War news: तकनीक के दौर में युद्ध के तौर-तरीके बदल गए हैं. आमने सामने की लड़ाई के बजाए अब हवा में युद्ध लड़ा जाता है. समंदर में युद्धपोत और पनडुब्बियां बढ़ाने से इतर इजरायल और यूक्रेन जैसे देश दुश्मनों को नाको चने चबवाने के लिए ऐसी 'सीक्रेट फोर्स' तैयार कर चुके हैं, जो चंद पैसों के खातिर कुछ भी कर देती है.
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Israel Iran war Ukraine Russia war: दुश्मन को गफलत में उलझाकर कम समय और कम खर्च में तगड़ा नुकसान देने के लिए इजरायल और यूक्रेन नेक्स्ट लेवल की युद्धनीति पर काफी आगे बढ़ चुके हैं. इस बात के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं कि ईरान को झुकाने के लिए इजरायल और रूस से बदला लेने के लिए यूक्रेन दुश्मन की कमजोर नस दबाकर उसके रक्षा प्रतिष्ठानों पर सीक्रेट अटैक करवा रहा है. इस मुहिम के लिए स्थानीय एजेंटों और हाई-टेक गैजेट्स खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा हैं.
ट्रेनिंग और टेकनीक
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी साल जून, 2025 में इजरायल ने ईरान के खिलाफ 12 दिन का जो मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च किया था. उसके लिए इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने एडवांस रिफाइन ऑटोमेटिक हथियारों खासकर दूर से कंट्रोल किए जाने वाले युद्ध उपकरणों से हमले करवाने के लिए तेहरान के आम स्थानीय लोगों पर न सिर्फ भरोसा किया बल्कि उन्हें ट्रेंड करके एक फौजी की तरह इस्तेमाल किया.
तेहरान की 'तेरहवी'
हालांकि इजरायल के लिए दुश्मन देश के अंदर से ऐसा कामयाब ऑपरेशन चलाना आसान नहीं था. इसके लिए मोसाद ने सालों तैयारी की और तब ईरान के अंदर लोकल लोगों का ऐसा नेटवर्क बनाया कि उन्हें कोई पहचान नहीं सका. 'सीक्रेट' सेना में में वो लोग चुने गए जो ईरान की सरकार के दमन के शिकार थे या हाशिए पर पड़े जातीय अल्पसंख्यकों और वहां रहने वाले विदेशियों का नेटवर्कों की ऐसी टीम बनाई जो खुद को सुरक्षित रखते हुए किसी भी तरह के मिलिट्री अटैक करवा सकती थी.
सूत्रों के मुताबिक 13 जून को ऐसे एजेंटों ने ईरान में तस्करी करके लाए गए रॉकेट, ड्रोन और अन्य हथियारों का इस्तेमाल करके ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया. यूक्रेन भी रूस से लड़ने के लिए भी इसी निंजा टेकनीक को अमल में ला रहा है. कीव में बैठकर ऐसे ऑपरेशन पर नजर रखने वाले राष्ट्रपति जेलेंस्की को भी रूस में छिपे अपने एजेंट्स के बारे में बताया गया.
रूस-यूक्रेन युद्ध
यूक्रेन की लिस्ट में मौजूद एक केस स्टडी की बात करें तो यूक्रेनी कमांडरों और जासूसों ने एक डीजे आर्टेम टिमोफीव और उनकी टैटू आर्टिस्ट पत्नी कटेरीना जैसे कई रूसी लोगों की मदद से रूस के डिफेंस ऑफिस के पास मौजूद एक गोदाम से बेहद गुप्त रूप से ऑपरेशन स्पाइडरवेब लॉन्च किया. कीव द्वारा दिए गए एडवांस अमेरिकी हथियारों और तकनीक का इस्तेमाल करके, इस जोड़े ने समाज का हिस्सा रहते हुए रूसी रक्षा ठिकानों पर कई हमले किए जिसमें पुतिन की सेना और रूस के खजाने को तगड़ा नुकसान हुआ.
बीते सालभर में, इजरायल और यूक्रेन दोनों ने पारंपरिक ह्यूमन सीक्रेट एजेंट्स को एडवांस टेकनीक से लैस किया है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि कम संख्या में होने के बावजूद ऐसे कथित 'गद्दार' एजेंट्स अपनी पहचान छिपाते हुए मुश्किल से मुश्किल हमलों को अंजाम दे सकते हैं. क्योंकि जिस पर हमला होना है उसे पता ही नहीं होता कि हमलावर सीमापार से नहीं बल्कि अपनों की आड़ लेकर कहीं आस-पास छिपा है.
द 'WSJ' की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के पैटर्न पर यूक्रेन ने भी खूब काम किया. आज अकेले 007 एजेंट की तलाश नहीं करनी पड़ती. सामान्य लोग भी तकनीक के दम पर ऐसे जटिल ऑपरेशंस कामयाबी से अंजाम दे रहे हैं, जिन्हें करना असंभव माना जाता था. यूक्रेनी एजेंट्स रूसी समाज में घुल-मिलकर आए दिन हत्याएं और ड्रोन हमले कर रहे हैं. वो अपने टारगेट यानी रूसी सैनिकों का पता लगाने और मारने के लिए क्राउड-सोर्स्ड इंटेलिजेंस और AI-जेनरेटेड टूल्स का इस्तेमाल करते हैं.