महाराजा सुहेलदेव जयंती को धूमधाम से मनाएगी योगी सरकार, PM मोदी स्मारक का करेंगे शिलान्यास

बहराइच जिले में  चित्तौरा झील पर स्थित महाराजा सुहेलदेव की कर्मस्थली को अब एक अलग पहचान मिलेगी. वहां महाराजा सुहेलदेव की याद में 4.20 मीटर ऊंचा स्मारक और चित्तौरा झील के तट पर घाट एवं छतरी के निर्माण का कराया जाएगा. इसके अलावा कई अन्य योजनाएं शुरु की जाएंगी. 

महाराजा सुहेलदेव जयंती को धूमधाम से मनाएगी योगी सरकार, PM मोदी स्मारक का करेंगे शिलान्यास

पवन सेंगर/लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर महाराजा सुहेलदेव की जयंती पर उनके पराक्रम और राष्ट्रसेवा भाव को असली सम्मान मिलने जा रहा है. जिसके तहत बहराइच जिले में  चित्तौरा झील पर स्थित महाराजा सुहेलदेव की कर्मस्थली को अब एक अलग पहचान मिलेगी. वहां महाराजा सुहेलदेव की याद में 4.20 मीटर ऊंचा स्मारक और चित्तौरा झील के तट पर घाट एवं छतरी के निर्माण का कराया जाएगा. इसके अलावा कई अन्य योजनाएं शुरु की जाएंगी. 

पीएम मोदी वर्चुअल रूप से होंगे शामिल
11वीं शाताब्दी के प्रतापी शासक एवं पराक्रमी योद्धा महाराजा सुहेलदेव की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे. इस समूचे आयोजन की रुपरेखा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही तैयार की है. जिसके तहत प्रदेश की सरकार महाराजा सुहेलदेव की जयंती पूरे प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाएगी. इस दौरान प्रदेश भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. बहराइच में 16 फरवरी (बसंत पंचमी) को इस संबंध में आयोजित कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल रूप से संबोधित भी करेंगे.

बहराइच-श्रावस्ती को मिलेगी बड़ी सौगात
कार्यक्रम के दौरान बहराइच और श्रावस्ती के लिए कुछ बड़ी सौगातों की भी घोषणा की जायेगी। जिसके तहत महाराज सुहेलदेव की अश्वरोधी मुद्रा में कांस्य प्रतिमा की स्थापना, विशिष्ट अतिथि गृह, पर्यटक आवास गृह एवं कैफेटेरिया का निर्माण, चित्तौरा झील के तट पर घाट एवं छतरी का निर्माण, सामाजिक महोत्सव हाल/लान का निर्माण और बच्चों के लिए पार्क एवं जिम का निर्माण करने का ऐलान किया जाएगा. इससे चित्तौरा झील पर स्थित महाराजा सुहेलदेव की कर्मस्थली को अब एक अलग पहचान मिलेगी.

ऐसे थे महाराज सुहेलदेव
यूपी की धरती आदिकाल से ही अध्यात्म, संकृति और शौर्य से संपन्न रही है. यहां अवतारों के साथ-साथ ऋषियों, योगियों और तपषियों ने देश-दुनिया को भारत के गौरव से परिचित कराया. इन्हीं वीरों में एक नाम महाराजा सुहेलदेव का है. महान संत बालार्क ऋषि के शिष्य और श्रावस्ती के राजा महाराज सुहेलदेव ने अपने शौर्य और पराक्रम के साथ थारु बंजारा सहित अनेक जाति समूहों और राजाओं का समूह बनाकर कौडियाला नदी के तट पर चित्तौरा के युद्ध में 15 जून 1033 को विदेशी आक्रान्ता महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी का उसकी सेना सहित संहार किया. 

स्थानीय लोकगीतों की परंपरा में महाराज सुहेलदेव की वीरगाथा लोगों को रोमांचित करती रही है. यूपी की पावन भूमि पर लिखे जाने वाले गौरवशाली इतिहास में महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम और शौर्य की गाथा दिग्दिगंतर तक भारतीय जनमानस को प्रेरित करती रही है. एक पराक्रमी राजा होने के साथ सुहेलदेव संतों को बेहद सम्मान देते थे. वह गोरक्षक और हिंदुत्व के भी रक्षक थे.     

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