VIDEO: जेल के दिनों को याद कर भावुक हुईं साध्वी प्रज्ञा, 'बेल्ट से पीटकर नमक छिड़कते थे'

प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि, गुनाह कबूल करवाने के लिए हमें उल्टा लटका दिया जाता था. निर्वस्त्र करने की धमकी दी जाती थी. 

VIDEO: जेल के दिनों को याद कर भावुक हुईं साध्वी प्रज्ञा, 'बेल्ट से पीटकर नमक छिड़कते थे'
फोटो साभारः ANI

नई दिल्ली: भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गुरुवार को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. संबोधन के दौरान प्रज्ञा उस समय भावुक हो गईं जिस समय वह अपने जेल की यातनाओं को पार्टी कार्यकर्ताओं को बता रही थीं. उन्होंने जेल में यातनाओं को याद करते हुए बताया कि, उन्हें 24 दिन तक लगातार जेल में पीटा गया. पीटने के दौरान उन्हें गाली दी जाती थी. प्रज्ञा ने बताया कि, उन्हें बेल्ट से पीटते थे जिससे उनका शरीर सुन्न पड़ जाता था. गुनाह कबूल करवाने के लिए हमें उल्टा लटका दिया जाता था. निर्वस्त्र करने की धमकी दी जाती थी. 

प्रज्ञा ने आगे बताया कि, उन्हें इतना पीटा गया कि करवट लेने भी दिक्कत होती थी. शरीर पर जो घाव के निशान पड़े थे उस पर नमक छिड़का जाता था. पुलिस मुझे मारने की तरह-तरह की साजिश करती थी. पुलिस तब तक पट्टे से पीटती थी जब तक शरीर से खून न निकलने लगे. इसके बाद इसी घाव पर नमक छिड़क दिया जाता था. 

दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में साध्वी प्रज्ञा 
बीजेपी ने ने उन्हें भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया है जहां उनका मुकाबला कांग्रेसी दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से होगा. भोपाल में करीब 18 लाख मतदाता हैं और इनमें से साढ़े चार लाख मतदाता मुसलमान है.पार्टी सूत्रों ने कहा कि ठाकुर की आरएसएस के झुकाव वाली छवि को देखते हुये कांग्रेस नेता के खिलाफ कट्टर हिंदुत्व वाली नेता को उतारा गया है. बीते साल हुये विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भोपाल लोकसभा की आठ विधानसभा सीटों में से तीन पर कब्जा कर लिया था जबकि बाकी पांच पर भाजपा ने जीत हासिल की थीं. 

कुछ महीने पहले एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था, ‘‘मैं धर्म युद्ध के लिए तैयार हूं.’’ उन्होंने कहा था, ‘‘मैं दिग्विजय सिंह से भिड़ने के लिए तैयार हूं अगर संगठन मुझसे ऐसा करने के लिए कहता है.’’ उन्होंने राज्य के इस पूर्व मुख्यमंत्री को ऐसे हिंदू विरोधी नेता की संज्ञा दी जो हिंदुओ को आतंकवादी बताता है. 

मालेगांव बम धमाका 
साल 2008 में उन्हें मालेगांव बम धमाके मामले में उनका नाम शामिल था. इस बहुचर्चित मामले में वह इन दिनों जमानत पर चल रही है. 27 दिसम्बर, 2017 में एनआईए अदालत ने उनके खिलाफ सख्त मकोका कानून (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत लगे आरोपों को हटा दिया था.