कोरोना संकट के बीच खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी, अभी पर्यटकों की एंट्री रहेगी बैन

पार्क प्रशासन ने अपनी ओर से फूलों की घाटी में तैयारियां पूरी कर ली हैं. 87.5वर्ग किमी. के इलाके में सुरक्षा सहित आवाजाही के लिए सभी पैदल ब्रिज और पगडंडियों को दुरस्त कर दिया है. 

कोरोना संकट के बीच खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी, अभी पर्यटकों की एंट्री रहेगी बैन
फाइल फोटो

पुष्कर चौधरी/चमोली: फूलों की घाटी को हर साल की तरह पार्क प्रशासन ने 1 जून से खोल दिया है, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए अभी पर्यटकों को यहां आने की इजाजत नहीं होगी. शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद पर्यटकों की एंट्री को लेकर जिला प्रशासन अनुमति देगा.

जिलाधिकारी चमोली स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि 8 जून से पर्यटकों के लिए फूलों की घाटी को खोलने की बात चल रही है. फिलहाल, पार्क प्रशासन ने अपनी ओर से फूलों की घाटी में तैयारियां पूरी कर ली हैं. 87.5वर्ग किमी. के इलाके में सुरक्षा सहित आवाजाही के लिए सभी पैदल ब्रिज और पगडंडियों को दुरस्त कर दिया है. मुख्य गेट से लेकर बामड़ धौड़, स्यूचंद मेरी मैमोरी प्वाइंट, रिवर साईड तक का पैदल मार्ग लोगों की आवाजाही के लिये तैयार है. साथ ही जगह-जगह पर वनकर्मियों की तैनाती की गई है.

बता दें कि फूलों की घाटी 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है. फूलों की घाटी खासकर विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद रही है. यहां, पांच सौ से ज्यादा प्रजातियों के फूल हैं, जिनमें बहुत सी दुर्लभ प्रजातियां भी हैं. 6 सितम्बर 1982 को फूलों की घाटी को नेशनल पार्क और साल 2005 में यूनेस्को की ओर से इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिला. फूलों की घाटी जैव विविधता का अनुपम खजाना है. यहां न केवल सैकड़ों प्रजाति के फूल हैं, बल्कि 250 से भी ज्यादा प्रजातियों के पक्षी, 70 प्रजातियों की दुर्लभ तितलियां और अन्य जीव-जंतुओं का प्रवास होता है.