VIDEO: इस बार किसकी पतंग काट रहे हैं गृहमंत्री अमित शाह?

राजनीति में विरोधियों की डोर काटने वाले अमित शाह मंगलवार को पतंगबाजी के दौरान विरोधियों की डोर काटते नजर आए. 55 वर्षीय शाह हाथों से ऐसे डोर को खींच रहे हैं जिसे देखकर ऐसा लग रहा है मानो वे यहां भी किसी की डोर काटने की कोशिश कर रहे हैं. 

VIDEO: इस बार किसकी पतंग काट रहे हैं गृहमंत्री अमित शाह?
गृहमंत्री अमित शाह ने मकर संक्रांति पर पतंगाबाजी की.

अहमदाबाद: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के मौके पर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने पतंगबाजी का लुत्फ उठाया. सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि अमित शाह अहमदाबाद में अपने सहयोगियों के साथ पतंगबाजी कर रहे हैं. 55 वर्षीय शाह हाथों से ऐसे डोर को खींच रहे हैं जिसे देखकर ऐसा लग रहा है मानो वे यहां भी किसी की डोर काटने की कोशिश कर रहे हैं. राजनीति में विरोधियों की डोर काटने वाले अमित शाह मंगलवार को पतंगबाजी के दौरान विरोधियों की डोर काटते नजर आए. यहां आपको बता दें कि मकर संक्रांति को ही गुजरात में उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है. पीएम मोदी भी उत्तरायण के मौके पर पतंगबाजी को प्रोत्साहित करते रहे हैं.

मालूम हो कि इस बार गुजरात का मशहूर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस महोत्सव को मनाने के सांस्कृतिक महत्व से इतर इसका एक और अहम पहलू भी है. वह पहलू है मनोरंजन के साथ-साथ रोजगार मुहैया कराना. दुनिया भर में मशहूर यह पतंग महोत्सव लाखों लोगों की रोजी-रोटी का भी साधन है. इसी प्रमुख वजह के चलते गुजरात सरकार ने इस महोत्सव के जरिए पतंग उद्योग में सुधार और उसके उत्थान के लिए कई अहम कदम उठाए हैं.

गुजरात राज्य में रहने वाले कुछ परिवार तो ऐसे हैं जो, पूरी तरह से इसी पतंग व्यवसाय पर आश्रित हैं. पतंग उत्सव से कई महीने पहले ये परिवार पतंगों का निर्माण शुरू कर देते हैं. साल 2012 के एक सर्वे के मुताबिक में पतंग निर्माण उद्योग 175 करोड़ का था. इससे जुड़े 30,000 लोगों को रोजगार मिला. कालांतर में धीरे-धीरे ये तादाद बढ़ती ही गई. जिसके परिणाम-स्वरूप साल 2017-18 में ये उद्योग 625 करोड़ का हो गया. एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, लगभग 1,28,000 लोग गुजरात के पतंग उद्योग से जुड़े हुए हैं. इन आंकड़ों के नजरिये से गुजरात का पतंग उद्योग, हिंदुस्तान के कुछ बड़े घरेलू उद्योगों में शुमार होता जा रहा है.

पतंग उद्योग में पूरे देश में गुजरात की 40 फीसदी हिस्सेदारी है और इसमें लगभग 1.28 लाख लोग काम कर रहे हैं. पतंग महोत्सव कई स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है. गुजरात सरकार का सफल पतंग महोत्सव निश्चित रूप से विभिन्न तरीकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाता है. इससे जुड़े हुए पतंग निर्माता और व्यापारी खुद इस बात को मानते हैं कि इसके जरिए उनकी आय में इजाफा हुआ है.

गुजरात राज्य पर्यटन निगम लिमिटेड (टूरिज्म कापोर्रेशन ऑफ गुजरात यानि टीजीसीएल) के महाप्रबंधक जेनू देवन ने बताया, 'गुजरात राज्य पतंग महोत्सव से होने वाले पतंग व्यवसाय के आंकड़ों को लेकर हम लोग संतुष्ट हैं. खेल-खेल में इस तरह के और इतने बड़े पैमाने पर आय के साधन जल्दी निकल कर सामने नहीं आते हैं. राज्य का पतंग उद्योग वास्तव में हमारी (गुजरात राज्य पर्यटन निगम लिमिटेड) अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बन चुका है.'