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हरिद्वार में नोएडा की तरह नौकरियों की बहार! 3000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर, आस्था का केंद्र बना औद्योगिक विकास की नई धुरी

Haridwar Industrial Development: हरिद्वार, जो अब तक आस्था और आध्यात्मिकता के केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है, तेजी से औद्योगिक विकास की नई पहचान भी गढ़ रहा है.  हरिद्वार में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र से 23000 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. 

सरकार की नीतियों से निवेशकों में उत्साह

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सरकार की नीतियों से निवेशकों में उत्साह

हरिद्वार में कुल 364 प्रस्तावों में से केवल एक ही प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ, जबकि बाकी को हरी झंडी मिल गई. यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेश प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सरल हो चुकी है. सरकार की सिंगल विंडो क्लियरेंस व्यवस्था ने इसमें अहम भूमिका निभाई है, जिससे निवेशकों को कम समय में अनुमति मिल रही है. 

 

बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर

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बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर

हरिद्वार की बेहतर कनेक्टिविटी, खासकर दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी, विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता इसे निवेश के लिए आकर्षक बना रही है. यही वजह है कि देश की बड़ी कंपनियां यहां अपने नए प्रोजेक्ट लगाने या विस्तार करने में रुचि दिखा रही हैं. 

 

औद्योगिक विस्तार से हजारों को रोजगार

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औद्योगिक विस्तार से हजारों को रोजगार

इन स्वीकृत निवेश प्रस्तावों से जिले में 23,212 नए रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जो स्थानीय युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकते हैं. वहीं, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही 107 करोड़ रुपये के 18 और प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं, जिनसे 801 लोगों को रोजगार मिलेगा. 

 

उभरता औद्योगिक हब, आंकड़े बने गवाह

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उभरता औद्योगिक हब, आंकड़े बने गवाह

पिछले एक दशक पर नजर डालें तो इन्वेस्ट उत्तराखंड पहल के तहत 2016 से अब तक 3,087 प्रस्तावों को स्वीकृति मिल चुकी है. इनसे 15,011 करोड़ रुपये का निवेश आया और 1.05 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं. यह आंकड़े हरिद्वार को राज्य के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करते हैं.

 

सिडकुल बना विकास का अग्रदूत

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सिडकुल बना विकास का अग्रदूत

फार्मा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और प्लास्टिक पैकेजिंग सेक्टर में सबसे अधिक निवेश देखने को मिल रहा है. सिडकुल क्षेत्र इन गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां पहले से कई नामी कंपनियां संचालित हैं. फार्मा सेक्टर में एपीआई और फॉर्मुलेशन यूनिट्स के जरिए निर्यात बढ़ाने की तैयारी है, जबकि ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस है. 

 

औद्योगिक विकास से कई नई चुनौती भी

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औद्योगिक विकास से कई नई चुनौती भी

पिछले कुछ बरसों में हरिद्वार औद्योगिक कॉरिडोर का विकास तो हुआ है, लेकिन बढ़ते औद्योगिकरण के साथ पानी, बिजली और कचरा प्रबंधन जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. सरकार इन मुद्दों के समाधान और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. 

 

Disclaimer

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Disclaimer

लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है.एआई के काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.