'दबंग गर्ल' की तरह गांव से निकलीं दो बेटियां... तीरंदाजी में बेटों को रही हैं पछाड़

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में इन दिनों संस्कृत की शिक्षा-दीक्षा के अलावा 'आर्चरी' के खेल के चलते चर्चा में बना हुआ है.

'दबंग गर्ल' की तरह गांव से निकलीं दो बेटियां... तीरंदाजी में बेटों को रही हैं पछाड़

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में इन दिनों संस्कृत की शिक्षा-दीक्षा के अलावा 'आर्चरी' के खेल के चलते चर्चा में बना हुआ है. पूर्वांचल में आर्चरी खेल की नींव रखने वाले संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में धनुर्धर सिस्टर अपने धनुर्विद्या से सबको चौंका रही हैं. दरअसल, चंदौली जिले के कमरहिया गांव की ये धनुर्धर बहनें इन दिनों पूर्वांचल के धनु्र्धरों को कड़ी टक्कर दे रही हैं. ये बहनें सामाजिक मिथक को तोड़ धनुर्विद्या के गुण को सीख रही हैं और समाज में लड़कियों को आगे बढ़ने का संदेश दे रही हैं.

दो लड़कियां दे रही हैं लड़कों को टक्कर
वेद, पुराणों और कहानियों में राजा-महाराजाओं के साथ रानियों को धनुर्विद्या का ज्ञान लेकर बड़े-बड़े धनुर्धरों को पछाड़ने के बारे में आपने पढ़ा और सुना ही होगा. लेकिन, आधुनिक युग में राजा-महराजा परिवार नहीं बल्कि एक किसान की बेटियां धनुर्विद्या से बड़े-बड़े धनुर्धरों को पछाड़ रही हैं. जानकारी के मुताबिक सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की दो छात्राएं अपने इस कला से छात्रों को टक्कर दे रही हैं.

13 लड़के और 2 लड़कियां ले रहे धनुष चलाने की शिक्षा
सटीक निशाना और एकाग्रता का खेल 'आर्चरी' का प्रक्षिक्षण पूर्वांचल में सबसे पहले संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में किया गया. यहां से शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर यहां के छात्रों ने पूर्वांचल के कई जिलों में इस खेल का प्रशिक्षण प्रारंभ किया. अब तक जिसने भी धनुर्विद्या की शिक्षा को ग्रहण किया वह छात्र थे, लेकिन अब छात्राएं भी धनुर्विद्या की शिक्षा ले रही हैं. वर्तमान में धनुर्विद्या की शिक्षा ले रहे 15 विद्यार्थियों में 13 छात्र और 2 छात्राएं हैं. खास बात यह है कि धनुष विद्या सीख रही यह दोनों छात्राएं सगी बहन हैं.

प्रीति कुमारी जीत चुकी है नेशनल गेम में मेडल
तीरंदाजी की इस विद्या का पाठ पढ़ाने वाले पूर्व भारतीय तीरंदाजी टीम के कोच आदित्य कुमार ने बताया, "पहले महिलाएं योद्धाओं के रूप में रही हैं. उनको देखते हुए आज की लड़कियां भी लड़कों को टक्कर देने के लिए यह विद्या सीख रही हैं. इस यूनिवर्सिटी के लड़के ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं और उनको यह लड़कियां कड़ी टक्कर दे रही हैं." जानकारी के मुताबिक धनुर्धर सिस्टर प्रीति कुमारी नेशनल गेम में मेडल भी जीत चुकी हैं.

दंगल जैसी ही है इन दोनों बहनों की कहानी
फिल्म दंगल की तरह ही प्रीति और खुशबु चंदौली जिले के एक किसान की बेटी हैं. वे तीन बहनें और दो भाई हैं. तीनों बहनें धनुर्विद्या का प्रशिक्षण ले रही हैं तो वहीं भाई भी इसी खेल में अपना करियर बना रहे हैं. नेशनल खिलाड़ी प्रीति खरवार की मानें तो वह इस खेल के लिए वर्ष 2009 से दिन में 8 घंटे प्रेक्टिस करती हैं. प्रीति का कहना है, "बचपन में तीरंदाजी देख काफी अच्छा लगता था और मैं बड़ी होकर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाना चाहती थी. जिसको लेकर मैंने इस खेल को चुना."

छोटी बहन को देख बड़ी बहन ने सीखा धनुष चलाना
वहीं प्रीति की बड़ी बहन खुशबु खरवार की मानें तो इस खेल में अपनी छोटी बहन को खेलता देख उन्होंने भी तीरंदाजी सीखने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा, "जब मेरी बहन इस खेल को खेलती तो काफी लोग तरह-तरह की बातें करते थे. लेकिन, जब उसने नेशनल में मेडल जीता तो वही लोग अब सराहना भी करते हैं. हम लोगों का सपना है कि हम समाज और लड़कों से इस खेल के माध्यम से डट कर मुकाबला करें और कहीं भी किसी क्षेत्र में लड़कियां पीछे ना रहें."