दिए जाने पर भी सवाल उठाया. इस दौरान उन्होंने त्रिवेंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी और अमित शाह को खुश करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले कंपनसेशन को माफ कर दिया, जिसके चलते आज राज्य की यह दुर्दशा है. 

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वहीं इस पर बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन का कहना है कि कोविड काल के चलते आर्थिक संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को बाजार से उधार लेना उठाना पड़ रहा है. सरकार की कोशिश है कि कम से कम कर्ज लिया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार वित्तीय प्रबधंन पर काम कर रही है साथ ही यह प्रयास किया जा रहा है कि राज्य पर किसी भी तरह का बोझ न बढ़े.

केंद्र सरकार का मिला साथ 
 डॉ. देवेंद्र भसीन ने बताया कि जीएसटी की प्रतिपूर्ति के लिए सरकार ने केंद्र की ओर से प्रस्तावित विकल्प को स्वीकार कर लिया है. सोमवार को हुई GST परिषद की बैठक में राज्यों को बाजार से 97 हजार करोड़ की बजाय 1.10 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी एक खास व्यवस्था के तहत लेने की अनुमति दी गई है. इस विकल्प के तहत लिए गए लोन पर राज्य सरकार को मूलधन और ब्याज नहीं भरना होगा. इसके साथ ही केंद्र से कैंपा और अन्य केंद्रीय अनुदान में इजाफा होने का भी राज्य को फायदा मिल रहा है. 

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