रिहंद बांध, गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध भी कहा जाता है. यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड जैसी सरकारी एजेंसियां लगातार इसकी सुरक्षा पर नजर रखती हैं.
बांध के अत्यधिक जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए मानसून के दौरान नियमित रूप से इसके फाटक खोलकर पानी छोड़ा जाता है ताकि इसमें मौजूद दल का दबाव खतरनाक स्थिति तक न पहुंच जाए.
अगर यह टूट गया तो उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी जल-त्रासदी बन सकता है. इसके टूटने का मतलब है कि इसमें मौजूद अथाह जल एक साथ अनियंत्रित होकर बहने लगेगा.
इसके टूटते ही सोनभद्र, सिंगरौली (मध्य प्रदेश) और आसपास के इलाकों में सुनामी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी.लाखों क्यूसेक पानी की विशाल दीवार पल भर में निचले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लेगी.
बांध के कैचमेंट एरिया में कई सुपर थर्मल पावर स्टेशन हैं, जिनकी कूलिंग और संचालन ठप हो जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कई अन्य उत्तरी राज्यों में भीषण बिजली संकट खड़ा हो जाएगा
इस बांध के टूटने से उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के साथ-साथ बिहार के कई मैदानी इलाकों में भयानक बाढ़ आ जाएगी. हजारों गांव और कस्बे जलमग्न हो सकते हैं और लाखों लोग बेघर हो जाएंगे.
पानी की भारी निकासी से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत बह जाएगी और बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि दलदल या बंजर में बदल जाएगी. जल-प्रवाह थमने के बाद भी इस क्षेत्र में लंबे समय तक पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं का गंभीर संकट रहेगा.
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