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'राम जन्मभूमि' का ट्रेलर रिलीज, अयोध्या में कारसेवकों पर हुए गोलीकांड पर बनी पहली फिल्म

 फिल्म का अधिकांश भाग लखनऊ और अयोध्या में शूट हुआ है.

'राम जन्मभूमि' का ट्रेलर रिलीज, अयोध्या में कारसेवकों पर हुए गोलीकांड पर बनी पहली फिल्म

विनोद मिश्रा, लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी सियासत और इस्लाम में हलाला जैसी समाजिक बुराईयों पर बनी पहली फिल्म "राम जन्मभूमि" का ट्रेलर आज लखनऊ में रिलीज हुआ. फिल्म अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद हुए गोली कांड से शुरु होती है और फिर इस पर होने वाली सियासत को ये फिल्म बेपर्दा करती है. इस फिल्म के लेखक और निर्माता वसीम रिज़वी है, जो खुद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन भी है और अयोध्या में राम मंदिर के पक्षधर भी है. फिल्म का निर्देशन सनोज मिश्रा ने किया है. फिल्म का अधिकांश भाग लखनऊ और अयोध्या में शूट हुआ है.

लखनऊ में अपनी फिल्म के ट्रेलर रिलीज के मौके पर वसीम रिजवी ने कहा कि वो राममंदिर पर अपने विचार को अब सिनेमा के माध्यम से पुरे देश तक पहुंचाने जा रहे है. गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर के विषय को को केंद्र में रखकर बनने वाली यह पहली फीचर फिल्म "राम जन्मभूमि" है. 

अयोध्या मे राम मंदिर निर्माण का मुद्दा सुर्ख़ियों में हैं. एक तरफ साधू संत सरकार पर दबाव बना रहें है तो दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद 25 नवंबर को अयोध्या में धर्म-सभा करने जा रही है. शिया वफ्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी पहले भी विवादित भूमि पर राममंदिर के निर्माण की पहल कर चुके है.  वसीम रिज़वी को इसकी कड़ी कीमत चुकानी पड़ी जब कट्ट्टर मुस्लिम संगठनो ने इसका विरोध किया, लेकिन वसीम रिजवी हमेशा अयोध्या में राम मंदिर के लिए प्रयासरत रहे है और अपने इन्हीं कोशिशों को फिल्म के जरिए सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं.

फिल्म के लेखक और निर्माता वसीम रिजवी का ऐसा मानना है,  'मुस्लिम राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले नेताओं और धर्म के ठेकेदारों पर यह फ़िल्म एक करारा प्रहार करेगी.  मुस्लिम समाज को हलाला जैसी दर्दनाक कुप्रथा के अन्धेरेपन को दर्शको के सामने प्रस्तुत करेगी. यह फिल्म सवाल करती है राममंदिर कब तक एक मुद्दा बना रहेगा? आधुनिक समाज़ में रूढ़िवादी हलाला प्रथा से मिली मानसिक प्रताड़ना कब तक ?  हलाला की आड़ में अपनी बहु से शारीरिक संबंधों का अंत कितना भयानक होगा? सवाल ज्वलंत है तो जवाब भी ज्वलंत होंगें, हम फ़िल्म में वह सब कुछ दिखा रहे है जो एक सभ्य मुस्लिम समाज़ में नहीं होना चाहिए.'

उन्होंन कहा, 'मुझे पता है कि धर्म के पाखंडी ठेकेदार और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करनेवाले नेताओं के लिए यह फ़िल्म बहुत चुभने वाली है, लेकिन हम इस फ़िल्म के साथ देश में राम जन्भूमि पर मंदिर के निर्माण के साथ ही हलाला जैसे शर्मनाक बुराई को समाज से जल्द से जल्द मिटाना चाहते है.'

इस मौके पर फिल्म के निर्देशक सनोज मिश्रा ने बताया " फिल्म राम जन्मभूमि” दिखाती  हैं कि किस तरह देश के बाहर से दुश्मन बाबरी मस्जिद के नाम पर दंगे करवाते हैं. साथ ही इस्लाम धर्म में हलाला जैसी बुराई को भी दर्शकों के सामने प्रस्तुत करेंगी. और सबसे बड़ा सवाल  का जवाब मांगती हैकि  ज़फरखान जैसे लोग इस देश के लिए कितने ख़तरनाक है.

बेहद ही संवेदनशील मामले पर बनी इस फिल्म का असर तो फिल्म का सिनेमाघरों में लगने के बाद पता चलेगा, लेकिन फिल्म से जुड़े लोगों का दावा है कि ये फिल्म समाज में नफरत की जगह सौहार्द बढायेगी. फिल्म किसी धर्म विशेष को टारगेट नही करती .