BCI ने कहा, 'जजों का इस तरह से बयान देना सही नहीं, राजनीतिक दल फायदा उठाने की कोशिश न करें'

रोस्टर या मामलों के आवंटन को लेकर न्यायाधीशों के बीच मतभेदों पर बीसीआई ने कहा कि विवाद चाहे जो भी हो, सार्वजनिक तौर पर राय जाहिर किये बिना अंदरूनी व्यवस्था के जरिये उसका समाधान किया जाना चाहिये.

BCI ने कहा, 'जजों का इस तरह से बयान देना सही नहीं, राजनीतिक दल फायदा उठाने की कोशिश न करें'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिसरा. (ANI/13 Jan, 2018)

नई दिल्ली: भारतीय बार परिषद (बीसीआई) ने शनिवार (13 जनवरी) को राजनीतिक दलों और नेताओं को चेताया कि वह उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ एक तरह से विद्रोह किए जाने के बाद की स्थिति का ‘अनुचित फायदा’ नहीं उठाएं.बीसीआई ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश के साथ अपने मतभेदों को लेकर चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रेस वार्ता बुलाए जाने से राजनीतिक दलों और नेताओं को न्यायपालिका के मामलों में दखलअंदाजी करने का मौका मिल गया है. किसी का नाम लिये बिना बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा संवाददाता सम्मेलन बुलाए जाने से पैदा स्थिति का किसी राजनीतिक दल या नेता को अनुचित फायदा नहीं उठाना चाहिए. राजनीतिक दलों और नेताओं का संदर्भ महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कल इस प्रकरण के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था.

बीसीआई की 17 सदस्यीय संचालन समिति द्वारा आहूत आपातकालीन बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया कि सात सदस्यीय समिति वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों से 14 जनवरी मुलाकात करेगी. हालांकि मिश्रा ने बाद में स्पष्ट किया कि समिति के सदस्य बाद में प्रधान न्यायाधीश और प्रेस वार्ता बुलाने वाले चार न्यायाधीशों से भी मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि बीसीआई का नजरिया है कि न्यायाधीशों के इस तरह के मुद्दे सार्वजनिक नहीं होने चाहिए. उन्होंने कहा कि बीसीआई ने शीर्ष अदालत के आंतरिक मामलों में शामिल नहीं होने के सरकार के फैसले का स्वागत किया.

उल्लेखनीय है कि न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘सही नहीं हैं’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘अपेक्षा से कहीं कम’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘... कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’

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विवादों पर बोले जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायपालिका में कोई संकट नहीं है

वहीं दूसरी ओर भारत के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ ‘चयनात्मक’ तरीके से' मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों को लेकर एक तरह से बगावत करने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा कि ‘कोई संकट नहीं है.’ न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आये थे. कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई संकट नहीं है.’ यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है. मैं बात नहीं कर सकता.’ उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आये थे.

(इनपुट एजेंसी से भी)