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ED Raid News: केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के अलग-अलग हिस्सों में फर्जी टोल कलेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बहुत बड़े गिरोह पर शिकंजा कसा है. 2 सितंबर 2026 की सुबह से ही ED ने PMLA की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता स्थित कुल 14 ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू की है.
कैसे होता था अरबों का फर्जी टोल कलेक्शन?
UP STF ने इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था. जिसके बाद ED ने मामले में जांच संभाली. जांच में पाया गया कि आरोपियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के आधिकारिक सर्वर के समानांतर (Parallel) एक फर्जी और पायरेटेड सॉफ्टवेयर तैयार किया हुआ था. इसके जरिए फर्जी FASTag का इस्तेमाल करके ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को टोल प्लाजा से निकाला जाता था. हैरान करने वाली बात यह है कि कुल टोल वसूली का केवल 5 फीसदी हिस्सा ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होता था, जबकि 95 फीसदी रकम सीधे घोटालेबाजों की जेब में जा रही थी.
जांच के दायरे में 62.87 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का मामला
इस फर्जीवाड़े में टोल संचालकों, आईटी कर्मचारियों और बिचौलियों के बीच काली कमाई का बंटवारा होता था. UP STF ने हाल ही में वाराणसी से इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह को गिरफ्तार किया था, जो हरहुआ इलाके में रहकर पूरे अवैध नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था. इसके अलावा वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा पर 62.87 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का मामला भी जांच के दायरे में है.
अधिकारियों का कहना है कि मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सर्वर डेटा, वित्तीय दस्तावेज और बैंक खातों से जुड़ी जानकारियां जब्त की जा रही हैं. इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना है.
देश के 200 से अधिक टोल प्लाजा रडार पर
फिलहाल ED की टीम छापेमारी के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों को खंगाल रही है. केंद्रीय एजेंसियों की जांच अब केवल कुछ ठिकानों तक सीमित नहीं है. देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा इस फर्जीवाड़े की जांच के दायरे में हैं, जिनमें से अकेले उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक टोल प्लाजा शामिल हैं. ED की इस सख्त कार्रवाई से फर्जी टोल ऑपरेटरों और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.
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