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वाराणसी: 'प्रताड़ित' पतियों ने जीते जी पत्नियों का किया पिंडदान

ये यज्ञ वास्तव फाउंडेशन, सेव इंडियन फैमिली मूवमेंट और दामन वेलफेयर सोसायटी मुम्बई की तरफ से किया गया.

वाराणसी: 'प्रताड़ित' पतियों ने जीते जी पत्नियों का किया पिंडदान
करीब 160 पुरूषों ने ये अनोखे तरीके का पिंडदान किया.

नई दिल्ली/वाराणसी: धर्म नगरी वाराणसी में एक ऐसा पूजा की, जिसे सुनकर और देखकर लोग हैरान रह गए. वाराणसी में हुए अनोखे तरीके का पिंडदान किया चर्चा का विषय बना हुआ है. पुरुषों के एक समूह ने महिलाओं के खिलाफ यज्ञ और पिंड दान कर पिशाचिनी मुक्ति यज्ञ किया. इस यज्ञ में करीब 160 पुरुषों ने आहूति दी. इन पत्नी पीड़ित पुरुषों ने जीते जी अपनी पत्नियों का पिंडदान किया, जो अब उनके साथ नहीं रहती हैं. साथ ही साथ अपनी पूर्व पत्नियों के लिए पिशाचिनी मुक्ति पूजा भी की, ताकि उनकी पत्नी से जुड़ी बुरी यादें भी उनके साथ न रहें.

ये यज्ञ वास्तव फाउंडेशन, सेव इंडियन फैमिली मूवमेंट और दामन वेलफेयर सोसायटी मुम्बई की तरफ से किया गया. पिशाचिनी मुक्ति यज्ञ करने वालो का कहना है कि महिलाएं अपनी आजादी का फायदा उठा कर पुरुषों का शोषण कर रही हैं, लेकिन उनके आगे कोई पुरुषों की सुनवाई नहीं होती है, इसलिए यह मुक्ति यज्ञ किया गया है. 'सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन' के संस्थापक वकारिया ने कहा कि हर साल 92 हजार पुरुष मेंटल टॉर्चर की वजह से आत्महत्या कर लेते हैं, जबकि महिलाओं में ये आंकड़ा 24 हजार का है. 

वास्तव फाउंडेसन के सदस्य चेतन का कहना है कि हमारे देश में मर्दों को जानवर से भी बदतर समझा जाता है. इसलिए उसकी समस्या के निवारण के लिए कोई मंत्रालय नहीं है. उन्होंने कहा, महिलाओं की समस्या के निवारण के लिए आयोग गठित है, जानवर संरक्षण के लिए भी है, लेकिन मर्दों के हक की रक्षा के लिए न तो कोई आयोग है और न ही कोई मंत्रालय है. 

एक और पत्नी पीड़ित ने कहा दफ्तर के बाद घर आकर एक नई नौकरी शुरू हो जाती है. नौकरी करके दो-चार रुपये तो हाथ में आते हैं, लेकिन पत्नी की नौकरी में प्रताड़ना के अलावा और कुछ हासिल नहीं होता.  
उन्होंने कहा कि इन पत्नियों ने अपने-अपने पतियों की जिंदगी नरक कर दी है. उनसे दिमागी शांति छीन ली है.