मऊ के बुनकरों को फिर मिलेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

योगी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी ) योजना फिर से बुनकरों की जिंदगी में खुशियां लेकर आई है.

मऊ के बुनकरों को फिर मिलेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
बुनकरों को फिर मिलेगी पहचान

मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद को बुनकर नगरी के नाम से जाना जाता है. यहां बुनकरों द्वारा बनाई गई सिल्क की साड़ियों की अच्छी खासी मांग थी. लेकिन अब बदलते वक्त के साथ साड़ियों की मांग कम हो गई है. इससे बुनकरों की रोजी रोटी पर संकट आ गया है. लेकिन योगी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी ) योजना फिर से बुनकरों की जिंदगी में खुशियां लेकर आई है.

बताया जा रहा है कि बाजार में सूरत की साड़ी आने से बुनकरों के द्वारा बनाई गई साड़ियों की खरीद कम हो गई थी. ग्राहकों को लगता था कि बुनकरों की साड़ियां उन्हें महंगे दाम में मिल रही है. जबकि सूरत की साड़ियों की कीमत कम है. इसीलिए लोग ज्यादातर सूरत की साड़ियां खरीद रहे थे. इसी वजह से बुनकरों को अपना कामकाज बंद कर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा था.

योगी सरकार ने ओडीओपी योजना के तहत मऊ की सिल्क साड़ियों की पहचान अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का खाका तैयार किया है. बुनकरों के हाथों की बनी साड़ियों को अब अमेजान और दूसरी कंपनियां ऑनलाइन बेचने को तैयार हो गई हैं.

बुनकरों के हाथों बनी साड़ियों को नई पहचान दिलाने के लिए जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी भी प्रशासनिक स्तर पर मदद कर रहे हैं. प्रदेश सरकार की योजना वन डिस्ट्रिट वन प्रोडक्ट के अन्तर्गत बुनकरों को शामिल किया जा रहा है.

योगी सरकार की इस पहल से बुनकरों की जिंदगी फिर खुशहाल बनने जा रही है. इसीलिए वो सरकार का धन्यवाद दे रहे हैं. अरसद नोमानी बताते हैं कि पिछली सरकारों की गलत नीतियों की वजह से बुनकरों का काम फेल हो गया था. लेकिन वर्तमान सरकार की योजना ओडीओपी से बुनकरों को एक बार फिर पहचान मिलने वाली है.