विकास दुबे एनकाउंटर केस की जांच शुरू, सुप्रीम कोर्ट से गठित न्यायिक आयोग की टीम दर्ज कर रही है बयान

आयोग की टीम ने लखनऊ में रमाबाई अंबेडकर मैदान के पास एक गेस्ट हाउस में अपना अस्थाई कार्यालय बनाया है. इस कार्यालय में आयोग की टीम ने कानपुर से आए 5 लोगों से बातचीत करके उनके बयान भी दर्ज किए. 

विकास दुबे एनकाउंटर केस की जांच शुरू, सुप्रीम कोर्ट से गठित न्यायिक आयोग की टीम दर्ज कर रही है बयान
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (file photo)

कानपुर: विकास दुबे एनकाउंटर मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई 3 सदस्यीय न्यायिक आयोग की टीम कानपुर पहुंच चुकी है. टीम ने माले की जांच-पड़ताल अपनी ओर से शुरू कर दी है. इसके लिए टीम विकास दुबे के बिठूर स्थित गांव बिकरू भी पहुंची थी. एनकाउंटर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए आयोग की टीम ने लखनऊ में रमाबाई अंबेडकर मैदान के पास एक गेस्ट हाउस में अपना अस्थाई कार्यालय बनाया है. इस कार्यालय में आयोग की टीम ने कानपुर से आए 5 लोगों से बातचीत करके उनके बयान भी दर्ज किए. 

सुप्रीम कोर्ट ने बनाया है 3 सदस्यीय आयोग 
विकास दुबे एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग के पुनर्गठन के आदेश दिए थे, क्योंकि यूपी सरकार पहले ही एक सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित कर चुकी थी. आयोग में कुल 3 सदस्य हैं. पूर्व जज जस्टिस बी एस चौहान कानपुर के हिस्ट्रीशीटर और खूंखार अपराधी विकास दुबे एनकाउंटर मामले की जांच कमेटी के प्रमुख बनाए गए हैं. अन्य सदस्यों में हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शशिकांत अग्रवाल और यूपी के पूर्व डीजीपी के एल गुप्ता को शामिल किया गया है. 

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2 महीने में देनी है एनकाउंटर की जांच पर रिपोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए इस आयोग को अपनी जांच 2 महीने के अंदर ही पूरी करनी होगी और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी. आयोग विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के जवाब अपनी रिपोर्ट में देगा. दुर्दांत अपराधी और 8 पुलिसकर्मियों के हत्यारे विकास दुबे के एनकाउंटर के तरीके और उस दौरान के घटनाक्रम को लेकर काफी लोगों ने सवाल उठाए थे. जिसके बाद कोर्ट में दाखिल की गईं याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने न्यायिक जांच आयोग गठित किया.

क्यों विकास दुबे के एनकाउंटर पर उठे सवाल?

विकास दुबे कानपुर के बिकरू गांव का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर था, जिसने 2 जुलाई में देर रात अपने साथियों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर दी थी. घटना के बाद से विकास दुबे फरार हो गया था. यूपी पुलिस के 10 हजार जवान उसे हफ्ते भर तक ढूंढते रहे लेकिन विकास नहीं मिला. आखिरकार मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर के बाहर विकास दुबे की नाटकीय गिरफ्तारी हुई. गिरफ्तारी के बाद यूपी एसटीफ की टीम उसे लेकर कानपुर आ रही थी, कि रास्ते में बारिश होने और मवेशियों का झुंड आ जाने की वजह से पुलिस की गाड़ी पलट गई. पुलिस के मुताबिक गाड़ी में सवार विकास दुबे ने पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनी और खिड़की तोड़कर फरार हो गया. रास्ता कच्चा होने की वजह से विकास ज्यादा दूर जा नहीं पाया और लगभग 2 किलोमीटर भागने के बाद पुलिस ने उसे एनकाउंटर में ढेर कर दिया. इस एनकाउंटर की कहानी में एक के बाद एक हुए घटनाक्रमों को लेकर मीडिया और कई वकीलों ने सवाल उठाए. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी गई और कोर्ट ने मामले की जांच के लिए आयोग बनाया.

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