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Electric- CNG वाहनों के इस्तेमाल से घट सकता है प्रदूषण! जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

दिल्ली में ऑड ईवन‌ के प्रयोग के बीच में सवाल उठता है कि एवं वाहन ही प्रदूषण फैला रहे हैं तो क्या ऐसे वाहन नहीं लाये जाएं जो खुद ही प्रदूषण घटा दें. 

Electric- CNG वाहनों के इस्तेमाल से घट सकता है प्रदूषण! जानिए क्या कहते हैं आंकड़े
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: दिल्ली में ऑड ईवन‌ के प्रयोग के बीच में सवाल उठता है कि एवं वाहन ही प्रदूषण फैला रहे हैं तो क्या ऐसे वाहन नहीं लाये जाएं जो खुद ही प्रदूषण घटा दें. इसका जवाब है इलेक्ट्रिक वाहन और सीएनजी वाहन प्रदूषण घटाने में बहुत मददगार हो सकते हैं. यूरोपियन एन्वायरमेंट एजेंसी (EEA) की स्टडी कहती है कि इलेक्ट्रिक वाहन बाक़ी पेट्रोल डीज़ल वाहनों के मुकाबले वातावरण में कम ग्रीनहाउस गैस छोड़ते हैं. अपनी पूरी लाइफ साइकल में इलेक्ट्रिक वाहन अधिकतम 30% तक कम ग्रीन हाउस गैस छोड़ते हैं.

वहीं प्रति किलोमीटर पैच में 7.7 किलोग्राम CO2 घटाते हैं.  स्टडी ये भी कहती है इलेक्ट्रिक वाहनों के पीछे लगे पाइप से घुआं नहीं निकलता है यहां तक कि ध्वनि प्रदूषण भी नहीं होता है. द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्‍टीट्यूट (TERI) के वैज्ञानिक इंजीनियर आलेख्या दत्ता अपने शोध से बताते हैं कि यदि दिल्ली में मौजूदा टू व्हीलर और फोर व्हीलर वाहन 80 लाख टन कार्बन डाइ ऑक्साइड सालाना उत्सर्जित करते हैं.

अगर इन सबको इलेक्ट्रिक में बदल दिया जाए तो केवल 50 लाख टन CO2 ही उत्सर्जित होगी. यानि 30 लाख टन CO2 कम होगी. वहीं अगर सभी फोर व्हीलर को CNG में बदल दिया जाए तो 17 लाख टन CO2 सालाना कम उत्सर्जित होगी. सरकार FAME योजना के तहत देश भर में 5595 बसें भी उतार रही है जिसमें से दिल्ली को 400 मिलेंगी.

इससे अगले आठ साल में 26 लाख टन कार्बन डाइ ऑक्साइड कम उत्सर्जित होगा. दिल्ली में होने वाले प्रदूषण (PM-2.5 पैमाना) में वाहनों की वजह से होने वाले प्रदूषण 28% है.

वाहनों से होने वाले प्रदूषण इस प्रकार है-
ट्रक-    29%
टू व्हीलर- 25%
थ्री व्हीलर-17%
कार      -12%
बस      - 9%
ट्रेक्टर   -5%
एलसीवी-3%

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये वैज्ञानिक ये मानकर चल रहे हैं कि अभी जो ग्रीन हाउस गैसों के कम उत्सर्जन के आंकड़ें है वो क्लीन एनर्जी बनने से आगे जानकर बहुत घट जाएगा. कहने का मतलब ये कि जो बिजली बन रही है वो ज्यादातर कोयले से बन रही है क्योंकि कोयले से बिजली बनने के दौरान भी कार्बन उत्सर्जन होता है.

अगर बिजली बनने में कोयले का उपयोग कम हो जाए तो ग्रीन हाउस गैस बनना बहुत ही कम हो जाएगा. और इस तरह इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण बहुत ही कम हो जाएगा.