मीरजापुर: इस मंदिर में नहीं फेंके जाते हैं नदी में फूल, इकट्ठा कर बनाई जाती हैं अगरबत्तियां

अब यह फूल गंगा नदी में प्रवाहित नहीं किए जाते, बल्कि मंदिर में पहुंची महिलाएं दिन में दो बार इन्हें लेकर अपने घर जाती हैं और इनके चूर्ण का प्रयोग अवह अगरबत्ती में करती हैं.

मीरजापुर: इस मंदिर में नहीं फेंके जाते हैं नदी में फूल, इकट्ठा कर बनाई जाती हैं अगरबत्तियां
अगरबत्ती बनाकर उसे पैक करना महिलाओं की दिनचर्या में शामिल हो गया है.

राजेश मिश्र​/मीरजापुर: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का आहवान किया तो यह तमाम लोगों के दिल को छूकर उनके लिए प्रेरणा बन गया. माता विंध्यवासिनी के धाम में प्रतिदिन चढ़ने वाले कई कुंतल फूलों से स्वयं सहायता समूह की महिलाऐं अगरबत्ती बना रही हैं. यह फूल पहले गंगा नदी में बहाया जाता था. महिलाओं के दिल में ऐसी प्रेरणा जगी जिससे नदी प्रदुषण मुक्त हुई और वहीं मंदिर में चढ़ाया गया फूल कमाई का माध्यम बन गया है.

करोड़ों भक्तों के आस्था के केंद्र माता विंध्यवासिनी के धाम में प्रतिदिन हजारों की तादात में भक्तगण आते हैं. नवरात्रि में इनकी संख्या कई लाख पहुंच जाती है. मां के दर पर आकर मालाफूल चढ़ाने वाले भक्तों की आस्था के प्रतीक मालाफूल पहले गंगा नदी में प्रवाहित कर दिए जाते थे, अब यह फूल गंगा नदी में प्रवाहित नहीं किए जाते, बल्कि मंदिर में पहुंची महिलाएं दिन में दो बार इन्हें लेकर अपने घर जाती हैं और इन्हें चुनकर सुखाती हैं उसके बाद इनके चूर्ण का प्रयोग अब वह अगरबत्ती में करती हैं. 

इस काम में लगी महिलाओं को एक तरफ रोजगार मिला तो वही उनकी आमदनी भी बढ़ गई है. स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं के इस कार्य को आगे बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है. खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संपर्क करके इनके उत्पाद की बिक्री बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

पहले केवल परिवार की देखभाल और खाना बनाने के बाद घर पर ही बैठकर समय गुजारा करती यह महिलाएं अब स्वयं सहायता समूह में काम कर अपना समय बिताती हैं. मंदिर से जाकर माला फूल लाना उसे छांट कर सुखाकर फूलों का चूर्ण बनाना और फिर अगरबत्ती बनाकर उसे पैक करना महिलाओं की दिनचर्या में शामिल हो गया है. अब ये महिलाएं एक साथ बैठकर अगरबत्ती बनाती हैं. कोई मसाला लगाता है तो कोई इन्हें पैकिंग करता है. 

उनके प्रयास से अगरबत्ती विन्ध्याचल क्षेत्र के अष्टभुजा, विंध्याचल और कालीखोह मंदिर की दुकानों पर खूब बिक रहे हैं. प्राकृतिक खुश्बू से हाथ द्वारा बनाई गई विंध्य प्रेरणा अगरबत्ती विन्ध्याचल क्षेत्र के दुकानों पर उपलब्ध है. इस काम में लगी महिलाओं को अब इस बात की खुशी है कि अब मंदिर से निकलने वाले मालाफूल उनके द्वारा उठाए जाने से गंगा नदी प्रदूषित नहीं होती, उन्हीं फूलों के द्वारा उन्हें चार पैसे की आमदनी हो जाती है और परिवार के लिए नून, रोटी व तेल का व्यवस्था हो जा रही है.