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हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा 'सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए'

अदालत ने अपने पूर्व के निर्देश के मुताबिक यह जानकारी सुनवाई की अगली तारीख तक उपलब्ध कराने को कहा है.

हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा 'सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए'
(फाइल फोटो)

इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को एक रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. अदालत ने अपने पूर्व के निर्देश के मुताबिक यह जानकारी सुनवाई की अगली तारीख तक उपलब्ध कराने को कहा है.

मुख्य न्यायाधीश डी.बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने स्नेह लता सिंह और कई अन्य लोगों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर उक्त आदेश पारित किया. याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में दयनीय स्थिति होने का आरोप लगाया है.

इससे पूर्व, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए कई निर्देश जारी किए थे. 

अदालत ने इस राज्य के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल, पैरा मेडिकल और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने का निर्देश दिया था.

अदालत ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से राज्य के मेडिकल कालेजों का अंकेक्षण कराने का भी निर्देश दिया था.

साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश के महानिदेशक (सतर्कता) को राज्य सरकार के उन चिकित्सा अधिकारियों का पता लगाने के लिए विशेष टीमें गठित करने को कहा था जो प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं या अपने अस्पताल और नर्सिंग होम आदि चला रहे हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा था. अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 30 अक्तूबर निर्धारित की है.

(इनपुट - भाषा)