राज्यसभा में विपक्ष ने उठाया 2000 के नोट का मुद्दा

कांग्रेस ने बुधवार को राज्यसभा में मंगलवार को दिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण को मुद्दा बनाया. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति कोविंद द्वारा अपने भाषण में महात्मा गांधी की तुलना जनसंघ के वरिष्ठ नेता दीन दयाल उपाध्याय से की गई. 

राज्यसभा में विपक्ष ने उठाया 2000 के नोट का मुद्दा
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नई दिल्ली : कांग्रेस ने बुधवार को राज्यसभा में मंगलवार को दिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण को मुद्दा बनाया. कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति कोविंद द्वारा अपने भाषण में महात्मा गांधी की तुलना जनसंघ के वरिष्ठ नेता दीन दयाल उपाध्याय से की गई. बता दें कि मंगलवार को शपथ ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद में भाषण दिया था. इसके अलावा आज राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने 2000 रु. के नोटों की छपाई का मुद्दा उठाया. उन्होंने सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे उपसभापति पी. जे. कुरियन से कहा कि जब परंपरा रही है कि संसद सत्र के दौरान सरकार अगर नीतिगत फैसले लेती है तो सदन को बताया जाता है. ऐसे में इस बात की भी जानकारी देनी चाहिए कि क्या सरकार ने रिजर्व बैंक को 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद करने को कहा है.

इस सवाल पर उपसभापति ने सदन में मौजूद वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा कि क्या इन सवालो पर वह अपनी प्रतिक्रिया देना चाहते हैं? इस पर जेटली ने नहीं में जवाब दिया. तब जेडीयू सांसद शरद यादव ने विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए कहा कि सरकार ने 2000 रुपये के नोटों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की तो अफवाहों का बाजार गर्म होगा और लोग नोट लौटाने लगेंगे.

10 मिनट के स्थगित हुई सदन की कार्यवाही

राष्ट्रपति भाषण को लेकर कांग्रेस के आनंद शर्मा के सवाल पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई सदस्य राष्ट्रपति के भाषण पर सवाल खड़ा कर सकता है. अरुण जेटली ने आनंद शर्मा के बयान को हटाने की मांग की. राज्यसभा में इसके बाद हंगामा हो गया और कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा.

क्या कहा गया था भाषण में?

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा मंगलवार को अपने भाषण में कहा था, 'हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा. एक ऐसा समाज जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय जी ने की थी. ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है. ये हमारे सपनों का भारत होगा. एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा. ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा.'