लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए योगी सरकार की तैयारी, हर जिले में बेचेगी आलू-प्याज

उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज में एक अनुमान के मुताबिक करीब 10 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है, जो लगभग डेढ़ माह की खपत के लिए पर्याप्त है. आलू की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल की वजह इस वर्ष पैदावार कम हाेने के साथ कम स्टोरेज होना भी है.

लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए योगी सरकार की तैयारी, हर जिले में बेचेगी आलू-प्याज

लखनऊ: सब्जियों की आसमान छूती कीमतों पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सक्रिय हो गई है. प्याज की स्टॉक लिमिट तय करने के बाद अब सरकार की तैयारी सीधे किसानों से आलू और प्याज खरीदकर उचित दर पर आम लोगों तक पहुंचाने की है. इसके लिए सरकारी बिक्री केंद्र खोले जाएंगे. राजधानी लखनऊ में यह व्यवस्था शुरू करने के बाद अब योगी सरकार इसे राज्य के सभी जिलों में लागू करने जा रही है. आम लोगों को आलू और प्याज उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड), मंडी परिषद, दुग्ध विकास विभाग और राज्य कल्याण निगम को बिक्री केंद्र स्थापित कराने को कहा गया है.

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कम पैदावार और भंडारण नहीं होने से आलू का भाव चढ़ा
हाफेड के प्रबंध निदेशक आरके तोमर के अनुसार लखनऊ में तीन बिक्री केंद्र संचालित हैं. जल्द ही अन्य जिलों में भी केंद्र स्थापित किए जाएंगे. आलू की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए योगी सरकार ने 31 अक्टूबर तक कोल्ड स्टोरेज संचालित करने के निर्देश दिए थे, ताकि जमाखाेरी को रोका जा सके. उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज में एक अनुमान के मुताबिक करीब 10 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है, जो लगभग डेढ़ माह की खपत के लिए पर्याप्त है. आलू की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल की वजह इस वर्ष पैदावार कम हाेने के साथ कम स्टोरेज होना भी है. पिछले वर्ष अक्टूबर महीने के अंत तक उत्तर प्रदेश के 1911 कोल्ड स्टोरेज में 30 लाख मीट्रिक टन के करीब आलू मौजूद था.

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थोक और फुटकर कीमतों में अंतर के कारण आलू महंगा
उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में मौजूद करीब 10 लाख मिट्रिक टन आलू प्रदेश की डेढ़ माह की खपत पूरी कर सकता है. इसके अलावा नवंबर माह के तीसरे सप्ताह में नया आलू भी बाजार में आने लगता है. परंतु फुटकर विक्रेताओं की मनमानी के चलते कीमतें काबू नहीं हो पा रही हैं. जमाखाेरी के अलावा थोक व फुटकर कीमतों में भारी अंतर के कारण भी आलू की महंगाई दिख रही है. मंडी में थोक में 25 से 27 रुपए प्रति किलो की दर से बिकने वाला आलू फुटकर में 35 से 35 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है. 

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