इस महिला मुख्यमंत्री के राज्य में, महिलाओं पर एसिड अटैक के सबसे ज्यादा मामले

NCRB की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक एसिड अटैक के सबसे ज्यादा 50 मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए, जहां 53 लोग इसके शिकार हुए. 45 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा, यहां 47 लोग इसके शिकार हुए. 

इस महिला मुख्यमंत्री के राज्य में, महिलाओं पर एसिड अटैक के सबसे ज्यादा मामले
सांकेतिक तस्वीर.

नोएडा: देश में एसिड अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ताजा मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का है, जहां तीन बहनों पर सोते समय एसिड फेंक दिया गया. इस तेजाबी हमले में सबसे बड़ी बहन गंभीर रूप से झुलस गई, जबकि बाकी दो बहनें भी एसिड के छींटे पड़ने से झुलस गईं. पुलिस का कहना है कि घटना के पीछे की वजह का पता नहीं चल सका है, न ही परिजनों की तरफ से कोई तहरीर दी गई है. पीड़ित के पिता के मुताबिक 23 अक्टूबर को बड़ी बेटी की सगाई थी लेकिन उससे पहले ये घटना हो गई. पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है.

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पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा होता है तेजाबी हमला
NCRB की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक एसिड अटैक के सबसे ज्यादा 50 मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए, जहां 53 लोग इसके शिकार हुए. 45 मामलों के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा, यहां 47 लोग इसके शिकार हुए. ओडिशा में एसिड हमले के 13, बिहार और पंजाब में 12-12 और दिल्ली में एसिड हमलों के 11 मामले दर्ज किए गए.

राज्य                    मामले       पीड़ित
पश्चिम बंगाल           50           53
उत्तर प्रदेश             45           47
ओडिशा                 13           13
पंजाब                    12           13
महाराष्ट्र                  7              7

(आंकड़े: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो रिपोर्ट-2019)

क्या कहता है कानून?
IPC की धारा 326A के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने के इरादे से एसिड फेंकता है, और पीड़ित पूर्ण या आंशिक रूप से जख्मी होता है, तो ये गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा. इसके तहत दोषी को कम से कम 10 साल की सजा या उम्रकैद भी हो सकती है. IPC की धारा 326B के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति दूसरे पर घायल करने के उद्देश्य से एसिड फेंकने की कोशिश करता है, तो यह भी गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है. इसके तहत दोषी को कम से कम 5 साल की सजा हो सकती है.

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एसिड अटैक में मिली मौत की सजा
एसिड अटैक केस में एक आरोपी को मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है. 2 मई 2013 में मुंबई की प्रीति राठी पर तब एसिड फेंका गया, जब वह बांद्रा टर्मिनस के रेलवे स्टेशन पर खड़ी थीं. इस तेजाबी हमले के करीब 1 महीने बाद भीषण दर्द झेलते हुए प्रीति की मौत हो गई थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस घिनौने कृत्य के लिए आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि बाद में उसकी सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया.

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