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बागेश्वर ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में रचा इतिहास, दुर्गम पहाड़ों से निकली सफलता की चमक

Uttarakhand Board Result 2026 Toppers: उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम में बागेश्वर ने सफलता के झंडे गाड़ दिये है. टॉपर्स की लिस्ट में न केवल बागेश्वर के छात्र-छात्राएं सबसे ज्यादा हैं बल्कि पूरा जिला ही बोर्ड परीक्षा में पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है. आइये जानते हैं इस सफलता का सूत्र क्या है. 

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में बागेश्वर अव्वल
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में बागेश्वर अव्वल

Yotesh Nagarkoti/Bageshwahr: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले ने इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाओं में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां के छात्रों ने मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम पर 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाओं में प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया है. 

बागेश्वर की सफलता को ऐसे समझें
इस वर्ष इंटरमीडिएट परीक्षा में बागेश्वर का कुल परिणाम 94.81 प्रतिशत रहा, जबकि हाईस्कूल में 96.98 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सफल हुए. यही नहीं, समग्र रूप से भी जिला पूरे राज्य में अव्वल रहा.  इंटरमीडिएट में 3237 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 3201 ने परीक्षा दी, जिनमें 3035 सफल रहे। वहीं हाईस्कूल में 3195 में से 3150 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 3055 ने सफलता हासिल की.

टॉपर्स लिस्ट में छाया बागेश्वर
जिले के विद्यार्थियों ने न केवल पास प्रतिशत में बल्कि मेरिट सूची में भी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई.  इंटरमीडिएट में गीतिका पंत ने 98 प्रतिशत अंक के साथ प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया. खुशी कांडपाल ने 96.40 प्रतिशत के साथ पांचवां स्थान हासिल किया, जबकि दीक्षा कांडपाल और रोहित सिंह मेहता ने संयुक्त रूप से 14वां स्थान प्राप्त किया. अन्य छात्रों में विवेक सिंह देव, स्नेहा आर्या, अनीशा सिंह और आशीष लोहनी ने भी शीर्ष सूची में जगह बनाई. 

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हाईस्कूल में योगेश जोशी ने 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया. इसके अलावा नैंसी नगरकोटी, लोकेश सिंह नेगी, तमन्ना ऐठानी, साक्षी मेहता और अन्य छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया

मोटिवेशन मॉडल हुआ सफल
इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे जिला प्रशासन की एक विशेष पहल भी अहम रही. परीक्षा से पहले जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे के निर्देशन में छात्रों के लिए मोटिवेशनल कार्यक्रम चलाए गए. अधिकारियों को स्कूलों में भेजकर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन और प्रेरणा दी गई, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और पढ़ाई के प्रति गंभीरता आई. 

शिक्षकों और अभिभावकों का मानना है कि यह सामूहिक प्रयास ही इस उपलब्धि की असली ताकत है. बागेश्वर ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती. 

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