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गोरखपुर दौरे पर CM योगी, कहा- शासन की योजनाओं से खुद को जोड़ने में न करें परहेज

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम अपनी शिक्षण संस्थाओं का संचालन तो करते हैं. लेकिन संचालन सैद्धांतिक ज्यादा होता है और व्यावहारिक कम होता है. 

गोरखपुर दौरे पर CM योगी, कहा- शासन की योजनाओं से खुद को जोड़ने में न करें परहेज
सीएम योगी ने कहा कि मुझे लगता है कि कोई भी संस्था दुनिया के अंदर अपनी एक नई पहचान तभी बना सकती है. जब वह समाज के सापेक्ष होगी. (फाइल फोटो)

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को गोरखपुर के महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह कार्यक्रम में पहुंचे. सीएम योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की और दिग्विजय नाथ वाटिका में पौधरोपण किया. इसके उपरांत मुख्यमंत्री योगी ने गोरक्षनाथ साहित्य केंद्र का लोकार्पण भी किया.

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी संस्था के लिए अपना स्वर्ण जयंती वर्ष एक महत्व रखता है. भारत की प्राचीन परंपरा को देखते हैं, तो इस परंपरा में हमने अपने पूरे जीवन को चार आश्रमों में विभाजित किया है. उन्होंने कहा कि प्रथम दो आश्रम के बाद तीसरा आश्रम वानप्रस्थ का माना जाता है. पहला जब व्यक्ति समाज पर आश्रित होता है. दूसरा जब वह स्वयं के लिए कुछ अर्जित करते हैं. तीसरा जब समाज के ऋण से मुक्त होने की ओर अग्रसर होता है. मुझे लगता है कि यह गांव शहर की महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और उससे जुड़ी हुई संस्थाओं के लिए कि हम सब अपने उन भूमिका को पहचाने जिसके लिए इस संस्था के संस्थापकों ने इस महाविद्यालय की स्थापना गोरखपुर महानगर में की थी.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज ने की थी. उस वक्त गोरक्ष पीठ के पास भी साधन नहीं थे. लेकिन अपने गुरु के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करने और उनके अपमान से उन्हें उभारने के लिए उन्होंने छोटे से विद्यालय का बीजारोपण किया था. 1932 में छोटी गोरक्ष पीठ के महंत के बाद भी नहीं बन पाए थे. लेकिन उनके मन में अपने गुरु के लिए सम्मान का भाव था और उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की. गोरक्षपीठ के पास में मध्यकाल में अभाव था. मध्यकाल में आक्रांताओं ने गोरक्ष पीठ को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन गोरक्ष पीठ अपनी उस यात्रा को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है, जो उसका उद्देश्य रहा है.

 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के दिवंगत होने के कारण हम लोग उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे. लेकिन समापन समारोह में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ है. मनुष्य के जीवन में प्राचीन भारत की पद्धति ने व्यवस्था दी कि पहले 25 वर्ष का समय हम समाज पर निर्भर रहकर जीवन आगे बढ़ाते हैं. दूसरे 25 वर्ष का कार्यकाल एक गृहस्थ जीवन के रूप में हमारे लिए स्वयं के लिए कुछ अर्जित करने के लिए होता है. लेकिन तीसरे 25 वर्ष का कार्यकाल समाज को भी अपनी परंपरा के साथ-साथ अपनी व्यवस्था को संचालित करने के साथ समाज को भी देने का होता है.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम अपनी शिक्षण संस्थाओं को कैसे समाज के सापेक्ष बनाएं. अक्सर ऐसा होता है कि हम अपनी शिक्षण संस्थाओं का संचालन तो करते हैं. लेकिन संचालन सैद्धांतिक ज्यादा होता है और व्यावहारिक कम होता है. परंपरागत पाठ्यक्रम तक हम सीमित रह जाते हैं. उसका दर्शन जो समाज के साथ मिलकर के उस क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक, राजनीतिक परिस्थिति के अनुरूप हम उन संस्थाओं को कैसे उसके साथ जुड़े हैं कि उनकी सक्रिय सहभागिता जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाज को नेतृत्व देने की हो और इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई केंद्रबिंदु हो सकता है. तो वह शिक्षण प्रशिक्षण संस्था बन सकती हैं.

शिक्षक अभिभावक और छात्र-छात्राओं की जिम्मेदारी बनती है, कि खुद को समाज के सापेक्ष बनाकर के रचनात्मक गतिविधियों के साथ खुद को जोड़े और आज इसकी सबसे बड़ी आवश्यकता है. मुझे लगता है कि कोई भी संस्था दुनिया के अंदर अपनी एक नई पहचान तभी बना सकती है. जब वह समाज के सापेक्ष होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं को हम खुद से जोड़ने में परहेज क्यों करते हैं. स्वच्छ भारत मिशन क्या केवल सरकार का ही है. क्या इससे हमें नहीं जुड़ना चाहिए. आमजन को आर्थिक स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना चाहते हैं. लेकिन हम उन शासन की नीतियों को कार्यक्रमों के बारे में कभी भी अपने छात्र छात्राओं को अवगत नहीं कराते और उसे जोड़ना नहीं चाहते. उसका परिणाम यह होता है कि डिग्री निकलने के बाद छात्र-छात्राओं में असमंजस की स्थिति में रहते हैं. उन्हें क्या करना है कहां जाना है कौन सा मार्ग उसका होगा पता नहीं होता. हमें उस दौरान इसका व्यवहारिक ज्ञान दें, जब वे संस्थानों में अध्ययन कर रहे हो.

विभिन्न शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शासन के साथ में समन्वय स्थापित करके सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को बताएं विश्वविद्यालय और महाविद्यालय उस क्षेत्र के विकास के लिए समस्याओं को दूर करने के लिए आगे आएं.अनुकूल परिस्थितियों को और अधिक अनुकूल बनाने की दिशा में हम कैसे सहयोगी बन सकते हैं. यह सब लोगों को आगे आकर निर्णायक भूमिका का निर्वहन करना होगा.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय जब अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है. जब महाविद्यालय के प्राचार्य हमारे पास आए तो मैं स्वयं भूल गया था. मेरी स्मृतियों में नहीं था. मैंने कहा कि आपकी संस्था का ही स्वर्ण जयंती वर्ष नहीं है. इस संस्था को मौलिक और आगे बढ़ाने के साथ एक लंबे समय तक जिनका सानिध्य मिला 4 दशक से अधिक समय तक ब्रह्मलीन महंत जन्म का शताब्दी वर्ष चल रहा है. उनकी जयंती के 125 वर्ष इस वर्ष में होने जा रहे हैं. महाविद्यालय ने स्वर्ण जयंती वर्ष के साथ उनकी जयंती वर्ष का भी सफल आयोजन किया, इसके लिए मैं उनका आभार प्रकट करता हूं. 

उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ की पुण्यतिथि, 125 वां जयंती वर्ष, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्वर्ण जयंती वर्ष, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ की 50वीं आज पुण्यतिथि भी है. इस सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई देता हूं. इन महापुरुषों के आदर्श को हम अनुसरण कर सकें यही कामना करता हूं. अपने संबोधन को समाप्त करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गए. वहां पर उन्होंने गुरु गोरक्षनाथ के दर्शन कर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ व अवैध नाथ का आशीर्वाद लेकर सिद्धार्थनगर के लिए प्रस्थान कर गए.