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कर्णप्रयाग न्यूज/जितेंद्र पंवार: उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन यह दस्तक इस बार खुशहाली की जगह आफत लेकर आई है. चमोली जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के साथ ही लैंडस्लाइड की घटनाओं ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग पर घंटों फंसा रहा आवागमन
मानसून की शुरुआत में ही चमोली की सड़कें खतरे का सबब बन गई हैं. आज सुबह नंदप्रयाग-नंदानगर मोटरमार्ग पर पहाड़ी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और विशालकाय बोल्डर सड़क पर आ गिरे. मलबे के कारण सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. पहाड़ी रास्तों पर बारिश के बीच फंसे यात्रियों के लिए यह स्थिति किसी संकट से कम नहीं थी.
प्रशासन का इंतजार किए बिना खुद उतरे ग्रामीण
इस घटना की सबसे खास बात यह रही कि यात्रियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की मशीनरी या राहत दल के आने का घंटों तक इंतज़ार नहीं किया. जैसे ही सड़क बंद हुई, वहां से गुजर रहे लोग और स्थानीय ग्रामीण खुद ही फावड़े और अन्य उपलब्ध संसाधनों के साथ सड़क पर उतर आए. कड़ी मशक्कत के बाद, लोगों ने खुद ही बोल्डर हटाकर और मलबा साफ कर करीब दो घंटे बाद मार्ग को छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया. राहगीरों की यह तत्परता संकट के समय आपसी सहयोग की मिसाल बनी.
आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में बारिश का दौर और तेज हो सकता है. ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कों के बंद होने की घटनाएं और बढ़ने की आशंका है. चमोली जैसे दुर्गम जिले में, जहां अधिकांश आबादी के लिए यही सड़कें जीवन रेखा हैं, बार-बार मार्ग बाधित होने से जरूरी सामानों की आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है.
प्रशासन और यात्रियों के लिए सुझाव
पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करते समय मौसम के पूर्वानुमान पर पूरी नजर रखें.
प्रशासन की भूमिका: प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में जेसीबी और राहत कर्मियों की तैनाती पहले से ही सुनिश्चित करनी चाहिए.
सावधानी: बारिश के समय पहाड़ी ढलानों के पास रुकने या वहां से गुजरने से बचें, क्योंकि मलबा कभी भी आ सकता है.
मानसून का यह सीजन चमोली के निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई और प्रशासन ने मुस्तैदी नहीं दिखाई, तो आने वाले दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं.