ZEE जानकारी : आखिर कब मिलेंगे उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्वेटर?

3 अक्टूबर 2017 को उत्तर प्रदेश सरकार ने ये आदेश दिया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्वेटर, जूते और मोज़े दिये जाएंगे ताकि बच्चों को ठंड से बचाया जा सके.  सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए 300 करोड़ रूपये का बजट भी तैयार कर लिया.. लेकिन ये सुविधा अभी तक बच्चों तक नहीं पहुंची है यानी सर्दी आ चुकी है लेकिन स्वेटर नहीं आए. 

ZEE जानकारी : आखिर कब मिलेंगे उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्वेटर?

आपने देखा होगा कि सर्दी के मौसम में अकसर कमज़ोर लोगों के हाथ पैर अकड़ जाते हैं.... शरीर में कंपकपी छूटने लगती है और कोई काम करने की इच्छा नहीं होती. इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग की है.. जहां आलस वाली ठंड और लापरवाही से भरी सर्द हवाओं ने सिस्टम को जाम कर दिया हैं.  हालत इतनी ख़राब है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी....उत्तर प्रदेश सरकार के दिये हुए आदेश को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. 

3 अक्टूबर 2017 को उत्तर प्रदेश सरकार ने ये आदेश दिया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्वेटर, जूते और मोज़े दिये जाएंगे ताकि बच्चों को ठंड से बचाया जा सके.  सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए 300 करोड़ रूपये का बजट भी तैयार कर लिया.. लेकिन ये सुविधा अभी तक बच्चों तक नहीं पहुंची है यानी सर्दी आ चुकी है लेकिन स्वेटर नहीं आए. उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब डेढ़ लाख स्कूल हैं और इन स्कूलों में करीब 1 करोड़ 48 लाख बच्चे पढ़ते हैं.  अगर समय पर इन बच्चों को स्वेटर, जूते और मोज़े उपलब्ध करवा दिये जाएं तो उन्हें इस ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है. 

इस योजना में जिस तरह की देर हो रही है.. उसे देखकर लगता है कि बच्चों को स्वेटर तब मिलेंगे.. जब सर्दियां जा चुकी होंगी. अब सवाल ये है कि गर्मियों में स्वेटर देने से.. बच्चों को क्या फ़ायदा होगा ?

CAG की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में, वर्ष 2011 से लेकर 2016 के बीच... 8वीं कक्षा तक पहुंचते पहुंचते...1 करोड़ 21 लाख से ज़्यादा बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया. जबकि 2011 के Census के मुताबिक देश के 8 करोड़ 40 लाख बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं

अब आप खुद ही सोचिए कि विश्वगुरू बनने का सपना देखने वाले देश में.... बच्चे किस तरह स्कूल छोड़ रहे हैं और हमारा सिस्टम कैसे आलस की रजाई में मीठी नींद का आनंद ले रहा है. हमारा सिस्टम..पूरा ज़ोर लगाकर कहता है कि..स्कूल चलें हम.. लेकिन जब बुनियादी सुविधाएं ही नहीं होंगी.. तो बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे.

पिछले 6 वर्षों में उत्तर प्रदेश की सरकारें 6 लाख बच्चों को किताबें उपलब्ध करवाने में नाकाम रही हैं. पिछले 6 वर्षों में 97 लाख बच्चों को स्कूल की यूनिफार्म उपलब्ध नहीं करवाई गई. 

CAG की ये रिपोर्ट बताती है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था की नींव कितनी खोखली है. और जब नींव ही खोखली हो.. तो एक मज़बूत इमारत की कल्पना कैसे की जा सकती है?  बच्चे देश का भविष्य होते हैं लेकिन उनका वर्तमान इतना कष्टदायक नहीं होना चाहिए क्योंकि कष्ट में पलने वाले बच्चे अकसर बड़े होकर कठोर हो जाते हैं.. इसीलिए हमें इस तस्वीर को बदलना होगा ये काम मुश्किल ज़रूर है... लेकिन नामुमकिन नहीं है.

पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 'इस देश के सबसे अच्छे दिमाग...क्लास के आखिरी बेंच पर मिल सकते हैं'..... यानी Back Bench पर बैठने वालों की प्रतिभा को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.. लेकिन हमारा कहना है कि इसके लिए बेंच का होना भी ज़रूरी है. क्योंकि बेंच नहीं होंगे.. और मूलभूत सुविधाएं नहीं होंगी.. तो पूरी शिक्षा व्यवस्था ज़मीन पर बैठ जाएगी. 

उत्तर प्रदेश के बहुत से सरकारी स्कूलों से बेंच गायब हो चुके हैं और सरकार, बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए, सही समय पर स्वेटर का इंतज़ाम भी नहीं कर पाई है. ये लापरवाही और लालफीताशाही.. बच्चों के भविष्य पर एक बहुत बड़ी चोट है. उत्तर प्रदेश अगर अलग से कोई देश होता तो उसकी जनसंख्या दुनिया में पांचवें नंबर पर होती. यानी इस राज्य को आप एक देश के बराबर मान सकते हैं. और किसी देश में अगर शिक्षा व्यवस्था का ये हाल हो.. तो फिर इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. हमें उम्मीद है कि ये रिपोर्ट देखने के बाद प्रशासन की नींद खुल गई होगी