सावन सोमवार और चंद्रमा का है खास कनेक्शन, भगवान शिव से मांगा था ये वरदान

भगवान शिव चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न हो कर सावन की सोमवार को प्रकट हुए और उन्होंने चंद्रमा से पूछा...

सावन सोमवार और चंद्रमा का है खास कनेक्शन, भगवान शिव से मांगा था ये वरदान
फोटो क्रेडिट (Shri Kashi Vishwanath Temple Trust)

विशांत श्रीवास्तव/वाराणसी: पौराणिक कथाओं के मुताबिक सोमवार का चंद्रमा से खास कनेंक्शन हैं. चंद्रमा ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव से वरदान मांगा था. उन्होंने सावन का पूरा महीना अपने नाम से मांग लिया था. इसके बाद से ही सावन का सोमवार कहा जाने लगा सोम मतलब चंद्रमा होता है.

'श्राप से चंद्रमा को हो गया टीबी'
साध्वी गिताम्बा तीर्थ ने सावन के सोमवार के बार में बताया कि, राजा दक्ष के 27 कन्या थी. 27 कन्याओं की शादी राजा दक्ष ने चंद्रमा से की थी. लेकिन, चंद्रमा 27 पत्नियों को ना चाह कर अकेले रोहिणी से प्रेम करते थे. जिसके बाद राजा दक्ष ने चन्द्र को श्राप दे दिया. श्राप से चंद्रमा को क्षय रोग हो जाएगा. यानि कि आज के समय में जिसे टीबी का रोग कहा जाता है. 

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इसलिए सावन के सोमवार में मनोकामना होती है पूरी
राजा दक्ष ने चंद्रमा को ये भी श्राप दिया था कि सामान्य मनुष्य की तरह तुम भी पृथ्वी पर भ्रमण करोगे. जिसके बाद चंद्रमा ने सौराष्ट्र यानी कि गुजरात आकर भगवान शिव की तपस्या शुरू कर दी. भगवान शिव चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न हो कर सावन की सोमवार को प्रकट हुए और उन्होंने चंद्रमा से पूछा कि तुम्हें क्या चाहिए फिर चंद्रमा ने वरदान मांगा कि मैं चाहता हूं कि सावन का पूरा महीना मेरे नाम से हो. तभी से सावन का सोमवार कहा जाने लगा सोम मतलब चंद्रमा होता है. चंद्रमा ने ये भी वरदान मांगा कि सावन के सोमवार में जो भी व्यक्ति जो मनोकामना मांगेगा वह आप पूरी करेंगे. 

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इसलिए भगवान शिव काशी में हुए थे बिराजमान 
वहीं, काशी विश्वनाथ की बात कही जाए तो सबसे ज्यादा महत्व काशी का है. गिताम्बा ने बताया कि काशी में ब्रह्म हत्या हुई थी. इसलिए भगवान शिव स्वयं यहां पर आकर बिराजमान हुए हैं. काशी में 12 ज्योतिर्लिंग हैं. इसलिए काशी में स्वयम्भू हैं. सभी ज्योतिर्लिंग में सबसे ऊपर काशी हैं.

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इस मंत्र से मनोकामना होगी पूरी!
भगवान शिव के बारे में कहा गया है कि दोनों अवस्थाओं में समान रहते हैं सुसुप्ता अवस्था में भी समाधि में रहते हैं. जागृत अवस्था में दिन रात कथा ही भगवती को सुनाते रहते हैं हैं. इसलिए ''बाबा सब कहें अम्बा कहे न कोई बाबा के दरबार जो अम्बा कहे सो होए''.उन्होंने कहा सावन के सोमवार में ओम क्लिं नमः शिवाय क्लिं ओम मंत्र का उच्चारण करने से मन की सारी मनोकामनाएं पूरी होंगी.

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